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T-21/36 हँसे जो लब तो सभी ज़ख़्म हो गए रौशन-मुमताज़ नाज़ां

हँसे जो लब तो सभी ज़ख़्म हो गए रौशन
जला जो दिल तो हुए दिल के ग़मकदे रौशन

जो ख़ुद को ढूंढा तो क्या क्या मिला बतायें क्या
कि हम पे हो गये आलम के ज़ाविये रौशन

मरो तो ऐसे कि जीने को रश्क आ जाये
चलो तो ऐसे कि हो जायें आबले रौशन

किए हैं हम ने अता हौसले शुआओं को
हमारे क़दमों से होते हैं रास्ते रौशन

दहकती रूह का आतिशकदा न बुझ जाये
अभी रहें ज़रा अश्कों के सब दिये रौशन

कमाल दिल के अँधेरों का ये भी है “मुमताज़”
बरत रहे हैं ग़ज़ल में जो क़ाफ़िये रौशन

मुमताज़ नाज़ां 09892800600

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10 comments on “T-21/36 हँसे जो लब तो सभी ज़ख़्म हो गए रौशन-मुमताज़ नाज़ां

  1. मरो तो ऐसे कि जीने को रश्क आ जाये
    चलो तो ऐसे कि हो जायें आबले रौशन
    kya tevar hain is sher me’n…… daad kubool kareN !!

  2. मरो तो ऐसे कि जीने को रश्क आ जाये
    चलो तो ऐसे कि हो जायें आबले रौशन..kya kehne mohtarma… daad
    -Kanha

  3. मुहतरमा !!!मौसिकी ,तरन्नुम की कसौटी पर भी आपकी ग़ज़ल वक्त को बाँध सकने की सिफत रखती है ऐसा हमने बार बार देखा है !!
    हँसे जो लब तो सभी ज़ख़्म हो गए रौशन
    जला जो दिल तो हुए दिल के ग़मकदे रौशन
    इस मतले को किसी अच्छे गले के सिंगर को दे दीजिये !! आरोह अवरोह को सम्हालने की कुव्वत रखने वाला जब इसे गायेगा तो साँसो का आरोह अवरोह सम्हालना मुश्किल होगा !! बहुत खूब !!
    जो ख़ुद को ढूंढा तो क्या क्या मिला बतायें क्या
    कि हम पे हो गये आलम के ज़ाविये रौशन
    कमाल का शेर कहा है !!! और साइंस भी कहते है अभी हमने अपने आपको 1% भी नही तलाश कर पाया है !!
    ये काइनात है मेरी ही ख़ाक का ज़र्रा
    मैं अपने दश्त से गुज़रा तो भेद पाये बहुत –शिकेब
    मरो तो ऐसे कि जीने को रश्क आ जाये
    चलो तो ऐसे कि हो जायें आबले रौशन
    काश तरही मिसरा ये होता –”मरो तो ऐसे कि हो जाये ज़िन्दगी रौशन”
    बहरहाल शेर पर भरपूर दाद !!
    किए हैं हम ने अता हौसले शुआओं को
    हमारे क़दमों से होते हैं रास्ते रौशन
    वाह वाह !!!
    दहकती रूह का आतिशकदा न बुझ जाये
    अभी रहें ज़रा अश्कों के सब दिये रौशन
    “दहकती रूह का आतिशकदा”!!!?? क्या खूब !! क्या खूब !!!
    कमाल दिल के अँधेरों का ये भी है “मुमताज़”
    बरत रहे हैं ग़ज़ल में जो क़ाफ़िये रौशन
    मुहतरमा मुमताज़ नाज़ां साहबा !! बेहतरीन गज़ल कही है आपने !! –मयंक

  4. मरो तो ऐसे कि जीने को रश्क आ जाये
    चलो तो ऐसे कि हो जायें आबले रौशन
    वाह वाह. बहुत खूब्

  5. बहुत ख़ूब मुमताज़ साहिबा, बहुत ख़ूब।

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