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T-20/55 आपकी याद लगातार सम्हाले हुए हैं -‘खुरशीद’ खैराड़ी

आपकी याद लगातार सम्हाले हुए हैं
दश्त में ज़ीनते-बाज़ार सम्हाले हुए हैं

एक मुद्दत से पलक पर नहीं लगती है पलक
मेरी आँखें शबे-बेदार सम्हाले हुए हैं

दर्द बख़्शे हैं हमें तूने सो करते हैं नज़्म
शायरी में तिरा इज़हार सम्हाले हुए हैं

यादे-पाज़ेब की ज़िंदाँ में यही सूरत है ?
”आप ज़ंजीर की झंकार सम्हाले हुए हैं”

हम अँधेरों में भटकते हैं अज़ल से फिर भी
दिल में ‘खुरशीद’ ज़ियाबार सम्हाले हुए हैं

‘खुरशीद’ खैराड़ी 09413408422

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7 comments on “T-20/55 आपकी याद लगातार सम्हाले हुए हैं -‘खुरशीद’ खैराड़ी

  1. bahut achchhi gazal hui hai Bhai ji badhai sweekaren,,,,,,,,,,,,,,,

  2. एक मुद्दत से पलक पर नहीं लगती है पलक
    मेरी आँखें शबे-बेदार सम्हाले हुए हैं

    Waah Waah…
    यादे-पाज़ेब की ज़िंदाँ में यही सूरत है ?
    ”आप ज़ंजीर की झंकार सम्हाले हुए हैं”
    kya kehne Khursheed Sahab ..behad umda ghazal …bharpoor daad qubule,n..
    -Kanha

  3. Khoobsurat gazal dhero,n daad

  4. ‘खुरशीद’ भाई

    एक मुद्दत से पलक पर नहीं लगती है पलक
    मेरी आँखें शबे-बेदार सम्हाले हुए हैं
    एक अच्छा शेर जिसमे जुबान भी है और ख़याल भी !

    यादे-पाज़ेब की ज़िंदाँ में यही सूरत है ?
    ”आप ज़ंजीर की झंकार सम्हाले हुए हैं”
    शानदार गिरह !
    उम्दा ग़ज़ल।

  5. आपकी याद लगातार सम्हाले हुए हैं
    दश्त में ज़ीनते-बाज़ार सम्हाले हुए हैं

    अहह ह दस्त में जीनते -बाजार , क्या बात है , सुभान अल्लाह। इस खूबसूरत मुख़्तसर सी ग़ज़ल पर ढेरों दाद कबूलें।
    नीरज

  6. आपकी याद लगातार सम्हाले हुए हैं
    दश्त में ज़ीनते-बाज़ार सम्हाले हुए हैं
    मतले की सिमली ख़ास है !! खुर्शीद भाई !! दश्त मे ज़ीनते बाज़ार .. गढन बहुत अपील कर रही है !!
    एक मुद्दत से पलक पर नहीं लगती है पलक
    मेरी आँखें शबे-बेदार सम्हाले हुए हैं
    जागती रते मेरी नींदे चुरा ले गईं हैं !! मर्कज़ ए ख्याल यहीं है शैर का –अब पस्मंज़र मे बहुत खूब उभरता है – शबखून –हिज़्रत – बीमारी – मौसम और गेम जानाँ –इसलिये शेर का अर्थ विस्फोट कारगर है !!
    दर्द बख़्शे हैं हमें तूने सो करते हैं नज़्म
    शायरी में तिरा इज़हार सम्हाले हुए हैं
    शाइरी की पहली शर्त तो दर्द ही है !! इसके बाद आशिकी- सब्र -वफा -दर्द -जुदाई –सहरा-सब धीरे धीरे धेरे आयेंगे और आप शीशागर हो जायेंगे !! वाह !!
    यादे-पाज़ेब की ज़िंदाँ में यही सूरत है ?
    ”आप ज़ंजीर की झंकार सम्हाले हुए हैं”
    नई गिरह है अच्छी है !!
    हम अँधेरों में भटकते हैं अज़ल से फिर भी
    दिल में ‘खुरशीद’ ज़ियाबार सम्हाले हुए हैं
    तख़्ल्लुस का अच्छा इस्तेमाल !!!
    ‘खुरशीद’ खैराड़ी भाई !! कम शेर कहे आपने लेकिन जितने कहे कामयाब कहे !! –मयंक

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