7 टिप्पणियाँ

T-21/19 जला के खुद को जो करते हैं रास्ते रौशन-पवन कुमार

जला के खुद को जो करते हैं रास्ते रौशन
उन्ही के नाम ही तारीख़ ने किये रौशन

किये हैं किसने अदब में ये क़ायदे रौशन
‘क़लम संभाल अंधेरों को जो लिखे रौशन

वो चाँदनी का बदन है कि धूप का चेहरा
कि उसको देख के होते हैं आइने रौशन

तुम्हारे नाम का उन्वान मिल गया हो जिसे
हों उस किताब के फिर क्यूँ न हाशिये रौशन

अब उनका नाम भी आये तो डर सा लगता है
वो जिनके ज़िक्र से थे मेरे तज़्किरे रौशन

तुम्हारी याद में दामन पे अश्क यूँ चमके
सियाह रात में जैसे हों क़ुमक़ुमे रौशन

कभी वो सामने आता तो क्या समां होता
वो जिसके हिज़्र में हम उम्र भर रहे रौशन

अवाम उनसे भी निपटेगा ये बता दो उन्हें
जो सिर्फ़ करते हैं लफ़्ज़ों के शोबदे रौशन

पवन कुमार 09412290079

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7 comments on “T-21/19 जला के खुद को जो करते हैं रास्ते रौशन-पवन कुमार

  1. Kya hi umdaa ghazal hai bhaiya…
    वो चाँदनी का बदन है कि धूप का चेहरा
    कि उसको देख के होते हैं आइने रौशन..matla aur ye she’r khaas tour pe pasand aaya..girah bhi khoob hai..daad
    sadar
    _kanha

  2. अपने आरोह से चकित करती बढ़िया ग़ज़ल। बहुत ख़ूब पवन भाई। दाद हाज़िर है। ये दो शेर तो बहुत ही कमाल हैं भाई

    तुम्हारी याद में दामन पे अश्क यूँ चमके
    सियाह रात में जैसे हों क़ुमक़ुमे रौशन – रात दामन और कुमकुमे का तसव्वुर, बहुत ख़ूब

    कभी वो सामने आता तो क्या समां होता
    वो जिसके हिज़्र में हम उम्र भर रहे रौशन – आह शायरी की शान यही तो है

  3. वो चाँदनी का बदन है कि धूप का चेहरा
    कि उसको देख के होते हैं आइने रौशन
    आदरणीय पवन कुमार साहब ,लाज़वाब अशहार हुये है ,बधाई स्वीकार करें |इस शेर पर ढेरों दाद
    अवाम उनसे भी निपटेगा ये बता दो उन्हें
    जो सिर्फ़ करते हैं लफ़्ज़ों के शोबदे रौशन
    सादर

  4. अवाम उनसे भी निपटेगा ये बता दो उन्हें
    जो सिर्फ़ करते हैं लफ़्ज़ों के शोबदे रौशन…Waah! Pawan saahb nihayat umda ghazal hui hai! Daad aur mubarakbaad!

  5. bahut umda gazal huii hai Pawan sahab
    sabhi sher pasand aaye…
    dili mubarak baad

  6. जला के खुद को जो करते हैं रास्ते रौशन
    उन्ही के नाम ही तारीख़ ने किये रौशन
    मुतास्सिर हूँ !! खुद को जला के शम्म: और चराग रास्ते रौशन करते हैं और तारीख् गवाह है कि इन्ही के नाम से इंसानियत की रहगुज़र रौशन है !! ये शम्म: और चराग इंसानी पैकर मे भी हो सकते हैं और समूहों मे भी !!
    किये हैं किसने अदब में ये क़ायदे रौशन
    ‘क़लम संभाल अंधेरों को जो लिखे रौशन
    जब रोशनी दरकार है तो अन्धेरा होगा ही !! लिहाजा फ़िक्र , ज़िक्र और तसव्वुर रोशनी का ही ज़रूरी है यही अदब मे होता है !!
    वो चाँदनी का बदन है कि धूप का चेहरा
    कि उसको देख के होते हैं आइने रौशन
    नोट किये लेता हूं इस शेर को मेरी कई भाभियाँ ऐसे शेरो पे कुर्बान जाती है !!!
    तुम्हारे नाम का उन्वान मिल गया हो जिसे
    हों उस किताब के फिर क्यूँ न हाशिये रौशन
    ज़रूर !! और क्या खूब शेर कहा है !! मालिक के उनवान से ज़िंदगी की किताब रोशन होती है !! सूरज के उनवान से धरती की किताब और पवित्र किताबो से मज़हबी मजलिसो की किताबे रौशन होती हैं !!
    अब उनका नाम भी आये तो डर सा लगता है
    वो जिनके ज़िक्र से थे मेरे तज़्किरे रौशन
    यही तो शादी से पहले और शादी के बाद का फर्क है !!
    तुम्हारी याद में दामन पे अश्क यूँ चमके
    सियाह रात में जैसे हों क़ुमक़ुमे रौशन
    अरे साहब तश्बीह को क्या कहूं ??!! कुमकुमे यकीनन रौशन हो गए दिल मे !!
    कभी वो सामने आता तो क्या समां होता
    वो जिसके हिज़्र में हम उम्र भर रहे रौशन
    ये तूर का जलवा है हर बार नहीं होता !!!
    अवाम उनसे भी निपटेगा ये बता दो उन्हें
    जो सिर्फ़ करते हैं लफ़्ज़ों के शोबदे रौशन
    अवाम नया शोबदाकार तलाश लेगा अगर निपटा देता झूठो को तो ये सूरत नहीं होती मुल्क की – लेकिन दिल को बहलाने को ग़ालिब ये ख्याल अच्छा यूं है कि इसी इन्यूच अवाम का एक हिस्सा मैं भी हूं !!
    पवन साहब बहुत खूब !! भरपूर दाद !! नए और बड़े ही ख़ूबसूरत शेर अपने इस ज़मीन पर कहे हैं !! –मयंक

  7. पवन भाई…
    कभी वो सामने आता…
    क्या ही ख़ूबसूरत शे’र है !
    वाह !
    दाद कुबूल करें.

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