24 Comments

T-22/22 और क्या फूल को कर जाना है-गजेन्द्र श्रोत्रिय

और क्या फूल को कर जाना है
बस महक दे के बिखर जाना है

जिस्म को छोड़ यहीं पर इक दिन
लौट के रूह को घर जाना है

वक़्त चूहे सा पड़ा है पीछे
उम्रे-फ़ानी को कुतर जाना है

वो ज़मानों में रहेगा ज़िंदा
जिसने मिटने का हुनर जाना है

ख़ाहिशें टांग दी मुझ पर सबने
मुझको जन्नत का शजर जाना है

रास्ते और भी हैं पर हमको
मीरो-ग़ालिब की डगर जाना है

झील में चाँद नहाने उतरा
रात का रूप निखर जाना है

डूबती रात के तारे हैं हम
हमको होते ही सहर जाना है

अद्ल में पैठ है मुलज़िम की अगर
सब गवाहों को मुकर जाना है

शब के परदों से ढको सूरज को
दिल को ख्वाबों के नगर जाना है

नींद की रेल के ठहरे पहिये
दौड़ता ख़ाब ठहर जाना है

गजेन्द्र श्रोत्रिय 09928158682

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

24 comments on “T-22/22 और क्या फूल को कर जाना है-गजेन्द्र श्रोत्रिय

  1. ख़ाहिशें टांग दी मुझ पर सबने
    मुझको जन्नत का शजर जाना है

    Behtariin Ghazal kahi hai janab…daad kaboolen

  2. Murassa ghazal ke liye dili daad kubool kijiye janab!!

  3. और क्या फूल को कर जाना है
    बस महक दे के बिखर जाना है
    फूलो की यारों देखो डगर
    जीते हैं एक ही रात मगर
    हंस के बिताते हैं .. ज़िन्दगी का सफर

    सौन्दर्य वक़्फे मे नहीं लम्हों मे है और सबसे खूबसूरत क्षण वर्तमान का क्षण होता है !!! फूल हमें जीवन की प्रेरणा देते हैं –मतले पर दाद !!!
    वक़्त चूहे सा पड़ा है पीछे
    उम्रे-फ़ानी को कुतर जाना है
    नयापन है शेर है !! समय की क्षरण क्षमता की प्रतिष्ठा स्थापित की गई है !!!
    वो ज़मानों में रहेगा ज़िंदा
    जिसने मिटने का हुनर जाना है
    ज़मानो में , निसाबों मे , फसानों मे और ज़ुबानों मे वही ज़िन्दा रहेगा जिसने मिटने का हुनर जान लिया !! वाह वाह !!
    ख़ाहिशें टांग दी मुझ पर सबने
    मुझको जन्नत का शजर जाना है
    खूब कहा है !! बिल्कुल नया शेर है !!! और अपेक्षा और प्रत्याशा दो कारक हैं जिनके कारण लोग आपसे जुदते हैं !!!
    रास्ते और भी हैं पर हमको
    मीरो-ग़ालिब की डगर जाना है
    वेल्कम !!
    झील में चाँद नहाने उतरा
    रात का रूप निखर जाना है
    तस्वीर दिलकश है !!
    डूबती रात के तारे हैं हम
    हमको होते ही सहर जाना है
    नयापन है शेर में !!!
    अद्ल में पैठ है मुलज़िम की अगर
    सब गवाहों को मुकर जाना है
    माहौल ऐसा ही है !!!
    शब के परदों से ढको सूरज को
    दिल को ख्वाबों के नगर जाना है
    तनहाई की अपनी ज़रूरतें हैं !!! शेर अच्छा कहा है !!!
    गजेन्द्र श्रोत्रिय जी !!! आपने नये और ताज़े शेर कहे और ज़ुबान भी बहुत खूबसूरत है !! गज़ल के लिये मुबारकबाद –मयंक

  4. और क्या फूल को कर जाना है
    बस महक दे के बिखर जाना है

    जिस्म को छोड़ यहीं पर इक दिन
    लौट के रूह को घर जाना है

    वक़्त चूहे सा पड़ा है पीछे
    उम्रे-फ़ानी को कुतर जाना है

    वो ज़मानों में रहेगा ज़िंदा
    जिसने मिटने का हुनर जाना है

    ख़ाहिशें टांग दी मुझ पर सबने
    मुझको जन्नत का शजर जाना है

    रास्ते और भी हैं पर हमको
    मीरो-ग़ालिब की डगर जाना है

    झील में चाँद नहाने उतरा
    रात का रूप निखर जाना है

    डूबती रात के तारे हैं हम
    हमको होते ही सहर जाना है

    अद्ल में पैठ है मुलज़िम की अगर
    सब गवाहों को मुकर जाना है

    शब के परदों से ढको सूरज को
    दिल को ख्वाबों के नगर जाना है

    नींद की रेल के ठहरे पहिये
    दौड़ता ख़ाब ठहर जाना है

    वाह….वाह…वाह।
    बहुत खूब कहा।
    सारे अश्‍आर बहुत पसंद आए साहब।
    नवनीत

  5. झील में चाँद नहाने उतरा
    रात का रूप निखर जाना है ।
    गज़ल का शेर हुआ ।

  6. Gajendra bhai, behtreen ghazal k liye mubarakbaad qubool farmayen, Wah.

  7. झील में चाँद नहाने उतरा
    रात का रूप निखर जाना ह

    नींद की रेल के ठहरे पहिये
    दौड़ता ख़ाब ठहर जाना है

    kya baat hai sahab waahh waahh waah

    dili daad qubul keejiye

  8. क्या ही उम्दा ग़ज़ल है गजेन्द्र जी ..वाह ..दाद

  9. Khahishein taang di….. wah kya hi khoob gazal kaji hae Gajendra ji
    Dili daad qubool karein
    Sadar
    Pooja

  10. Khwahishein taang di…..
    Waah khoob farmaya hae Gajendra ji aapne… behad khoobsoorat gazal hui hae.
    Dheron daad kubool karein
    Sadar
    Pooja

  11. ख़ाहिशें टांग दी मुझ पर सबने
    मुझको जन्नत का शजर जाना है

    नींद की रेल के ठहरे पहिये
    दौड़ता ख़ाब ठहर जाना है

    kya hi achi ghazal hui hai gajendra sahab.. ye do sher behad pasand aaye… daad qubulen

  12. झील में चांद नहाने उतरा..
    वाह !
    क्या ख़ूबसूरत मंज़र खेंचा है गजेन्द्र भाई.
    मुबारक !

  13. नींद की रेल के ठहरे पहिये
    दौड़ता ख़ाब ठहर जाना है

    Bahut achhi gazal hui hai sahab… Mubarakbaad Qubool Farmayein …

    Dinesh

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: