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T-21/15 हुए अतीत में हर वक़्त, हादिसे रौशन-इमरान हुसैन ‘आज़ाद’

हुए अतीत में हर वक़्त, हादिसे रौशन
रहे लबों पे मिरे, फिरभी क़हक़हे रौशन

समझ रहा था जिसे कल तलक, कि है दुश्मन
उसी हवा ने किये हैं, मिरे दिये रौशन

तिरी जफ़ा तो यक़ीनन, बुझा चुकी होती
मिरे ये शेर जो करते नहीं, मुझे रौशन

भटक गया हूँ मैं, नफ़रत की अंधी गलियों में
बढ़ूँ तभी, जो ये रस्ता कहीं दिखे रौशन

उसी के शेर ये दुनिया, पढ़ेगी अब ‘आज़ाद’
‘कलम संभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन’

इमरान हुसैन ‘आज़ाद’ 09536816624

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24 comments on “T-21/15 हुए अतीत में हर वक़्त, हादिसे रौशन-इमरान हुसैन ‘आज़ाद’

  1. बढ़िया ग़ज़ल, दाद हाज़िर है

    • बहुत बहुत शुक्रिया सर। हौसला आफजाई के लिए
      सादर
      इमरान

  2. तिरी जफ़ा तो यक़ीनन, बुझा चुकी होती
    मिरे ये शेर जो करते नहीं, मुझे रौशन
    इमरान हुसैन ‘आज़ाद ‘साहब ,क्या सोज़ है, दिल की गहराइयों तक उतरा शेर है |तमाम ग़ज़ल नायाब है |दिलीदाद कबूल फरमावें |

  3. Achhi ghazal Imraan saahb! Daad haazir hai!

    • बहुत बहुत शुक्रिया सर हौसला आफजाई के लिए

  4. kya kahne imraan bhaii khushamdeed
    bahut umda gazal kahi aapne
    aur tarhi misre par girah bhi umda hai
    dher saari daad

    • बहुत बहुत शुक्रिया आलोक साहब हौसला आफजाई के लिए

  5. हुए अतीत में हर वक़्त, हादिसे रौशन
    रहे लबों पे मिरे, फिरभी क़हक़हे रौशन
    इमरान भाई !! मतले की रवानी पर और कहन की बुलंदी पर दाद दाद दाद !!!
    समझ रहा था जिसे कल तलक, कि है दुश्मन
    उसी हवा ने किये हैं, मिरे दिये रौशन
    ये जो चराग हवाओं की धुन पे रक्सां है
    उसे बताओ अभी वक्त है सुधर जाये
    वो बर्गे -खुश्क जिसे शाख ने लताड दिया
    हवा के साथ नजाए तो फिर किधर जाये
    तिरी जफ़ा तो यक़ीनन, बुझा चुकी होती
    मिरे ये शेर जो करते नहीं, मुझे रौशन
    तालियाँ , दाद और देर तक वाह वाह !!!
    उसी के शेर ये दुनिया, पढ़ेगी अब ‘आज़ाद’
    ‘कलम संभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन’
    इमरान हुसैन ‘आज़ाद’ साहब ढेर सारी दाद क़ुबूल करे !! –मयंक

    • बहुत बहुत शुक्रिया हौसला आफजाई के लिए। आपकी इतनी अच्छी प्रितक्रिया ने मेरा उत्साह्बर्धन किया।
      सादर
      इमरान

  6. बहुत उम्दा ………खूबसूरत

  7. achchi ghazal..wahhh jnb IMRAN SAHIB

    • बहुत बहुत शुक्रिया आज़म साहब हौसला आफजाई के लिए

  8. Bahut khoob gazal kahi hae Azaad sahb
    Daad kubool karein.
    Sadrar
    Pooja Bhatia

  9. आज़ाद साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है, हर शेर काबिले दाद है

    दिनेश

    • बहुत बहुत शुक्रिया दिनेश साहब
      हौसला आफजाई के लिए

  10. समझ रहा था जिसे कल तलक, कि है दुश्मन
    उसी हवा ने किये हैं, मिरे दिये रौशन
    khoob hai bhai waah, MUBAARAKBAAD

  11. हुए अतीत में हर वक़्त, हादिसे रौशन
    रहे लबों पे मिरे, फिरभी क़हक़हे रौशन

    तिरी जफ़ा तो यक़ीनन, बुझा चुकी होती
    मिरे ये शेर जो करते नहीं, मुझे रौशन
    kya kehne Imran Husain sahab..waahh…daad qubul kare’n
    -Kanha

  12. इमरान साहब

    हुए अतीत में हर वक़्त, हादिसे रौशन
    रहे लबों पे मिरे, फिरभी क़हक़हे रौशन
    बेशकीमती मतला बाँधा है …।

    समझ रहा था जिसे कल तलक, कि है दुश्मन
    उसी हवा ने किये हैं, मिरे दिये रौशन
    नए ज़ाविये को तलाश लिया हुज़ूर ने !

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