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T-22/25 आज हर हद से गुज़र जाना है -शाहिद हसन शाहिद

‘आज हर हद से गुज़र जाना है’
जाए सर अपना अगर जाना है

मौत के बाद किधर जाना है
क्या कोई अहले-नज़र जाना है ?

वादे से तेरा मुकर जाना है
दिल में ख़ंजर सा उत्तर जाना है

ये मुहब्बत का असर जाना है
खार को भी गुले-तर जाना है

तुमको हसरत से ज़माना देखे
काम ऐसा कोई कर जाना है

ज़ुल्मते-शब का गुज़रना हद से
हमने आग़ाज़े-सहर जाना है

गर्दिशे-वक़्त, सकूनत के लिए
तूने क्या मेरा ही घर जाना है

ख़ूबियां ढूंढ उसी में ‘शाहिद’
जिसको तू आम बशर जाना है

शाहिद हसन शाहिद 09759698300

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17 comments on “T-22/25 आज हर हद से गुज़र जाना है -शाहिद हसन शाहिद

  1. वादे से तेरा मुकर जाना है
    दिल में ख़ंजर सा उत्तर जाना है

    ये मुहब्बत का असर जाना है
    खार को भी गुले-तर जाना है

    तुमको हसरत से ज़माना देखे
    काम ऐसा कोई कर जाना है
    आदरणीय शाहिद साहब ,शेर दर शेर दाद कबूल फरमावें ,बेहतरीन ग़ज़ल हुई है |सादर |

  2. शाहिद साहब।
    ग़ज़ल के लिए भरपूर दाद।
    इस शे’र पर बतौरेख़़ास दाद कबूल कीजिए जनाब।

    गर्दिशे-वक़्त, सकूनत के लिए
    तूने क्या मेरा ही घर जाना है

    वा‍ह…वाह..।
    सादर
    नवनीत

  3. आज हर हद से गुज़र जाना है’
    जाए सर अपना अगर जाना है
    वाह !! खूब निभाया है गिरह को आपने !!! बडी आसानी से लासानी शेर कहा है !!
    मौत के बाद किधर जाना है
    क्या कोई अहले-नज़र जाना है ?
    ये तो अहले नज़र को भी नहीं मालूम लेकिन — शबे सफर तो इसी आस पे बितानी है
    अजल के मोड के आगे बहुत उजाला है !!!
    ये मुहब्बत का असर जाना है
    खार को भी गुले-तर जाना है
    अच्छा है दिल के पास रहे पासबाने अक़्ल .. लेकिन मुहब्बत में अक्ल नाम की शै का क्या काम ??!! दीवानगी तो वो मर्तबा है जो ऊपर वाला ही बख़्शता है बशर को !! और ये अतार्किक होती है !!
    तुमको हसरत से ज़माना देखे
    काम ऐसा कोई कर जाना है
    परस्तिश की याँ तक कि ऐ बुत तुझे
    नज़र में सभू की खुदा कर चले –मीर
    ज़ुल्मते-शब का गुज़रना हद से
    हमने आग़ाज़े-सहर जाना है
    बहुत खूब बहुत खूब !! क्या इंकलाब है !!!
    गर्दिशे-वक़्त, सकूनत के लिए
    तूने क्या मेरा ही घर जाना है
    छू रहा है शेर दिल को !!!
    ख़ूबियां ढूंढ उसी में ‘शाहिद’
    जिसको तू आम बशर जाना है
    अब तो पब्लिक का दिल भी इसी आम बशर पर माइल है !!! और उसमे खूबियाँ भी हैं !!
    शाहिद साहब !! उम्दा बयान !! मुबारक्बाद कुबूल केजिये –मयंक

  4. गर्दिशे-वक़्त, सकूनत के लिए
    तूने क्या मेरा ही घर जाना है

    ज़ुल्मते-शब का गुज़रना हद से
    हमने आग़ाज़े-सहर जाना है

    Ek kamyaab ghazal ke liye bahut bahut mubaraqbaad Shahid sahab

  5. तेरी ज़ुल्फ़ों का संवर जाना ही
    मेरी क़िस्मत का संवर जाना है । और….

    ‘आज हर हद से गुज़र जाना है’
    जाए सर अपना अगर जाना है ।

    दोनों ही गज़लें बेहतरीन ।

  6. Badhiya ghazal ke liye daad kubool farmaiye janab Azad Sb!!

    गर्दिशे-वक़्त, सकूनत के लिए
    तूने क्या मेरा ही घर जाना है

    kya maze ka sher hai..

    ख़ूबियां ढूंढ उसी में ‘शाहिद’
    जिसको तू आम बशर जाना है

    sadgi se bharpoor badhiya makta.. waaah

  7. ज़ुल्मते-शब का गुज़रना हद से
    हमने आग़ाज़े-सहर जाना है waahhh waahh
    matla bhi khoob hai sir

    ak behtreen gazal ke liye bharpoor daad

    regards

  8. Bahut khub gazal hui sir
    Daad kubul kijiye sir

  9. Bahut achhi ghazal hui hai Shahid sahab .. Girah bhi kamal hai ..waah
    -Kanha

  10. Zulmate shab ka gujarna had se……waaaahhhhhh khoob kaha hae…
    Behtareen gazal ke liye dheron daad qubool karein Shahid Sahab
    Sadar
    Pooja

  11. गर्दिशे-वक़्त, सकूनत के लिए
    तूने क्या मेरा ही घर जाना है zindabad shahid sahab..kya hi umda she’r hua hai… waah waah… daad qubulen

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