24 टिप्पणियाँ

T-21/10 ज़माने ठीक है इनसे बहुत हुए रौशन-दिनेश नायडू

ज़माने ठीक है इनसे बहुत हुए रौशन
मगर चराग़ कहां ख़ुद को कर सके रौशन ?

सभी के ज़ह्न में उसका ख़याल रहता है
उस एक नूर से है कितने आईने रौशन

अभी तो हमको कई रोज़ जगमगाना है
हमीं है दश्त में इक आख़िरी दिए रौशन

मुहर्रिर और हैं पर दिल सा कोई होगा क्या ?
‘क़लम संभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन

महक उसी की, मिरी रहनुमाई करती है
उसी की चाप से होते हैं रास्ते रौशन

हम एक उम्र से तारीकियों में सिमटे थे
जब उसने छू लिया तो हम भी हो गये रौशन

किसी का अक्स मुझे ख़ाब में दिखा था कभी
तमाम उम्र रहे मेरे रतजगे रौशन

ये आधी रात को दस्तक सी किसने दी दिल पर
ये किसने कर दिए हर सम्त क़ुमक़ुमे रौशन

चमक सी रहती है आँखों में आजकल मेरी
ये दीप रहते है हर वक़्त अश्क से रौशन

हम एक रुख़ से अँधेरे में आ गये लेकिन
कई रुख़ों से हमारे हैं सिलसिले रौशन

चलो ‘दिनेश’ अब इस दिल से उनका नूर गया
तलाशते हैं इलाक़े बचे खुचे रौशन

दिनेश नायडू 09303985412

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24 comments on “T-21/10 ज़माने ठीक है इनसे बहुत हुए रौशन-दिनेश नायडू

  1. behad umda ghazal
    har sher meN aik alag sa mazmoon hai jise an kaha bhi kaha ja sakta hai…ki jise aap ne hi kaha hai…pahli baar…
    aur fir shilp bhi kamaal ka hai…
    goya…mukammal sukhanwari…bharpoor gghazal kaari..
    daad qobool kareN jnb DINESH SB

  2. DINESH NAIDU SAHAB ! KIS KIS SHER KO CODE KIYA JAAYE AUR KIS KIS KI DAAD DI JAYE, UMDA GHAZAL HAI, MUBAARAKBAAD QABOOL KARE’N.

  3. पूरी ग़ज़ल बहुत उम्दा। ये वो शायरी हैं जो मेरे दिल के सबसे ज़ियादा नज़दीक है। दाद क़ुबूल कीजिये।

  4. अच्छी ग़ज़ल हुई है दिनेश भाई! बधाई और दाद !

  5. दिनेश, शायरी तरह-तरह की होती है। एक craft वाली भी होती है जिस में अल्फ़ाज़ लोगों के मन मोहते हैं मगर साथ ही ‘कजरारे-कजरारे नैना” टाइप बेशतर गीतों की तरह उन जुमलों / मिसरों की परवाज़ भी दूर तक नहीं जाती। इसी तरह एक होती है डाइरैक्ट दिल से निकली हुई बात। आप के जानिब से पढ़ने को मिलीं हालिया पोस्ट्स में आप ने काफ़ी इम्प्रैस किया है। जीते रहिये। बहुत खूब।

  6. दिनेश जी
    आपकी क़लम और क़लाम दोनोँ को सलाम।
    एक बेहद खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई।
    सादर
    पूजा भाटिया

  7. महक उसी की, मिरी रहनुमाई करती है
    उसी की चाप से होते हैं रास्ते रौशन

    हम एक उम्र से तारीकियों में सिमटे थे
    जब उसने छू लिया तो हम भी हो गये रौशन

    आदरणीय दिनेश साहब, आपकी ग़ज़ल हमेशा उम्दा रहती है | इस बार भी आप पूरे शबाब पर हैं | ढेरों दाद क़ुबूल फ़रमाइये |
    सादर

  8. दिनेश भाई।
    बहुत उम्‍दा ग़ज़ल हमेशा की तरह।
    वाह..वाह..।
    नवनीत

  9. dinesh poori ghazal umda hai mere bhai…

    महक उसी की, मिरी रहनुमाई करती है
    उसी की चाप से होते हैं रास्ते रौशन

    किसी का अक्स मुझे ख़ाब में दिखा था कभी
    तमाम उम्र रहे मेरे रतजगे रौशन

    ये आधी रात को दस्तक सी किसने दी दिल पर
    ये किसने कर दिए हर सम्त क़ुमक़ुमे रौशन

    हम एक रुख़ से अँधेरे में आ गये लेकिन
    कई रुख़ों से हमारे हैं सिलसिले रौशन

    aur ye chaar she’r to behad psand aaye.. inme bhi aakhiri sher mere liye hasile ghazal hai.. bahut umda… daad qubul karo mere bhai..

  10. आपकी ग़ज़ल दिल को भा गई आदरणीय….

  11. सभी के ज़ह्न में उसका ख़याल रहता है
    उस एक नूर से है कितने आईने रौशन..Pawan bhaiya se bilkul sahmat hu’n ye she’r Aadarniye Bade dada par bilkul saadik aata hai..

    ये आधी रात को दस्तक सी किसने दी दिल पर
    ये किसने कर दिए हर सम्त क़ुमक़ुमे रौशन

    चमक सी रहती है आँखों में आजकल मेरी
    ये दीप रहते है हर वक़्त अश्क से रौशन

    चलो ‘दिनेश’ अब इस दिल से उनका नूर गया
    तलाशते हैं इलाक़े बचे खुचे रौशन

    wahh wahh ..kya kehne bhaiya ..Girah to lajawab hai…daad qubule’n ..sadar
    -Kanha

  12. प्रिय दिनेश जी
    कठिन ज़मीन पर प्यारी ग़ज़ल कही है

    सभी के ज़ह्न में उसका ख़याल रहता है
    उस एक नूर से है कितने आईने रौशन
    तुफैल भाई के लिए है ये शेर तो …।

    अभी तो हमको कई रोज़ जगमगाना है
    हमीं है दश्त में इक आख़िरी दिए रौशन
    वाह !

    हम एक उम्र से तारीकियों में सिमटे थे
    जब उसने छू लिया तो हम भी हो गये रौशन
    और
    महक उसी की, मिरी रहनुमाई करता है
    उसी की चाप से होते हैं रास्ते रौशन
    ये हुयी न बात …. महबूब को रहबर बनाने का ख़याल भी शेर में रौशन होता दिख रहा है।

    ये आधी रात को दस्तक सी किसने दी दिल पर
    ये किसने कर दिए हर सम्त क़ुमक़ुमे रौशन
    बहुत बढ़िया !!!

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