4 Comments

अब पसर आये हैं रिश्तों पे कुहासे कितने-नवनीत शर्मा

अब पसर आये हैं रिश्तों पे कुहासे कितने
अब जो ग़ुर्बत में है नानी तो नवासे कितने

चोट खाये हुए लम्हों का सितम है कि उसे
रूह के चेहरे पे दिखते हैं मुहाँसे कितने

सच के क़स्बे पे मियाँ झूठ की सरदारी है
अब अटकते हैं लबों पर ही ख़ुलासे कितने

थे बहुत ख़ास जो सर तान के चलते थे यहाँ
अब इसी शहर में वाक़िफ़ हैं अना से कितने

अब भी अंदर मिरे दिल है जो धड़कता है मियाँ
वरना बाज़ार में बिकते हैं दिलासे कितने

मूसलाधार बरसती मिरी आँखें, सब चुप
उसकी आँखों में नमी है तो हैं प्यासे कितने

नवनीत शर्मा 09418040160

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

4 comments on “अब पसर आये हैं रिश्तों पे कुहासे कितने-नवनीत शर्मा

  1. आदरणीय दादा का हार्दिक आभार कि इन ग़ज़लों को आशीर्वाद दिया। श्रीवास्‍तव जी, पूजा जी और आलोक भाई… आपका सबका भी मशकूर हूं।
    करम बना रहे।

  2. ak sath teen teen gazlen aur wo bhi bharpoor…ahaa…
    dili daad bhaiya

  3. रूह के चेहरे पे मुँहासे…..
    वाह खूब उम्दा उकेरा है आपने
    दिली दाद क़ुबूल करें
    सादर

  4. kya baat hain,,,RadheRadhe,,

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: