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T-22/7 छोड़कर तुझको किधर जाना है-खुरशीद खैराड़ी जोधपुर

छोड़कर तुझको किधर जाना है
तेरे पहलू में पसर जाना है

दाग़ ताउम्र दुखायेगा दिल
एक दिन ज़ख़्म तो भर जाना है

शीशियाँ बंद रखोगे कब तक
ख़ुशबुओं को तो बिखर जाना है

अपना फुटपाथ ठिकाना ही है
जाइये आपको घर जाना है

सारी तरतीब मिरी हैं बरहम
तेरी जुल्फों को सँवर जाना है

दर्द को ढाल ग़ज़ल में लेना
हमने जीने का हुनर जाना है

रंग ‘खुरशीद’ जी का है फ़ानी
शाम होते ही उतर जाना है

खुरशीद खैराड़ी जोधपुर 09413408422

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20 comments on “T-22/7 छोड़कर तुझको किधर जाना है-खुरशीद खैराड़ी जोधपुर

  1. Umda ghazal Khursheet bhai hamesha ki tarah.. is sher par alag se daad..

    शीशियाँ बंद रखोगे कब तक
    ख़ुशबुओं को तो बिखर जाना है

    waaah!!

  2. खुर्शीद भाई।
    हमेशा की तरह आपकी महक देती हुई ग़ज़ल।
    दिल से दाद स्‍वीकार करें।
    सादर
    नवनीत

  3. bahut khoob ghazal huyi hai jnb…wahhh wahhh

  4. शीशियाँ बंद रखोगे कब तक
    ख़ुशबुओं को तो बिखर जाना है

    वाह वाह, क्या अच्छा शेर कहा है साहब, तमाम ग़ज़ल बेहद पसं. आई

  5. छोड़कर तुझको किधर जाना है
    तेरे पहलू में पसर जाना है
    सुन्दर मतला खुर्शीद भाई !!!
    आखिरी हिचकी तेरे जानूँ पे आये
    मौत भी मैं शायराना चाहता हूँ
    दाग़ ताउम्र दुखायेगा दिल
    एक दिन ज़ख़्म तो भर जाना है
    ज़ख़्मों की तादाद न पूछो
    छोटा घर मेहमान बहुत हैं
    दाग़ जो है वो सरमाया भी है खुर्शीद भाई !!!
    शीशियाँ बंद रखोगे कब तक
    ख़ुशबुओं को तो बिखर जाना है
    बिल्कुल बिल्कुल — जो अपने इल्म का फैजान आम कर न सके
    वो कुछ नहीं है फकत नाग है दफीने का
    इस्लिये गर आपके पास खुश्बू है तो उसे बिखरने दीजिये …..
    अपना फुटपाथ ठिकाना ही है
    जाइये आपको घर जाना है
    वैसे जिनका घर भी है अगर फितरतन आवरा हैं तो एक दिन फुटपाथ ही उनकी नियति होगी !!
    सारी तरतीब मिरी हैं बरहम
    तेरी जुल्फों को सँवर जाना है
    अच्छा शेर कहा है !!!
    रंग ‘खुरशीद’ जी का है फ़ानी
    शाम होते ही उतर जाना है
    तख़्ल्लुस का सुन्दर इस्तेमाल किया है !!
    खुरशीद भाई !! आप हमेशा अच्छा कहते हैं और ये ग़ज़ल भी इस बात की तस्दीक़ करती है !!! अच्छे और सारगर्भित कमेण्ट्स और अच्छी गज़लें !! आप इस पोर्टल पर जो योगदान देते हैं उसके लिये मेरे पास शब्द नहीं है !! –मयंक

  6. दाग ताउम्र दुखायेगा दिल
    एक दिन ज़ख़्म तो भर जाना है
    वाह साहब… क्या बात है…. बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है….साधु….

  7. badhiya ghazal hui hai khursheed sahab

  8. अपना फुटपाथ ठिकाना ही है
    जाइये आपको घर जाना है |

    वाह बढ़िया ग़ज़ल पर दाद क़ुबूल कीजिये खुर्शीद जी !!

  9. बहुत उम्दा गज़ल
    ये शे’र
    अपना फुटपाथ ठिकाना ही है
    जाइये आपको घर जाना है- कमाल का लगा

  10. अपना फुुटपाथ ठिकाना ठहरा
    जायें ग़र आप को घर जाना है

    अगर ये शे’र ऐसे लिखें तो!

  11. अपना फुुटपाथ ठिकाना ठहरा
    जायेम ग़र आप को घर जाना है

    अगर ये शे’र ऐसे लिखें तो!

  12. अच्छी ग़ज़ल हुई है खुर्शीद साहब
    दाद क़ुबूल करें।
    सादर
    पूजा

  13. दाग़ ताउम्र दुखायेगा दिल
    एक दिन ज़ख़्म तो भर जाना है

    waahh..umdaa ghazal hui hai khursheed sahab..badhai

  14. बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई खुर्शीद साहब
    दिली दाद कुबूल कीजिये

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