21 टिप्पणियाँ

T-22/24 कौन कहता है ठहर जाना है-बकुल देव

कौन कहता है ठहर जाना है
रंग चढ़ना है, उतर जाना है

ज़िन्दगी से रही सुह्बत बरसों
जाते जाते ही असर जाना है

टूटने को हैं सदाएं मेरी
ख़ामुशी तुझको बिखर जाना है

ख़्वाब नद्दी सा गुज़र जाएगा
दश्त आंखों में ठहर जाना है

कोई दिन हम भी न याद आएंगे
आख़िरश तू भी बिसर जाना है

कोइ दरिया न समंदर न सराब
तश्नगी बोल.. किधर जाना है

लग्ज़िशें जाएंगी जाते जाते
नश्शा माना कि उतर जाना है

नक़्श छोड़ा है हवा ने कोई
कौन सी सम्त सफर जाना है

ज़िन्दगी से हैं पशेमां हम भी,
कल ये दावा था कि मर जाना है.

बकुल देव 09672992110

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

21 comments on “T-22/24 कौन कहता है ठहर जाना है-बकुल देव

  1. कोइ दरिया न समंदर न सराब
    तश्नगी बोल.. किधर जाना है

    Kya baat hai waah…Jiyo

  2. कोइ दरिया न समंदर न सराब
    तश्नगी बोल.. किधर जाना है

    Waah kya sher hua hai…..bahut bahut badhai sahab ….puri gazal hi achhi hui hai….

  3. कौन कहता है ठहर जाना है
    रंग चढ़ना है, उतर जाना है
    Kya hi achcha matla hua hai.. waaah

    ज़िन्दगी से रही सुह्बत बरसों
    जाते जाते ही असर जाना है

    टूटने को हैं सदाएं मेरी
    ख़ामुशी तुझको बिखर जाना है

    ख़्वाब नद्दी सा गुज़र जाएगा
    दश्त आंखों में ठहर जाना है

    कोई दिन हम भी न याद आएंगे
    आख़िरश तू भी बिसर जाना है

    कोइ दरिया न समंदर न सराब
    तश्नगी बोल.. किधर जाना है

    लग्ज़िशें जाएंगी जाते जाते
    नश्शा माना कि उतर जाना है

    नक़्श छोड़ा है हवा ने कोई
    कौन सी सम्त सफर जाना है

    ज़िन्दगी से हैं पशेमां हम भी,
    कल ये दावा था कि मर जाना है.

    murassa ghazal ke liye mubarakbaad!! waaah!!

  4. ज़िन्दगी से रही सुह्बत बरसों
    जाते जाते ही असर जाना है
    वाकई !! रहने दो अभी सागरो-मीन मेरे आगे !!! ….कब तक हवा हुबाब में असीर रहेगी और कब तक रूह जिस्म का पैरहन पहनेगी सभी जानते हैं लेकिन सरायफानी का मोह छूटता नहीं !!
    टूटने को हैं सदाएं मेरी
    ख़ामुशी तुझको बिखर जाना है
    शिल्प अच्छा है !!
    ख़्वाब नद्दी सा गुज़र जाएगा
    दश्त आंखों में ठहर जाना है
    चन्द लम्हों को ही बुनती हैं मुसव्विर आँखें !! ज़िन्दगी रोज़ तो तस्वीर बनाने से रही !!! वैसे भी काइनात मे मनाज़िर कम और खला ज़ियादा है !!!
    कोई दिन हम भी न याद आएंगे
    आख़िरश तू भी बिसर जाना है
    अच्छा कहा है !!! हर मुलाकात का अंजाम जुदाई है !!!
    कोइ दरिया न समंदर न सराब
    तश्नगी बोल.. किधर जाना है
    बढिया शेर कहा है !!! तिश्नगी के यही मुकाम हैं !! दरिया तस्लीम –समन्दर का चलन तो सराब जैसा ही है और सराब तो छल है !! लिहाजा जुस्तजू भी सच , भरम और भ्रम की जानिब ही माइल होती है इनके लिये दरिया समन्दर और सराब के सिम्बल बहुत खूबसूरत हैं !!!
    लग्ज़िशें जाएंगी जाते जाते
    नश्शा माना कि उतर जाना है
    ज़ुबान पर दाद !!!
    नक़्श छोड़ा है हवा ने कोई
    कौन सी सम्त सफर जाना है
    नहीं छोडा हवा ने कोई नक़्श !! कोई खुशबू तादेर काइन नहीं रहेगी और हवा का कोई वतन नहीं इसलिये कि – हवा के आँख नहीं हाथ और पाण्व नहीं –इसीलिये तो वो हरेक स्मत जाती है !!
    ज़िन्दगी से हैं पशेमां हम भी,
    कल ये दावा था कि मर जाना है.
    खुदकुशी अपना इरादा नहीं मजबूरी थी
    हमने इस दौर मे जीने का सबब पूछा था !!!
    फिर भी ज़िन्दगी नेमत है और इसीलिये शम्म: हर रंग मे जलेगी सहर होने तक !! ज़िन्दगी से खुशफेलियाँ और गलतफहमियाँ दोनो ही अच्छी नहीं !!
    बकुल देव भाई !! आप बहुत बडी उमीद थे गज़ल की जो अब यकीन मे तब्दील हो गई है –मयंक

  5. ख़्वाब नद्दी सा गुज़र जाएगा
    दश्त आंखों में ठहर जाना है

    ज़िन्दगी से हैं पशेमां हम भी,
    कल ये दावा था कि मर जाना है.

    ज़िन्दगी से रही सुह्बत बरसों
    जाते जाते ही असर जाना है

    Bakul bhai Ek behtareen ghazal ke liye bahut bahut Mubarakbaad 🙂

  6. सारी ग़ज़ल बहुत अच्‍छी है बकुल साहब। खा़सतौर पर उदासी के जो शेड्स निखरे है…वे मुझे बहुत करीब लगे।
    लेकिन फिर भी ये शे’र मैं साथ लिए जा रहा हूं…

    ज़िन्दगी से रही सुह्बत बरसों
    जाते जाते ही असर जाना है

    नवनीत

  7. कोइ दरिया न समंदर न सराब
    तश्नगी बोल.. किधर जाना है… क्या बात है… वाह…

  8. कोइ दरिया न समंदर न सराब
    तश्नगी बोल.. किधर जाना है ।।।। गज़ब ।

  9. कौन कहता है ठहर जाना है
    रंग चढ़ना है, उतर जाना है

    ज़िन्दगी से रही सुह्बत बरसों
    जाते जाते ही असर जाना है

    टूटने को हैं सदाएं मेरी
    ख़ामुशी तुझको बिखर जाना है

    ख़्वाब नद्दी सा गुज़र जाएगा
    दश्त आंखों में ठहर जाना है

    कोई दिन हम भी न याद आएंगे
    आख़िरश तू भी बिसर जाना है

    tamaam gazal hi umda hai Bakuldeo sahab waahh waahhh waahh

    dili mubarakbad

  10. Bahut khub gazal hui
    WAhhh wahhhh

  11. Bahut achi gazal hui sir
    DIli daad kubul kijiye

  12. Bakul Ji, bahut umda ghazal hai. mubarakbaad qubool farmayen. ‘SHAHID’

  13. ज़िन्दगी से रही सुह्बत बरसों
    जाते जाते ही असर जाना है

    ख़्वाब नद्दी सा गुज़र जाएगा
    दश्त आंखों में ठहर जाना है

    Kya kehne bhaiya ..waahhh…
    -Kanha

  14. Bakul Sahab behad umda gazal kahi hae aapne….kis sher ka zikr kiya jaye kiska nahi…ek se ek aala sher kahe hein aapne….dheron badhai or shukriya itni umda gazal se navazne ke liye
    Sadar
    Pooja

  15. bakul bhai..zindabdaad,,,, kya hi umda ghazal hai…. aur zindagi se rahi suhbat barson…. kya hi zabardast she’r kah diya aapne… waah waah waah… daad qubulen

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: