8 टिप्पणियाँ

T-22/15 टूटना और बिखर जाना है-असरारुल हक़ ‘असरार’

टूटना और बिखर जाना है
वक़्त को आइना कर जाना है

उसके वादे पे यक़ीं है हमको
जिसकी आदत ही मुकर जाना है

हमने हर हुस्न सही हो कि ग़लत
अपना ही हुस्ने-नज़र जाना है

दाग़ रह जायेगा आईने सा
ज़ख़्म तो ज़ख़्म है भर जाना है

हम कि शहज़ादा नहीं है हर सम्त
सम्त चौथी है जिधर जाना है

आग पानी की नहीं है तफ़रीक़
हर चढ़ा दरिया उत्तर जाना है

सोच लो खूब समझ लो ‘असरार’
सर उठाओगे तो सर जाना है

असरारुल हक़ ‘असरार’ 09410274896

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8 comments on “T-22/15 टूटना और बिखर जाना है-असरारुल हक़ ‘असरार’

  1. Ustadaana gazal….ham kya kahen…bas aapse har baar kuch sikhne ko milta hai…

    उसके वादे पे यक़ीं है हमको
    जिसकी आदत ही मुकर जाना है

    Waah..waah…

  2. उस्‍तादों की ग़ज़ल पर क्‍या कहें। वाह..वाह.. के सिवा।
    सादर
    नवनीत

  3. टूटना और बिखर जाना है
    वक़्त को आइना कर जाना है

    उसके वादे पे यक़ीं है हमको
    जिसकी आदत ही मुकर जाना है

    हमने हर हुस्न सही हो कि ग़लत
    अपना ही हुस्ने-नज़र जाना है
    असरार साहब बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है |ढेरों दाद कबूल फरमावें |मक्ते का शेर अनोखा शेर है,बेशकीमती है
    दाद कम पड़ जाएगी |वा…ह क्या कहन है
    सोच लो खूब समझ लो ‘असरार’
    सर उठाओगे तो सर जाना है
    सादर

  4. टूटना और बिखर जाना है
    वक़्त को आइना कर जाना है
    नया ताज़ा और पुर असर मतला है !!!
    उसके वादे पे यक़ीं है हमको
    जिसकी आदत ही मुकर जाना है
    जादू है या तिलस्म तुम्हारी ज़बान में
    तुम झूठ कह रहे थे मुझे ऐतबार था

    मुहब्बत अतार्किक होती है !! यही उसकी खासियत है यही उसका ऐब भी !!!
    हमने हर हुस्न सही हो कि ग़लत
    अपना ही हुस्ने-नज़र जाना है
    बडी बात है ज़िन्दगी को ऐसे जीना कि आप खुद बैख़्तियार ही हर अहसास का मर्कज़ रहें!!!
    दाग़ रह जायेगा आईने सा
    ज़ख़्म तो ज़ख़्म है भर जाना है
    कुर्बान जाऊँ इस शेर पर !! “”दाग़ रह जायेगा आइने सा”” –ऐसे मुकम्मल मिसरे रोज़ रोज़ नहीं सुनने को मिलते !!!
    आग पानी की नहीं है तफ़रीक़
    हर चढ़ा दरिया उत्तर जाना है
    दरिया दिल से उपजा हो कि आँखों से !! उतर जाता है !!!
    सोच लो खूब समझ लो ‘असरार’
    सर उठाओगे तो सर जाना है
    खुदा की बात दीगर है लेकिन और कहीं जो सर उठने से डरे वो सर नहीं होता !!! असरार साहब !! बेहतरीन शेर पढने को मिले –मुबारकबाद कुबूल कीजिये –मयंक

  5. दाग़ रह जायेगा आईने सा
    ज़ख़्म तो ज़ख़्म है भर जाना है..waahhh

    puri ki puri ki gazal hi umda hai Sir

    waahh waahh

    dili daad qubul keejiye

    regards

  6. दाग़ रह जायेगा आईने सा
    ज़ख़्म तो ज़ख़्म है भर जाना है.

    उसके वादे पे यक़ीं है हमको
    जिसकी आदत ही मुकर जाना है

    आग पानी की नहीं है तफ़रीक़
    हर चढ़ा दरिया उत्तर जाना है

    हमने हर हुस्न सही हो कि ग़लत
    अपना ही हुस्ने-नज़र जाना है

    Asraar Sahab… Kaise achhe achhe sher kahe hain… Waah Waah Waah

    Maza aa gaya… Maza aa gaya…

  7. Daagh rah jaayega aaine sa…
    Waah !!!!
    Kya hi achchi ghazal hai asrar bhai.
    Behad khoobsoorat ashaar.

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