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T-22/3 राह मुश्किल है मगर जाना है –“शरीफ़” अंसारी

राह मुश्किल है मगर जाना है
आज हर हद से गुज़र जाना है

अब के दरिया जो उतर जायेगा
तुम चले जाना जिधर जाना है

ज़िन्दगी क्या है बक़ौले नातिक
चन्द साँसों का सफर जाना है

इश्क की आग मे जलना कैसा
ये तो हस्ती का संवर जाना है

दिल मे कुछ उसकी निशानी ले कर
उसके कूचे से गुज़र जाना है

मौत को जिसने मसीहा जाना
उसने जीने का हुनर जाना है

सबको मंज़िल की तलब है लेकिन
कौन बतलाये किधर जाना है

अपने महौल की कब्रों मे हमें
शाम होते ही उतर जाना है

मर न आऊँगा मै तनहाई मे
सोच लो तुमको अगर जाना है

रात गहरी हुई जाते है शरीफ़
आओ अब लौट के घर जाना है

“शरीफ़” अंसारी ( 9827965460)

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15 comments on “T-22/3 राह मुश्किल है मगर जाना है –“शरीफ़” अंसारी

  1. बहुत ख़ूब शरीफ़ अंसारी साहब उम्दा ग़ज़ल कही है आपने

  2. Shareef bhai, behtreen ghazal k liye mubarakbaad.

  3. इश्क की आग मे जलना कैसा
    ये तो हस्ती का संवर जाना है……वाह…..

  4. अपने महौल की कब्रों में हमें
    शाम होते ही उतर जाना है।

    वाह..वाह..वाह। क्‍या कहूं। बहुत खूब।

  5. इश्क की आग मे जलना कैसा
    ये तो हस्ती का संवर जाना है

    दिल मे कुछ उसकी निशानी ले कर
    उसके कूचे से गुज़र जाना है

    अपने महौल की कब्रों मे हमें
    शाम होते ही उतर जाना है

    Bahut khub ….. kya kahane …waahh

  6. bahut achchhi ghazal ke liye mubarakbaad…

  7. Shareef Ansari sb, Badhiya Ghazal ke liye mubarkbaad!!

    इश्क की आग मे जलना कैसा
    ये तो हस्ती का संवर जाना है is par alag se daad.. waaaaah!!

  8. Able darya Jo utar jaayega..
    Kya kahne Sharif ansaari saahab.
    Dad kubool Karen.

  9. अब के दरिया जो उतर जायेगा
    तुम चले जाना जिधर जाना है

    ज़िन्दगी क्या है बक़ौले नातिक
    चन्द साँसों का सफर जाना है

    सबको मंज़िल की तलब है लेकिन
    कौन बतलाये किधर जाना है
    आदरणीय शरीफ़ साहब , बेहद उम्दा ग़ज़ल हुई है |ढेरों दाद कबूल फरमावें|सादर

  10. bahut acchi ghazal hui hai shareef ansari sahab…
    अपने महौल की कब्रों मे हमें
    शाम होते ही उतर जाना है
    aur is she’r ke to kahne hi kya… apne mahaul ke qbaren…. zindabaad…. kya she’r kah diya aapne… bahut bahut mubarak….

  11. राह मुश्किल है मगर जाना है
    आज हर हद से गुज़र जाना है
    फसीले जिसमे पे ताज़ा लहू के छींटे हैं
    हुदूदे वक़्त से आगे गुज़र गया है कोई !!! शिकेब
    अपनी खुदकुशी का शिकेब जलाली ने अदबी इज़हार इस शेर मे किया था !!
    तोड दे शायद अनासिर का क़फस
    रूह मे अब कुव्वते परवाज़ है
    लिहजा तस्लीम –कि राह मुश्किल है मगर जाना है –हर हद से गुज़र कर ….

    अब के दरिया जो उतर जायेगा
    तुम चले जाना जिधर जाना है
    ये दरिया आँखों मे फिलहाल पनाह लिये हुये है !! अभी तो आग का है जब पानी हो जाये तब चले जाना जिधर जाना है !! वाह वाह !!

    ज़िन्दगी क्या है बक़ौले नातिक
    चन्द साँसों का सफर जाना है
    मैं नातिक़ शाइर की बात करूं तो नागपुर के शाइर नातिक़ के शहर मे जाने वाले हर शायर को ये मश्वरा दिया जाता है – “”शहर नातिक का है इसमे जहानत कम ही रखियेगा !!!!”” और इसके शब्दार्थ पर जाऊँ तो निर्णयवान तो निर्ण्य ले ही चुका है इसलिये हर्फे आख़ीर यही है इस सफर को चन्द साँसो का का सफर कहना नितांत उचित है !!!

    इश्क की आग मे जलना कैसा
    ये तो हस्ती का संवर जाना है
    इक आग का दरिया है और डूब के जाना है !!! इसके बाद कुन्दन बन जायेंगे आप !! बहुत खूब !! !! बहुत खूब !!

    दिल मे कुछ उसकी निशानी ले कर
    उसके कूचे से गुज़र जाना है
    ये निशानी “दाग़” के सिवा और कुछ नहीं होगी!!
    कोई नामो निशाँ पूछे तो ऐ क़ासिद बता देना
    तख़ल्लुस दाग़ है और आशिकों के दिल मे रहते हैं –मिर्ज़ा दाग़ देहलवी !!!

    मौत को जिसने मसीहा जाना
    उसने जीने का हुनर जाना है
    ज़िन्दगी तेरी क़त्लगाहों मे
    मौत अब लोरियाँ सुनाती है
    रिहाई तो मौत ही देती है
    गमे-हस्ती का असद किससे है जुज़ मर्ग़ इलाज ???!!!!

    सबको मंज़िल की तलब है लेकिन
    कौन बतलाये किधर जाना है
    मदिरालय जाने को घर से चलता है पीने वाला
    किस पथ पर जाऊँ असमंजस मे है वो भोला भाला
    अलग अलग पथ बतलाते सब लेकिन मैं बतलाता हूँ
    राह पकड तू एक चला चल पा जायेगा मधुशाला –बच्चन !!

    अपने महौल की कब्रों मे हमें
    शाम होते ही उतर जाना है
    रिवायत हो या दौरे तरक़्की –जहाँ पानी ठहरा –वहीं दलदल बना !! इसलिये “माहौल की कब्रों “” इस जुमले ने बहुत प्रभावित किया !!

    मर न आऊँगा मै तनहाई मे
    सोच लो तुमको अगर जाना है
    बडे खूबसूरत लहजे का शेर है –” मर न जाऊँगा” मे बात है !!

    रात गहरी हुई जाती है शरीफ़
    आओ अब लौट के घर जाना है
    सरायफानी से वापस जाने का समय है !!!

    “शरीफ़” अंसारी साहब !! मुबारकबाद कुबूल कीजिये !!—मयंक

  12. सबको मंज़िल की तलब है लेकिन
    कौन बतलाये किधर जाना है

    अपने माहौल की कब्रों मे हमें
    शाम होते ही उतर जाना है

    wahhhhh
    -Kanha

  13. शरीफ जी, इस शे’र के साथ
    इश्क की आग मे जलना कैसा
    ये तो हस्ती का संवर जाना है सभी अश आर लाजवाब -बधाई कबूल करें

  14. साहब क्या अच्छी ग़ज़ल हुई है ,

    और ये शेर

    अपने माहौल की कब्रों मे हमें
    शाम होते ही उतर जाना है

    क्या कहने , वा.. वा.. वाह

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