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ये जो मुझमें अज़ाब है प्यारे-नवनीत शर्मा

ये जो मुझमें अज़ाब है प्यारे
उसकी चुप का जवाब है प्यारे

आस अब आसमां से रक्खी है
छत का मौसम ख़राब है प्यारे

अश्क, आहें, ख़ुशी, ठहाके साथ
ज़िंदगी वो किताब है प्यारे

रोक लेते हैं याद के हिमनद
दिल हमारा चिनाब है प्यारे

प्यार अगर है तो उसकी हद पाना
सबसे मुश्किल हिसाब है प्यारे

कट चुकी हैं तमाम ज़ंजीरें
फिर भी ख़ाना-ख़राब है प्यारे

कौन तेरा है किसका है तू भी
ऐसा कोई हिसाब है प्यारे

दिल में चुप कर भी खुशबुएँ देगी
हर तमन्ना गुलाब है प्यारे

नवनीत शर्मा 09418040160

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3 comments on “ये जो मुझमें अज़ाब है प्यारे-नवनीत शर्मा

  1. आस अब आसमां से रक्खी है
    छत का मौसम ख़राब है प्यारे…ahhaa..kya kehne bhaiya..waahh

  2. शुक्रिया आलाेक भाई।

  3. kya kahne Navneet bhaiya..puri gazal hi umda hai ..waahh waahhh

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