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ख़ुदा के बाद तुम ही आसरा हो–“समर कबीर”

है किसमें ये सलीक़ा कौन होगा
यहाँ इतना अकेला कौन होगा !

ख़ुदा के बाद तुम ही आसरा हो
तुम्हारे बाद अपना कौन होगा !

जवानी बे सरोसामाँ है इतनी
बुढापे का सहारा कौन होगा !

यहाँ इन्सान ही कितने बचे हैं
भला इनमें फ़रिश्ता कौन होगा !

हमें तस्लीम हम एसे नहीं हैं
तुम्हारे ख़्वाब जैसा कौन होगा !

“समर” उम्मीद रोशन हो रही है
किया किसने इशारा कौन होगा !!

“समर कबीर”09753845522

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3 comments on “ख़ुदा के बाद तुम ही आसरा हो–“समर कबीर”

  1. वाआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह वाह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह
    बहुत खूब गजल

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