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T-21/25 -हमारी चाप से क्यों छुप रहे हो चाँद मियाँ …मयंक अवस्थी

जभी तो सच के हैं सदियों से हौसले रौशन
कोई फ़कीर कभी दार पर हुये रौशन

उदास रात के दामन मे कहकशां बनकर
फलक के ज़ख्म सियाही मे हो गये रौशन

शबे सफर को उमीदो की रौशनी ही बहुत
“कलम संभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन”

हरिक चराग के नीचे है तीरगी लेकिन
गमे –हयात के नीचे हयात- ऐ- रौशन

अब उसकी आग से शबरंग है तो क्या शिकवा
उसी के नूर से जिस्मो के थे दिये रौशन

हमारी चाप से क्यों छुप रहे हो चाँद मियाँ
तमाम रात तो हमसे ही तुम रहे रौशन

तुम एक चाँद हो तो मैं भी एक सूरज हूं
इसीलिये तो हमारे हैं फासले रौशन

वो खुश है झोंक के अंगार मेरी राहों मे
मुझे खुशी कि मेरे रास्ते हुये रौशन

हवाये आ के कड़े इम्तिहान लेंगी अभी
अभी तो आप हुए हैं नये –नये रौशन

मयंक अवस्थी ( ८७६५२१३९०५)

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24 comments on “T-21/25 -हमारी चाप से क्यों छुप रहे हो चाँद मियाँ …मयंक अवस्थी

  1. बहुत अच्छी ग़ज़ल

  2. मयंक भाई
    प्रणाम
    इतनी ताब नहीं की आपकी तरह और आपकी ग़ज़ल पर तफ़्सीली तज़किरा कर सकूँ मगर कुछ कहने से रहा भी नहीं जा रहा !

    उदास रात के दामन मे कहकशां बनकर
    फलक के ज़ख्म सियाही मे हो गये रौशन
    क्या मंज़रकशी है। … उम्दा शेर है !

    शबे सफर को उमीदो की रौशनी ही बहुत
    “कलम संभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन”
    इस तरही में इस मिसरे को सही तरह इस्तेमाल करना सबके लिए चुनौती रहा मगर यहाँ भी आपने महफ़िल लूटी है साहब !!

    हरिक चराग के नीचे है तीरगी लेकिन
    गमे –हयात के नीचे हयात- ऐ- रौशन
    ओहो ओहो … गले लग के बधाई देने का जी चाह रहा है। तह ब तह में क्या ज़विया तलाशा है !

    हमारी चाप से क्यों छुप रहे हो चाँद मियाँ
    तमाम रात तो हमसे ही तुम रहे रौशन
    मुहब्बत को इसी सलीके से शायद महसूस करना चाहिए !!!

    तुम एक चाँद हो तो मैं भी एक सूरज हूं
    इसीलिये तो हमारे हैं फासले रौशन
    वाकई फासले इस तरह से भी रौशन हो सकते हैं तो कोई भी मरासिम दूरी की वज़ह से तारीकियों में नहीं डूब सकता !!

    एक बार मेरी तरफ से इस उम्दा कलाम को सलाम। सलाम आपकी शेरी सलाहियतों को !

    • Pawan sahab !! aisi hausla afzai meri koi nahin karata jaisi aap karate hain !! bahut khushanaseeb hun !! Dastak ke prakashan ke liye apako dheron badhaiyan !! Itani masroofiyat me adab ke liye apaka itana waqt nikalana mujhe ahasaase -kamatari se bhi bhar deta hai aur bahut garv aur gaurav ka bhi anubhav deta hai ki main us daur ka shaid hun jisame aap jaise adeb aur nek insaan se main babasta hua !! –Mayank

  3. Sadar pranam bhaiya..puri ki puri ghazal behad umdaa hai bhaiya..kya kehne..dili daad aur badhai ..
    -Kanha

  4. कुछ लोग लफ़्फ़ाज़ी करते हैं, कुछ शायरी करते हैं, कुछ ग़ज़ल कहते हैं मगर कुछ लोग ‘शेर’ कहते हैं – आप के बयान शेर कहने वालों की फ़ेहरिस्त में आते हैं।

    शेर कहना क्या होता है इसे सीखने में ही उम्र निकल जाती है। आज शायरी के लिये बहुत ज़रूरी है कि वह लतीफ़ों से ठीक पहले के पायदान पर पैर रखने से बचे। ‘फ़िक्रोफ़न से लबरेज़ अच्छे-शेर’ पढ़ कर दिल को सुकून मिलता है।

    जिस तरह आप तरही में एक-एक ग़ज़ल के एक-एक शेर को पढ़ कर अपनी राय ज़ाहिर करते हैं, वह मेरे बस की बात नहीं है। मगर इतना ज़रूर कहूँगा कि जैसे हम लोगों को अपनी-अपनी ग़ज़लों पर आप की टिप्पणी का इंतज़ार रहता है उसी तरह हरेक तरही में आप की ग़ज़ल का भी इंतज़ार रहता है। देरी से हाज़िर होने के लिये क्षमा-प्रार्थी हूँ। प्रणाम। 25 जनवरी के कार्यक्रम में आप से मिलने को उत्सुक हूँ।

    • Naveen bhai main pahale bhi kah chuka hun aur aaj bhi kah raha hun ki aapke kaaran mera intrest adab me bana hua hai aur jo regard aap mujhe dete hain main usake kaabil nahin lekin jo rabt hai hamara wo meri shakti hai !! darasl aap bhi janate hain ki shairi to hawal hai main apana pan talashata hun aur jitana apanapan mujhe apase mila hai wo mera hasil hai –mayank

  5. MAYANK BHAI..
    कवि शायर कल्पना लोक में विचरने वाले प्राणी हैं
    लेकिन ये कल्पना लोक दो तरह के हैं
    एक आकाशीय जिसमें सिर्फ़ कल्पनाएँ होती हैं
    सार्थकता का अभाव होता है
    दूसरा ज़मीन से और हकीक़त से जुड़ा कल्पनालोक
    जिसमें शायर ज़मीन को नहीं छोड़ता
    आप की यह ग़ज़ल उसी ज़मीनी कल्पनालोक
    की बेमिसाल मिसाल है
    क्या क्या सार्थक कल्पनाएँ नज़्म की हैं आपने अपनी ग़ज़ल में
    वाह वाह और सिर्फ़ वाह वाह
    आदिक भारती

    • Beshkeemati alfaz hain Adik sahab !! Mujhe bahut sambal milata hai apake bayaan se aur apake hur bayaan se main bahut kuchh seekhata hun Ghazal ho ya nasra !! Ek behad settled aur established belief system se apake khyaal aate hain !! Aap charaghar hain dunia jaanati hai !! Purana mureed hun main aapaka !! regards -mayank

  6. लाजवाब ग़ज़ल भाई साहब

  7. आदरणीय मयंक भाईसाहब |उदास रात का दामन और फलक के ज़ख्म नये मुहावरे गढ़ रहें हैं |ढेरों दाद

    उदास रात के दामन मे कहकशां बनकर
    फलक के ज़ख्म सियाही मे हो गये रौशन

    दिये टेल अँधेरा मगर चराग़े गम के तले उमीदे हयात की रौशनी ,क्या तखय्युल को रानाई बक्शी है,वा..ह

    हरिक चराग के नीचे है तीरगी लेकिन
    गमे –हयात के नीचे हयात- ऐ- रौशन

    जिस्मों के दिये नई उपमा है |जो मिसरे को निखार रही है |बधाई |

    अब उसकी आग से शबरंग है तो क्या शिकवा
    उसी के नूर से जिस्मो के थे दिये रौशन

    राह निहारी साजन की |आँख चुराई साजन से |क्या कहन की सादगी है |

    हमारी चाप से क्यों छुप रहे हो चाँद मियाँ
    तमाम रात तो हमसे ही तुम रहे रौशन

    इंशाअल्लाह ये फासले दिलों में सदा रोशनी रखे |

    तुम एक चाँद हो तो मैं भी एक सूरज हूं
    इसीलिये तो हमारे हैं फासले रौशन
    ये शेर भी काफ़ी पसंद आये |

    वो खुश है झोंक के अंगार मेरी राहों मे
    मुझे खुशी कि मेरे रास्ते हुये रौशन
    लगता है यह शेर मुझ जैसे अदब के नये दियों के लिए कहा गया है हा..हा….हा
    हवाये आ के कड़े इम्तिहान लेंगी अभी
    अभी तो आप हुए हैं नये –नये रौशन
    आदरणीय मयंक भाईसाहब एक मुक़म्मल ग़ज़ल पर ढेरों दाद कबूल फरमावें |
    सादर|

    • तुम एक चाँद हो तो मैं भी एक सूरज हूं
      इसीलिये तो हमारे हैं फासले रौशन
      यहाँ चाँद=मयंक तथा सूरज=खुरशीद एक खूबसूरत रब्त रौशन कर रहा है |
      आदरणीय मयंक भाईसाहब दिये टेल को दिये तले पढ़े (उपर के कमेंट में )
      सादर

    • Khursheed bhai sukhan fehami aur sukhangoi dono par aapaka zabardast Ikhtiyaar hai !! is tafseli bayaan ke liye mere paas lufz nahin hain lekin roshan rahana roshan karane ka aur roshan karana roshan rahane ka waseela hai !1 ye crystal clear hai !! tahe dil se shukraguzar hun apake coment ka –Mayank

    • Khursheed bhai sukhan fehami aur sukhangoi dono par aapaka zabardast Ikhtiyaar hai !! is tafseli bayaan ke liye mere paas lufz nahin hain lekin roshan rahana roshan karane ka aur roshan karana roshan rahane ka waseela hai !1 ye crystal clear hai !! tahe dil se shukraguzar hun apake coment ka –Mayank

  8. Ek bharpoor gazal kahi aapne Mayank ji.
    Dili daad kubool karein.
    Aakhiri sher saath liye ja rahi huun.
    Sadar
    Pooja Bhatia

  9. बहुत बहुत अच्छी गजल दाद क़ुबूल फरमाइए

  10. Ghazal bharpoor hui hai bhaiya. Magar ye 3 sher to lajawaab hain.

    उदास रात के दामन मे कहकशां बनकर
    फलक के ज़ख्म सियाही मे हो गये रौशन..kya kahne!

    वो खुश है झोंक के अंगार मेरी राहों मे
    मुझे खुशी कि मेरे रास्ते हुये रौशन…..Khoob!

    हवाये आ के कड़े इम्तिहान लेंगी अभी
    अभी तो आप हुए हैं नये –नये रौशन…Sachha aur khara mashwra! Dheron daad!

    • Saurabh !! tahe dil s shukriya !! main pahale is zameen par kuchh nahin kah paaya !! fir aap dosto ki ghazalein padh kar hausala kiya aur ye sabhi sher 27 Dec ki shaam ko kahe hain !! Ghazal aapako psand ayi to mutamain hun –Mayank

  11. उदास रात के दामन मे कहकशां बनकर
    फलक के ज़ख्म सियाही मे हो गये रौशन

    kya kahne bhaiya ..puri gazal hi umda hai
    dili daad qubul keejiye

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