11 Comments

T-21/44 ख़याल ही में हों लेकिन हों रास्ते रौशन-तुफ़ैल चतुर्वेदी

दोस्तो ! ढाई शेर जब ये मिसरा सूझा था तो इस ज़मीन को चैक करते वक़्त कह लिये थे. बाक़ी अभी हाथो-हाथ का काम है. जैसा बन पड़ा हाज़िर है.

ख़याल ही में हों लेकिन हों रास्ते रौशन
‘क़लम संभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन’

यही जगह है जहाँ यार आ के बैठते थे
इसी दरख़्त के नीचे थे क़हक़हे रौशन

क़तार जैसे दियों की रखी हो दिल के क़रीब
किसी भी ज़ख़्म पर उसकी नज़र पड़े ….. रौशन

तड़प के आया जो ख़ंजर वो सुर्ख़रू निकला
हमारे सीने ने सबके छुरे किये रौशन

बस एक चेहरा सियाही का रूप धरता हुआ
वरक़-वरक़ पे उजालों के सिलसिले रौशन

नमक लपेटे हुए सांवला-सलोना शख़्स
हर इक निगाह में कर डाले क़ुमक़ुमे रौशन

इलाज इनका……..? कोई भी इलाज होता नहीं
ये दिल हैं साहिबो ! होंगे कटे-फटे रौशन

चमक बला की थी सूरज भी बुझ गये कल रात
किसी के गालों पे अश्कों के दीप थे रौशन

तमाम लोगों को करता है मरतबा उजला
कुछ एक लोगों से होते हैं मरतबे रौशन

मिरे अज़ीज़ो ! अदब अब तुम्हें उजालना है
सियाह शब में तुम हैं से गिने-चुने रौशन

तुफ़ैल चतुर्वेदी 09810387857

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

11 comments on “T-21/44 ख़याल ही में हों लेकिन हों रास्ते रौशन-तुफ़ैल चतुर्वेदी

  1. क्या कहूं और क्या न कहूं ? ख़ाकसार की मामूली काविश को आप सबने हद से ज़ियादा नवाज़ा। शुक्रिया इस करम के लिए बहुत छोटा लफ्ज़ है। हदिया-ए-ख़ुलूस क़ुबूल फ़रमाइये

  2. आदरणीय तुफ़ैल दा , आपकी ग़ज़ल पर टीप करने लायक अभी मेरा कद नहीं है ,बस वा…ह वाह… वाह…
    हर शेर पर वाह–वाह कह सकता हूं |
    सादर
    नववर्ष मंगलमय हो |आपका आशीर्वाद हम पर बना रहें |

  3. TUFAIL SAHEB. , BE PANAAH KHOOBSOORAT GHAZAL K LIYE MUBARAKBAD QUBOOL FARMAAYEN .EK EK SHEIR QAABIL E TAAREEF HAI. KYA KHOOBSOORAT SHEIR HAI

    TAMAAM LOGO’N KO KARTA HAI MARTABA UNCHAA
    KUCHCH EIK LOGO’N K HOTE HAIN MARTABE UNCHE.

    SHAHID HASAN ‘SHAHID’

  4. दादा,
    सादर प्रणाम
    बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल !!!

    तड़प के आया जो ख़ंजर वो सुर्ख़रू निकला
    हमारे सीने ने सबके छुरे किये रौशन
    हासिले ग़ज़ल शेर है !!

    इस तरही को रौशन करने के लिए दिली आभार !

  5. Dada sadar pranam..apki ghazal ne tarah roushan kar di dada..apki ghazal ka muntzir tha ..bahut umdaa ghazal hai dada…din ban gaya .. waahh
    -Kanha

  6. इस गज़ल का सभी को इंतज़ार था –दोस्त मुंतज़िर थे और दुश्मन मुश्ताक!!! क्योंकि दोनो ही पर्याप्त मात्रा मे तुफ़ैल साहब जैसे क़द आवर शख़्स को ही नसीब होते हैं –तो गज़ल दोस्तो के रुख़ पर तबस्सुम और रक़ीबों के लिये मायूसी का सबब बनेगी क्योंकि इसमे बयान और लहजे के लिहाज से कुछ ख़ास है !!!
    ख़याल ही में हों लेकिन हों रास्ते रौशन
    ‘क़लम संभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन’
    सानी के मर्कज़ का निर्वाह इसी ख्याल से सबसे अधिक सटीक तरीके से होता है!!
    यही जगह है जहाँ यार आ के बैठते थे
    इसी दरख़्त के नीचे थे क़हक़हे रौशन
    नास्तेल्जिया है अतीतजीविता है ये और बडी मोहक है –लेकिन एक अद्भुत बात ये है कि यही अतीत जब कभी हमारा वर्तमान था तब हम उस भविष्य के तस्व्वुर मे थे जो आज हमारा वर्तमान है ! क्या नियति का मज़ाक है कि हम अपने इमरोज़ से ही कट कर जीने के आदी हैं !!
    क़तार जैसे दियों की रखी हो दिल के क़रीब
    किसी भी ज़ख़्म पर उसकी नज़र पड़े ….. रौशन
    शेर कई कहना मे लहजा ख़ास है (नज़र पड़े ….. रौशन) लिहाजा ग़ज़ल कैसे कही जाती है और कैसे पढे जाती है और कैसे लिखी जाती है सब महत्वपूर्ण है !! एक बार शर्द जोशी साहब के एक व्यंग्य मे मैने पढा था “साजन सीढी उतर गये” –इस वाक्य को एडिट किया गया और फिर सही योँ लिखा गया —
    साजन
    सीढी
    उतर
    गये
    तड़प के आया जो ख़ंजर वो सुर्ख़रू निकला
    हमारे सीने ने सबके छुरे किये रौशन
    हासिले ग़ज़ल शेर यहीं है !! इसी सीने पर हर खंजर चला और इसी सीने ने हर खंजर का स्वागत भे किया –दोनो अर्थ सन्निहित हैं शेर की प्रतिध्वनि मे !!
    बस एक चेहरा सियाही का रूप धरता हुआ
    वरक़-वरक़ पे उजालों के सिलसिले रौशन
    कब से हैं एक गर्फ़ पे नज़रें टिकी हुई
    वो पढ रहा हूँ जो नहें लिख्खा किताब में –शिकेब
    इस शेर से इस शेर को समझने मे मदद मिलेगी !!!
    नमक लपेटे हुए सांवला-सलोना शख़्स
    हर इक निगाह में कर डाले क़ुमक़ुमे रौशन
    अह्ह्ह्ह !!1 कोई नहाया होगा जभी समन्दर नमकीन हो गया !!!और ये सांवला सलोना शख़्स इसी घराने के विकास राज़ की गज़लो मे भी खूब मिलता है !!!
    इलाज इनका……..? कोई भी इलाज होता नहीं
    ये दिल हैं साहिबो ! होंगे कटे-फटे रौशन
    शेर से अधिक लहजा काबिले दीद है !!! अब आप उइसे नस्र कीजिये तो बात नही बनेगी –लेकिन यही कमाल है कहन के लहजे का !1 और नासिर काज़मी की ग़ज़लों मे ये शक्ति बहुत अधिक थी। वाह !!! वाह !!!
    चमक बला की थी सूरज भी बुझ गये कल रात
    किसी के गलों पे अश्कों के दीप थे रौशन
    गलों गलत टाइप हुआ है सही लफ़्ज़ “गालों” है !!
    एक शेर सपोर्ट के लिये
    शिकेब दीप से लहरा हैं पलकों पे
    दयारे चश्म मे क्या रात रतजगा है कोई !! –शिकेब
    तमाम लोगों को करता है मरतबा उजला
    कुछ एक लोगों से होते हैं मरतबे रौशन
    क्या कमाल की बात है !! अगर आइंस्ताइन को नोबल पुरस्कार मिले तो नोबल पुरस्कार ही सम्मानित होगा !!!
    दादा इस गज़ल पर मुबारकबाद और एक और कामयाब तरही के लिये बधाई !! –मयंक

  7. तमाम लोगों को करता है मरतबा उजला
    कुछ एक लोगों से होते हैं मरतबे रौशन….क्या ख़ूब दादा! ये शेर तो आप पर ही फिट हो गया! आपकी ग़ज़ल इस कामयाब तरही के लिए आइसिंग ऑन द केक जैसी है! दाद और आभार!

  8. आदरणीय दादा,
    बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल के लिए धन्‍यवाद। ज़बान…लहजा…सब कुछ दादा। आप उस्‍ताज़ मुहतरिम हैं…….. ज्‍़यादा क्‍या कहूं।

    सादर प्रणाम।
    नवनीत

  9. Bhai Chaturvedi ji Bahut umda gazal kahi hai Akhiri ball par chhakka laga kar jaise poora match jeet liya ho bahut bahut badhai nav varsh ke liye hardik shubh kamanayen

  10. अरे क्या बात है, बहुत ख़ूब। कुछ एक शेर तो आप से सुनने को मिले थे और अब पूरी की पूरी ग़ज़ल हाज़िर है। अपने फैले हुये कारोबार और परिवार की ज़िम्मेदारियों को सम्हालने के साथ ही साथ ऐसी तवील और उम्दाह तरही को मैनेज करने के बाद अपना आला बयान पेश करना – वाह वाह वाह। वही दुनिया है वही हम हैं मगर तरही दर तरही हम सभी के बयान में जो निखार आता जा रहा है, वह आप ही के तुफ़ैल से है।

    बहुत बढ़िया ग़ज़ल है दादा। मज़ा आया पढ़ कर। इसी दरख़्त के नीचे – सच नोस्टाल्जिया को गरियाने वालों को एक बार इस शेर की गहराई में उतर कर देखना चाहिये। सूरज भी बुझ गए कल रात – क्या तसव्वुर है इस शेर का। कमाल कमाल कमाल। आप के बयान की तारीफ़ करना, सूरज को दिया दिखलाने जैसा है। बहुत ख़ूब, बहुत ख़ूब।

  11. प्रणाम दादा
    नए साल का इतने अच्छे क़लाम से आगाज़ करने का शुक्रिया। मैं ग़ज़ल के बारे में क्या कहूँ…बतौरे ख़ास
    इलाज इनका……?कोई भी इलाज होता नहीं
    ये दिल है साहिबो..।होंगे कटे फटे रौशन
    बला का शेर कहा है….इसे लिए जा रही हूँ।
    ढेरों दाद और शुक्रिया

    सादर
    पूजा

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: