25 Comments

T-21/6 तमाम ज़ह्न हैं उन के जमाल से रौशन-नवीन सी चतुर्वेदी

तमाम ज़ह्न हैं उन के जमाल से रौशन
धुनें जो फ़िल्म जगत को सुना गये रौशन

किसी धुनों के पुजारी से पूछिये साहब
ऋतिक बता न सकेंगे कि कौन थे रौशन

मुझे भी याद नहीं सब की सब धुनें उनकी
बस इतना याद है गीतों की शान थे रौशन

कई अदीबों को मौक़े दिये, निखारा भी
तभी तो कहते हैं दिल के भी थे बड़े रौशन

लता जी और मोहम्मद रफ़ी के जीवन के
सुनहरे-पन्नों की तहरीर ख़ुद रहे रौशन

बहुत अज़ीज़ रही यूँ तो उनको सारङ्गी
प बाँसुरी के सुरों से भी थे बँधे रौशन

भले ही कितना भी कहिये वो कम लगे है “नवीन”
कुछ ऐसे शख़्स थे हम सब के लाड़ले रौशन

नवीन सी चतुर्वेदी 09967024593

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

25 comments on “T-21/6 तमाम ज़ह्न हैं उन के जमाल से रौशन-नवीन सी चतुर्वेदी

  1. जुदा अंदाज़ की बेहतरीन ग़ज़ल.
    दाद कुबूल करें हुज़ूर !

  2. आदरणीय नवीन भाईसाहब ,आपने एक एक शेर में रौशन साहब को सच्ची श्रधांजलि दी है |आपके हुनर को सलाम |
    सादर

  3. बहुत अज़ीज़ रही यूँ तो उनको सारंगी
    प बाँसुरी के सुरों से भी थे बँधे रौशन

    नवीन भाई
    एक दम नए खयालों से रौशन इस नज़्म नुमा ग़ज़ल को पढ़ कर हैरान हूँ. क्या ग़ज़ल ऐसे भी लिखी जा सकती है। …. वाह वाह !
    वैसे मैं रौशन साहब का मुरीद हूँ मगर इतने ज़ाविये तलाशना उनकी शख्सियत के …. वाकई एक बायोग्राफी लिखने जैसा काम है !

    मयंक जी के शब्दों में मैं भी यही कहूँगा कि
    कई चराग़ भी इस वक़्त हैं अन्धेरों मे
    तुम्हारे शेर से “रोशन” तो हो गये रौशन
    बहुत बधाई आपको नवीन भाई !!!—

    • आभारी हूँ पवन भाई। आप के कमेण्ट्स हौसले में इज़ाफ़ा करते हैं। आप की ग़ज़ल का इन्तज़ार है।

  4. Naveen bhaai radeef ka kya jaaviya dhoondh nikaala aapne. Luftandoz hua. Daad lijiye!

  5. Bhaiyya Pranaam,

    Main to soch bhi nahi sakta tha ki is prakaar bhi gazal kahi ja sakti hai,

    Baaqi Mayank Bhaiyya ki Tippani ke aage kya kahun….

    Dheron Mubarqbaad

    Aaapka

    Dinesh

    • पिङ्गल ही की तरह अरूज़ ने भी ग़ज़ल को तमाम आयाम दिये हुये हैं। यह उन में से एक है। इस के पहले आप लोग इसी पोर्टल पर ‘यक-क़ाफ़िया ग़ज़ल’ और ‘क़्त्अबन्द ग़ज़ल भी पढ़ चुके होंगे। बहुत-बहुत शुक्रिया दिनेश। जीते रहिये।

  6. ज्ञानवर्धन हुआ दादा की टिप्पणी से – इस प्रकार की गज़ल का नामेंक्लेचर समझ आया !!
    ” ये ग़ज़ले-मरबूत या ग़ज़ले-सालसिल हुई जो नज़्म की एक शैली है”
    बाकी “नवीन” भाई आपके भीतर एक जिज्ञासु भी है और एक युयुत्सु भी !! जो हठधर्मी भी है और बेहद साहसी भी !! वगर्ना कोई भी रौशन रदीफ से ऐसी गज़ल कहने से पहले सौ बार सोचता –लेकिन हिम्मते मर्दाँ मददे खुदा !! आप ने दिल जीत लिया एक मुख़्तलिफ़ ज़ाविये से ये ग़ज़ल कह कर !! गज़ल अरूज़ के लिहाज से बहुत साधारण है लेकिन इसकी नावेल्टी लाजवाब है और इस तरही मे इसी करण से विशेष रूप से चिन्हित की जायेगी और याद रखी जायेगी !!! एक शेर इस गज़ल की प्रतिष्ठा मे !! —
    कई चराग़ भी इस वक़्त हैं अन्धेरों मे
    तुम्हारे शेर से “रोशन” तो हो गये रौशन
    बहुत बधाई आपको !!!—मयंक

    • भैया प्रणाम

      धर्म-क्षेत्रे कुरु-क्षेत्रे समवेता युयुत्सव:
      मामका पाण्डवश्चैव ……

      यह श्लोक जो सङ्केत देता है, उसी लिये मानव-सभ्यता में ख़ुद को युयुत्सव से जोड़ने पर लोग पीछे हटते रहते हैं। युयुत्सव की स्वयं की अपरिमित योग्यताओं / क्षमताओं एवम विलक्षण कौशल्य पर उन के जन्म की कहानी कालिख पोत देती है। इसीलिए मैं ने देखा है कि लोग युयुत्सव से समानता होने पर असहज महसूस करते हैं।

      आप ने सदैव मेरा उत्साह बढ़ाया है, मुझे अच्छी राह दिखलाई है। इस बार भी आप ने मेरे प्रयासों को सराहा है। मैं आप का बहुत-बहुत आभारी हूँ।

  7. Is radeef ka aesa pryog sirf aap hi kar sakte hain…aap ki is alag soch ko sadar naman…jiyo.

  8. आदरणीय भाई साहब।
    रौशन ग़ज़ल के लिए दिली दाद।
    सादर
    नवनीत

  9. Pahli baar tarhi me gazle -marbuut
    Dekh raha hun
    Kya kahne dada

    REgards

  10. Mere liye bilkul alag tarah ki ghazal hai dada..pehli baar padh raha hu’n aisi ghazal..mazaa aa gya waahh…sadar
    -Kanha

  11. वाह नवीन जी
    आपकी ग़ज़ल के साथ रौशन साहब हर शेर से झांकते मुस्कुराते नज़र आते है। दिली मुबारकबाद क़ुबूल करें ।
    सादर
    पूजा भाटिया

  12. bahut lutf aaya navin ji.. acchi khiraaj-e-aqeedat di raushan sahab ko aapne.. daad qubulen…

  13. नवीन रदीफ़ का बहुत उम्दा पहलू निकाला। रौशन साहब { संगीतकार } के नाम से मंसूब ये ग़ज़ले-मरबूत या ग़ज़ले-सालसिल हुई जो नज़्म की एक शैली है. वाह-वाह

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: