13 Comments

T-22/4 एक बंधन से उबर जाना है-चन्द्रभान भरद्वाज

एक बंधन से उबर जाना है
द्वार दीवार में कर जाना है

फूल से निकली हुई ख़ुश्बू सा
अब हवाओं में बिखर जाना है

नाम को याद रखेंगी सदियाँ
आज हर दिल में उतर जाना है

राह ख़ुद बनती चली जायेगी
बढ़ते क़दमों को जिधर जाना है

जान अब अपनी हथेली पे रखी
‘आज हर हद से गुजर जाना है’

मृत्यु पर गर्व करेगा जीवन
प्यार में डूब के तर जाना है

डाल के सूखे हुए पत्ते को
क्या पता गिर के किधर जाना है

बाद में ताजमहल बनते हैं
पहले मिट्टी में उतर जाना है

आँसुओं को भी बनाता मोती
जिसने ग़ज़लों का हुनर जाना है

रैलियाँ उनकी निकल जाने पर
सिर्फ सन्नाटा पसर जाना है

चढ़ गया गहरा नशा नज़रों का
धीरे धीरे ही असर जाना है

साज सामान सँभालो अपना
अब ‘भरद्वाज’ को घर जाना है

चन्द्रभान भरद्वाज               09826025016

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

13 comments on “T-22/4 एक बंधन से उबर जाना है-चन्द्रभान भरद्वाज

  1. डाल के सूखे हुए पत्ते को
    क्या पता गिर के किधर जाना है… बहोत ख़ूब जनाब

  2. achhi gazal !!!! Badhai !

  3. वाह…वाह..।
    दाद स्‍वीकार कीजिए आदरणीय चंद्रभान भारद्वाज जी।
    सादर
    नवनीत

  4. achchhi ghazal huyi hai…hindi urdu ka imtezaaj…lutf de raha hai

  5. Achchi ghazal chandrabhaan ji.
    Mubaarak.

  6. डाल के सूखे हुए पत्ते को
    क्या पता गिर के किधर जाना है

    बाद में ताजमहल बनते हैं
    पहले मिट्टी में उतर जाना है

    आदरणीय चन्द्रभान भरद्वाज” साहब, सभी अशआर लाज़वाब हुये हैं |ढेरों दाद कबूल फरमावें |सादर

  7. बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है चंद्रभान साहब….. क्या पता गिर के किधर जाना है…..वाह वाह…. ढेरों दाद

  8. डाल के सूखे हुए पत्ते को
    क्या पता गिर के किधर जाना है badhiya ghazal hui hai chandrabhan sahab… is she’r par bataure khaas daad qubulen

  9. डाल के सूखे हुए पत्ते को
    क्या पता गिर के किधर जाना है

    bahut achhi ghazal hai janab..wahhh
    -Kanha

  10. बहुत ही उम्दा ग़ज़ल कही , ये शे’र मुझे बहुत ही अच्छा लगा,
    डाल के सूखे हुए पत्ते को
    क्या पता गिर के किधर जाना है -बधाई हो

  11. डाल के सूखे हुए पत्ते को
    क्या पता गिर के किधर जाना है

    साज सामान सँभालो अपना
    अब ‘भरद्वाज’ को घर जाना है

    बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है साहब,

    शुभकामनायें

    दिनेश

  12. Waahhh wahhh
    BAhut achi gazal hui
    DIli daad qubul kijiye

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: