24 टिप्पणियाँ

T-21/14 दियों की तरह हैं पैरों के आबले रौशन-ख़ुरशीद खैराड़ी

दियों की तरह हैं पैरों के आबले रौशन
किये हैं हमने अंधेरों में रास्ते रौशन

बहाया खून अबोधों का बासबब तुमने
हुए हैं दीन के नापाक फ़लसफ़े रौशन

मेरी हयात अवध की गली हुई यारों
हर एक ज़र्रा जहाँ राम नाम से रौशन

बुझे बुझे थे उमंगों के आशियाने सब
जमाल से तेरे ग़ुरबतकदे हुए रौशन

तुम्हारे ज़िक्र के जब बज़्म में जलाये दिये
सभी के ज़ह्न उसी वक़्त हो गये रौशन

ये शामे-ग़म हुई रंगीन इस तरह यारो
हर एक बामे-जबीं पर हैं हादसे रौशन

अदीब वो जो उजालों का सरपरस्त रहे
‘क़लम सँभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन’

मुझे तो ढलना है ‘खुरशीद’ की तरह इक शाम
रखेंगे बाद मिरे रात को दिये रौशन

‘ख़ुरशीद’ खैराड़ी 09413408422

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24 comments on “T-21/14 दियों की तरह हैं पैरों के आबले रौशन-ख़ुरशीद खैराड़ी

  1. दियों की तरह हैं पैरों के आबले रौशन
    किये हैं हमने अंधेरों में रास्ते रौशन

    बहाया खून अबोधों का बासबब तुमने
    हुए हैं दीन के नापाक फ़लसफ़े रौशन

    मेरी हयात अवध की गली हुई यारों
    हर एक ज़र्रा जहाँ राम नाम से रौशन

    प्रणाम आपकी लेखनी को आदरणीय खुर्शीद जी

  2. Umda ghazal hui hai Khursheed Saahb. Girah bahut khoob hai! Daad aur mubarakbaad len!

  3. दियों की तरह हैं पैरों के आबले रौशन
    किये हैं हमने अंधेरों में रास्ते रौशन
    बहुत खूब खुर्शीद भाई !! –ज़िंदगी हो या महबूब या परात्पर –जिनके होठो पे हंसी पाँओं मे छाले होंगे //हां वही लोग तेरे चाहने वाले होंगे
    बहाया खून अबोधों का बासबब तुमने
    हुए हैं दीन के नापाक फ़लसफ़े रौशन
    पेशावर कांड पे शेर कहा है –यहाँ रौशन शब्द का अर्थ उजागर होने से है !!!
    मेरी हयात अवध की गली हुई यारों
    हर एक ज़र्रा जहाँ राम नाम से रौशन
    हा हा !! कमसकम ५ बरस शेर दबंग रहेगा !!! मजाक बरतरफ .. शेर नया है और अच्छा है !!
    बुझे बुझे थे उमंगों के आशियाने सब
    जमाल से तेरे ग़ुरबतकदे हुए रौशन
    तुम्हारे ज़िक्र के जब बज़्म में जलाये दिये
    सभी के ज़ह्न उसी वक़्त हो गये रौशन
    ऊपर के दोनों शेर मुख्य पात्र का हवाला साफ साफ् नहीं देते इसलिए ..रहस्य बरकरार है और ये शेर को वुसाअत देने की बात है ये पात्र महबूब या ईशवर है !!
    ये शामे-ग़म हुई रंगीन इस तरह यारो
    हर एक बामे-जबीं पर हैं हादसे रौशन
    बढ़िया कहा है !! ज़ख्म ही ज़िंदगी की और आह ही शायरी की जीनत हैं
    अदीब वो जो उजालों का सरपरस्त रहे
    ‘क़लम सँभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन’
    ऊला मे अदीब लफ्ज़ को शुमार कर आपने पूरा न्याय किया है गिरह के साथ !! वाह वाह !!
    मुझे तो ढलना है ‘खुरशीद’ की तरह इक शाम
    रखेंगे बाद मिरे रात को दिये रौशन
    तखल्लुस का भी बहुत उम्दा इस्तेमाल किया है !!
    ‘ख़ुरशीद’ खैराड़ी आज तक आपकी हर गज़ल और हर शेर अच्छा ही लगा है सभी को और ये एक शायर की तपस्या की निशानदेही है !! मेहनत करना और फिक्र को निखारना कोइ आपसे सीखे !! बहुत सुन्दर वाह वाह –मयंक

    • आदरणीय मयंक भाईसाहब |
      प्रणाम|
      मेरे कमज़ोर से कमज़ोर अशहार भी आपके तब्सिरे में इस तरह मुनव्वर होते हैं कि मैं अपनी ग़ज़ल को आपकी तनकीद के बाद ही ढंग से पढता हूं |
      आपकी मुहब्बत एक शेर याद दिलाती है |’उसके ज़ल्वों में खिंचा हुस्न का नक्शा कामिल ,उसकी तन्वीर में तस्वीर की रानाई है |
      सादर आभार |

  4. BAHUT KHOOB GHAZAL HUYI HAI..
    BE SABAB …printing mistake se BA SABAB ho gaya…shayad

    • आदरणीय आज़म साहब
      आपसे दाद पाकर दिल शाद हो जाता है |शेर यूं ही था कि ‘बहाया खून अबोधों का बेसबब तुमने “हुये हैं दीन के नापाक फ़लसफ़े रौशन |शायद पोस्टिंग \प्रिंटिग के समय कहीं बे से बा हो गया है|सादर आभार |

  5. बहुत उम्दा ग़ज़ल
    दाद कुबूल फरमाएं
    सादर
    इमरान हुसैन आज़ाद

  6. खुरशीद भाई,

    मुझे तो ढलना है ‘खुरशीद’ की तरह इक शाम
    रखेंगे बाद मिरे रात को दिये रौशन

    बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है, सारे शेर बहुत पसंद आए, बहुत बहुत बधाई

    दिनेश

  7. तुम्हारे ज़िक्र के जब बज़्म में जलाये दिये
    सभी के ज़ह्न उसी वक़्त हो गये रौशन KHURSHEED SAHAB BEHTAREEN SHER HUWA HAI, WAAH, DAAD HAAZIR HAI.

  8. खुर्शीद भाई
    प्रणाम

    दियों की तरह हैं पैरों के आबले रौशन
    किये हैं हमने अंधेरों में रास्ते रौशन
    मतले पर दाद न देना भूल होगी…. मुबारकबाद !

    बहाया खून अबोधों का बासबब तुमने
    हुए हैं दीन के नापाक फ़लसफ़े रौशन
    श्रद्धांजलि … !!!!

    मेरी हयात अवध की गली हुई यारों
    हर एक ज़र्रा जहाँ राम नाम से रौशन
    वाह साहब !!

  9. ख़ुर्शीद बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई दाद क़ुबूल फ़रमाइये।

    • आदरणीय दादा सादर परणाम। आपका स्नेह इसी तरह मुझ पर बना रहे।एक निवेदन है-मेरी कुछ ग़ज़लें ‘ khursi khairadi’ तथा कुछ ग़ज़लें ‘khurshid khairadi’ folder में हैं।यदि संभव हो
      तो सभी एक ही folder में करने की कृपा करावें।सादर

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