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T-22/9 वहम हर सर से उतर जाना है-पूजा भाटिया

वहम हर सर से उतर जाना है
मर के ही मौत का डर जाना है

अपने वादों से मुकर कर मुझको
“आज हर हद से गुज़र जाना है”

लो सुनो! कहता है क्या आइना
वो जो छू ले तो संवर जाना है

बेख़याली में उठे हैं ये क़दम
कुछ नहीं जानते, पर जाना है

वो नज़र भर के अगर देखेगा
जानते हैं कि बिखर जाना है

नींव में कोई हवा है शायद
घर ये तिनकों सा बिखर जाना है

देख कर भी वो नहीं देखेगा
सोच ले तुझको अगर जाना है

याद भी अब नहीं आती उनकी
क़ायदे से हमें मर जाना है

कश्तियाँ डूब गयी लो सारी
अब तो लहरों को उतर जाना है

आख़िर आख़िर ही चुकाऊंगी मैं
ज़िन्दगी ! तेरा जो हरजाना है

ख़ुद से ख़ुद तक का सफ़र है तन्हा
रास्ता ये भी गुज़र जाना है

पूजा भाटिया 08425848550

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36 comments on “T-22/9 वहम हर सर से उतर जाना है-पूजा भाटिया

  1. कश्तियाँ डूब गयी लो सारी
    अब तो लहरों को उतर जाना है……वाह पूजा जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल कही है दाद ही दाद

  2. bahut umda gazal hai pooja ji,daad qubool karen

  3. आख़िर आख़िर ही चुकाऊंगी मैं
    ज़िन्दगी ! तेरा जो हरजाना है… हरजाना बड़ी ख़ूबसूरती से बांधा है… वाह…

  4. वहम हर सर से उतर जाना है
    मर के ही मौत का डर जाना है । अच्‍छी गज़ल ।

  5. पूजा जी,
    बहुत उम्‍दा ग़ज़ल।
    वाह..वाह..वाह।
    सादर
    नवनीत

  6. नींव में कोई हवा है शायद
    घर ये तिनकों सा बिखर जाना है kya baat kya baat

    puri gazal badhiya huii hai waahh waahh

    dili daad qubul keejiye

  7. umda ghazal…wahhh…kya kya sher nikale haiN

  8. वहम हर सर से उतर जाना है
    मर के ही मौत का डर जाना है
    बडी बात है !! जब कोई स्वप्न खंडित होता है तो स्वप्न और उस स्वप्न मे एक पात्र के रूप मे हम फना हो जाते हैं –लेकिन हम मरते नहीं वस्तुत: जाग जाते हैं !! मृत्यु को एक दर्शन के रूप मे ऐसे ही शास्त्रों मे परिभाषित किया गया है !!!
    कब तक रहेगा रूह पे पैराहने बदन
    कब तक हवा असीर रहेगी हुबाब में –शिकेब
    लिहाजा मरने के बाद ही मरने का डर जायेगा !! मतले पर दाद !!!
    अपने वादों से मुकर कर मुझको
    “आज हर हद से गुज़र जाना है”
    बहुत अच्छी गिरह लगाई है !! सेल्फ इलस्ट्रेशन पसमंज़र मे है !!
    लो सुनो! कहता है क्या आइना
    वो जो छू ले तो संवर जाना है
    आइना लफ़्ज़ का बेहतरीन इस्तेमाल किया है अच्छे शेर वही होते हैं जो पढने /सुनने के बाद सोचने के लिये रोक सकें !!!
    बेख़याली में उठे हैं ये क़दम
    कुछ नहीं जानते, पर जाना है
    इश्क़ ,जुनून, दीवानगी और भावातिरेक की भावदशा है !!!
    वो नज़र भर के अगर देखेगा
    जानते हैं कि बिखर जाना है
    परतबे ख़ुर से है शबनम को फना की तालीम
    मैं भी हूँ एक इनायत की नज़र होने तक !!! –ग़ालिब
    नींव में कोई हवा है शायद
    घर ये तिनकों सा बिखर जाना है
    हवा यहाँ माहौल के दवाब के सन्दर्भ मे है !!!
    कश्तियाँ डूब गयी लो सारी
    अब तो लहरों को उतर जाना है
    वक्त के सारे उतार चढाव और भंवर हमारी पस्तगी के ही बाइस थे !!
    आख़िर आख़िर ही चुकाऊंगी मैं
    ज़िन्दगी ! तेरा जो हरजाना है
    वसूलेगी हफ्ता अभी ज़िन्दगी
    अभी वक़्त बाकी है इतवार मे !!
    ख़ुद से ख़ुद तक का सफ़र है तन्हा
    रास्ता ये भी गुज़र जाना है
    हमने तमाम उम्र अकेले सफर किया
    हम पर किसी खुदा की इनायत नहीं रही –दुष्यंत कुमार
    पूजा बेटी !!! बहुत अच्छे शेर कहे हैं आपने – ये कलम ऐसे ही चलता रहे –मयंक

    • आपकी हौसला अफ़ज़ाई का दिली शुक्रिया मयंक जी। स्नेह बनाये रखियेगा।
      सादर
      पूजा

  9. लो सुनो! कहता है क्या आइना
    वो जो छू ले तो संवर जाना है

    बेख़याली में उठे हैं ये क़दम
    कुछ नहीं जानते, पर जाना है

    वो नज़र भर के अगर देखेगा
    जानते हैं कि बिखर जाना है

    नींव में कोई हवा है शायद
    घर ये तिनकों सा बिखर जाना है
    आदरणीया पूजा जी ,सुन्दर ग़ज़ल हुई है ,सभी अशआर दिल को छू गये हैं |सादर अभिनन्दन

  10. ख़ुद से ख़ुद तक का सफ़र है तन्हा
    रास्ता ये भी गुज़र जाना है

    काश ये शेर मैने कहा होता, क्या अच्छा शेर है वाह्ह्ह,कई . दिन तक ज़ह्न में रहेगा ,

  11. याद भी अब नहीं आती उनकी
    क़ायदे से हमें मर जाना है… badhiya sher..

    achchi ghazal waaaah

  12. Bahut acchi ghazal hui hai pooja ji… 
    कश्तियाँ डूब गयी लो सारी
    अब तो लहरों को उतर जाना है
    वाह वाह क्या कहने….

  13. नींव में कोई हवा है शायद
    घर ये तिनकों सा बिखर जाना है….wahhh..kya kehne

  14. acchi ghazal hui hai pooja ji… 🙂
    कश्तियाँ डूब गयी लो सारी
    अब तो लहरों को उतर जाना है
    ye sher to bahut hi accha hai daad qubulen

  15. Bahut achi gazal hui pooja ji
    DIli daad kubul kijiye

  16. वो नज़र भर के अगर देखेगा
    जानते हैं कि बिखर जाना है

    नींव में कोई हवा है शायद
    घर ये तिनकों सा बिखर जाना है

    Aha ha…Pooja Ji waah…Jiyo

    • आपका बहुत शुक्रिया नीरज जी।
      सादर
      पूजा

    • बहुत बहुत शुक्रिया नीरज जी।
      सादर
      पूजा

    • बहुत शुक्रिया नीरज जी
      सादर
      पूजा

    • शुक्रिया नीरज जी।
      सादर
      पूजा

    • मुआफ़ी चाहती हूँ एक बार में टिप्पणी post नहीं हो रही थी सो 2-3प्रयास किये। और देखिये 2-3 प्रयास मिल कर पहले प्रयास को तो ले ही आये खुद भी संग हो लिए।
      🙂
      पूजा

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