16 टिप्पणियाँ

T-21/13 वही अंधेरों की हद है, वही दिये रौशन-सलीम ख़ान

वही अंधेरों की हद है, वही दिये रौशन
तो आओ दिल को जलाओ कि हो सके रौशन

अभी ये रात के दरिया में गहरे डूबेंगे
अभी चिराग़ हुए हैं नये-नये रौशन

तरक़्क़ियों ने चराग़ां बहुत किया लेकिन
अभी भी हो न सके कितने ज़ाविये रौशन

बहुत है धुंध मगर इस उमीद पर मैं चला
कि चलते-चलते हो जायेंगे रास्ते रौशन

हुई जो मौत तो पहचान ज़िन्दगी को मिली
कई चराग़ बुझे तो बहुत हुए रौशन

सलीम ख़ान                                                09893272241

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16 comments on “T-21/13 वही अंधेरों की हद है, वही दिये रौशन-सलीम ख़ान

  1. अभी ये रात के दरिया में गहरे डूबेंगे
    अभी चिराग़ हुए हैं नये-नये रौशन

    तरक़्क़ियों ने चराग़ां बहुत किया लेकिन
    अभी भी हो न सके कितने ज़ाविये रौशन
    waah….waah.
    khoob.

  2. बढ़िया ग़ज़ल। लास्ट शेर में ‘कई’ और ‘बहुत’ ने अच्छा ट्विस्ट पैदा क्या है।

  3. अभी ये रात के दरिया में गहरे डूबेंगे
    अभी चिराग़ हुए हैं नये-नये रौशन

    तरक़्क़ियों ने चराग़ां बहुत किया लेकिन
    अभी भी हो न सके कितने ज़ाविये रौशन
    सलीम साहब सभी अशहार लाज़वाब हैं | मुबारक |ढेरों दाद कबूल फरमावें |

  4. अच्छी ग़ज़ल सलीम भाई !
    बधाई.

  5. chand ashaar magar asardaar..
    bahut khoob SALEEM KHAN sb

  6. बहुत उम्दा ग़ज़ल
    दाद कुबूल कीजिये

  7. अभी ये रात के दरिया में गहरे डूबेंगे
    अभी चिराग़ हुए हैं नये-नये रौशन

    सलीम ख़ान साहब इस एक शेर ने ही पूरी महफ़िल लूट ली बाक़ी तो आपकी पूरी ग़ज़ल मुरस्सा है

    दिनेश

  8. हुई जो मौत तो पहचान ज़िन्दगी को मिली
    कई चराग़ बुझे तो बहुत हुए रौशन ACHCHHA HAI कई चराग़ बुझे तो बहुत हुए रौशन KYA KAHNE BHAI WAAH WAAH

  9. हुई जो मौत तो पहचान ज़िन्दगी को मिली
    कई चराग़ बुझे तो बहुत हुए रौशन..waahhh..daad qubule’n saleem sahab
    -Kanha

  10. सलीम भाई
    आदाब

    यूँ तो तमाम शेर ही दाद के काबिल हैं मगर इस शेर पर खास दाद साहब !!
    बहुत है धुंध मगर इस उमीद पर मैं चला
    कि चलते-चलते हो जायेंगे रास्ते रौशन
    उम्दा !!!

  11. सलीम साहब यूँ तो ग़ज़ल ही अच्छी है मगर ये दो शेर हर ऐतबार के जगमगाते-खनखनाते हुए क़लदार सिक्के हैं. वाह-वाह दाद क़ुबूल फ़रमाइये

    अभी ये रात के दरिया में गहरे डूबेंगे
    अभी चिराग़ हुए हैं नये-नये रौशन

    तरक़्क़ियों ने चराग़ां बहुत किया लेकिन
    अभी भी हो न सके कितने ज़ाविये रौशन

  12. बहुत शानदार ग़ज़ल आदरणीय सलीम साहब

  13. बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने सलीम ख़ान साहब
    बधाई स्वीकार करें।

  14. हुई जो मौत तो पहचान ज़िन्दगी को मिली
    कई चराग़ बुझे तो बहुत हुए रौशन

    Kya baat hai Saleem Sahab
    bahut sunder ghazal hui hai

    Regards,
    Nakul

  15. अभी ये रात के दरिया में गहरे डूबेंगे
    अभी चिराग़ हुए हैं नये-नये रौशन
    accha she’r hua hai saleem khan sahab.. tarahi me swagat hai aapka…

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