9 टिप्पणियाँ

T-22/26 किसको किस राहगुज़र जाना है-उत्कर्ष ‘ग़ाफ़िल’

किसको किस राहगुज़र जाना है
कौन जाने कि किधर जाना है

मैं भी राही हूँ उसी मंज़िल का
तुझको जिस राह से घर जाना है

और क़िस्सा-ए-हवस है भी क्या
मुख़्तसर ये है कि मर जाना है

हाले-ग़म नज़्म ग़ज़ल में करके
आज हर हद से गुज़र जाना है

इक भरम है तू मुजस्सिम ‘ग़ाफ़िल’
थोड़ा भी तुझको अगर जाना है

उत्कर्ष ‘ग़ाफ़िल’ 09810735253

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9 comments on “T-22/26 किसको किस राहगुज़र जाना है-उत्कर्ष ‘ग़ाफ़िल’

  1. बहुत खूब उत्‍कर्ष जी।
    बढि़या ग़ज़ल। किस्‍सा-ए-हवस….आह..।
    दाद…।

  2. और क़िस्सा-ए-हवस है भी क्या
    मुख़्तसर ये है कि मर जाना है

    Zindabaad bhai Zindabaad… Kya sher keh diya aapne… Waah Waah Waah

    Bahut Mubaraqbaad…

  3. और किस्सा ए हवस…..
    उम्दा शेर.
    अच्छी ग़ज़ल के लिये बधाई उत्कर्ष भाई.

  4. Utkarsh bhai, badhiya ghazal hui hai..

    मुख़्तसर ये है कि मर जाना है.. kya kehne waaah!!

  5. अच्छी ग़ज़ल हुई है उत्कर्ष जी …दाद
    -कान्हा

  6. वाह वाह वह
    उत्कर्ष ग़ाफ़िल साहिब बहुत ख़ूब

  7. मैं भी राही हूँ उसी मंज़िल का
    तुझको जिस राह से घर जाना है

    और क़िस्सा-ए-हवस है भी क्या
    मुख़्तसर ये है कि मर जाना है

    kya baat hai utkasrh jii waahh waahh
    khoobsoorat gazal

    dili daad qubul keejiye

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