19 टिप्पणियाँ

T-21/4 कलम सँभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन-चंद्रभान भारद्वाज

कलम सँभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन
कलम मशाल बना राह जो करे रौशन

घने अँधेरे में रहकर भी जो बने रौशन
उन्हीं के दम से ही दुनिया की छवि लगे रौशन

करो वो काम कि सदियों तलक रहे रौशन
तुम्हारा नाम ज़माना सदा रखे रौशन

पड़ें कदम तो ज़माने को राह बन जाये
पड़े निगाह तो बुझते दिये करे रौशन

कहीं तो रात अंधेरी है दिन कुहासों भरा
कहीं है रात भी रौशन हैं रतजगे रौशन

कहाँ कहाँ न भटकती रही अँधेरे में
मिले जो प्यार तो ये ज़िंदगी बने रौशन

लिखेगा वक़्त शिलाओं पे नाम बस उनका
उजाला बाँट के दुनिया को जो हुए रौशन

चंद्रभान भारद्वाज

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19 comments on “T-21/4 कलम सँभाल अँधेरे को जो लिखे रौशन-चंद्रभान भारद्वाज

  1. बढ़िया ग़ज़ल। शिलाओं का सुन्दर प्रयोग। बहुत बहुत बधाई।

  2. लिखेगा वक़्त शिलाओं पे नाम बस उनका
    उजाला बाँट के दुनिया को जो हुए रौशन
    आदरणीय चंद्रभान साहब ,ग़ज़ल बहुत पसंद आई |ढेरों दाद कबूल फरमावें |

  3. कहीं तो रात अंधेरी है दिन कुहासों भरा
    कहीं है रात भी रौशन हैं रतजगे रौशन

    Waah lajawab Bhardwaj Ji

  4. कहीं तो रात अंधेरी है दिन कुहासों भरा
    कहीं है रात भी रौशन हैं रतजगे रौशन

    चंद्रभान जी गजल बेहद पसन्द आई, दिली मुबारकबाद

  5. आदरणीय चंद्रभान साहब।
    प्रणाम।
    उम्‍दा कलाम के लिए आभार।
    सादर
    नवनीत

  6. आदरणीय चंद्रभान साहब।
    दाद स्‍वीकार करें। बहुत खूब।
    सादर

  7. चंद्रभान जी

    बहुत सुन्दर ग़ज़ल पेश की है आपने. सभी शे’र कमाल कर रहे हैं.

    पड़ें कदम तो ज़माने को राह बन जाये
    पड़े निगाह तो बुझते दिये करे रौशन…
    वाह .. क्या बात है

    लिखेगा वक़्त शिलाओं पे नाम बस उनका
    उजाला बाँट के दुनिया को जो हुए रौशन ..
    बहुत खूब.. ये शे’र बहुत ख़ास लगे

    Regards,
    Nakul

  8. कहीं तो रात अंधेरी है दिन कुहासों भरा
    कहीं है रात भी रौशन हैं रतजगे रौशन
    umda sher hai bhai ….

  9. चन्द्रभान साहब आप इस उम्र में मश्क़े-सुख़न में मसरूफ़ हैं, ये क़ाबिले-सताइश काम है. वाह-वाह

  10. Bahut achhi ghazal hui hai चंद्रभान भारद्वाज sahab…

    कहीं तो रात अंधेरी है दिन कुहासों भरा
    कहीं है रात भी रौशन हैं रतजगे रौशन
    is she’r ke kya kehne..wahhh
    -Kanha

  11. badhiya ghazal hui hai chandrabhan ji.. khaas taur se

    पड़ें कदम तो ज़माने को राह बन जाये
    पड़े निगाह तो बुझते दिये करे रौशन

    कहीं तो रात अंधेरी है दिन कुहासों भरा
    कहीं है रात भी रौशन हैं रतजगे रौशन
    in do she’ron par daad qubulen…

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