6 Comments

बहुत दिन टिक नहीं पायेंगी ये बुनियादें नफ़रत की-इमरान हुसैन ‘आज़ाद’

बहुत दिन टिक नहीं पायेंगी ये बुनियादें नफ़रत की
ज़रूरत पेश आयेगी तुम्हें मेरी मुहब्बत की

मिरी आँखों के सहरा में दिखे बारिश के कुछ आसार
ग़मों अब बांध लो चीजें सभी अपनी ज़रुरत की

सुकूँ जो ढूँढता हूँ इश्क में शायद मैं पागल हूँ
समझ आती नहीं मुझको अभी रस्में मुहब्बत की

बडी सोसायटी में रहते हो  दारू नहीं पीते
मियां ये क्या ? लगा ली वाट ख़ुद ही अपनी इज्ज़त की

मिरे चेहरे प आख़िर बुज़दिली का लग गया ठप्पा
सज़ा मिलनी ही थी इक दिन मुझे मेरी शराफ़त की

इमरान हुसैन ‘आज़ाद’ 09536816624

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

6 comments on “बहुत दिन टिक नहीं पायेंगी ये बुनियादें नफ़रत की-इमरान हुसैन ‘आज़ाद’

  1. kya baat hai Imraan bhaaii…gazal to achhii hai hi aur doosre sher ka jawaab nahin,,waahh.
    dher saari daad..

  2. मिरी आँखों के सहरा में दिखे बारिश के कुछ
    आसार
    ग़मों अब बांध लो चीजें सभी अपनी ज़रुरत की

    waahh .kya kehne .
    -Kanha

    • बहुत बहुत शुक्रिया कान्हा साहब
      हौसला आफजाई के लिए

  3. Doosra sher bahut hi umda hai… daad qubuliye….

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s

%d bloggers like this: