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T-20/49 आपके दर्द के दीनार संभाले हुए हैं-दिनेश नायडू

आपके दर्द के दीनार संभाले हुए हैं
कुछ नहीं बाक़ी सो नाचार संभाले हुए हैं

ज़िंदगी इतना हमें पीछे नहीं छोड़ कि हम
भागते-दौड़ते रफ़्तार संभाले हुए हैं

अब न थम पायेगा आहों का ये दरिया हमसे
कब से हम ज़ब्त की दीवार संभाले हुए हैं

फ़त्ह मुमकिन है कि इन लोगों के हाथ आये कि ये
अब भी टूटी हुई तलवार संभाले हुए हैं

ये फ़क़ीरी भी अजब चीज़ है दुनिया वालो
हम नहीं कुछ भी प दरबार संभाले हुए हैं

धीरे-धीरे ही सही रास्ता तय होगा मिरा
आबले, राह के सब ख़ार संभाले हुए हैं

इक तिरे ग़म से तसल्ली नहीं होती इसकी
ज़ह्न ने सैकड़ों आज़ार संभाले हुए हैं

लोग दब जायेंगे देखेंगे जो सीने की उठान
फूल से लोग भी कुहसार संभाले हुए हैं

दिनेश नायडू 09303985412

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8 comments on “T-20/49 आपके दर्द के दीनार संभाले हुए हैं-दिनेश नायडू

  1. ज़िंदगी इतना हमें पीछे नहीं छोड़ कि हम
    भागते-दौड़ते रफ़्तार संभाले हुए हैं
    wahh bhaiya kya behatreen she’r hai..murassa ghazal..daad qubule’n
    -kanha

  2. बहुत खूब दिनेश साहब, दाद कुबूल कीजिए

  3. आपके दर्द के दीनार संभाले हुए हैं
    कुछ नहीं बाक़ी सो नाचार संभाले हुए हैं
    दर्द के दीनार ?!! बहुत सुन्दर प्रयोग है!! बाकी, मुहब्बत के अंजाम पे शेर खडा है –मैयत और लौहे मजार के बीच का फासला बचा है !! खूब मतला कहा है दिनेश भई !! वाह !!!
    ज़िंदगी इतना हमें पीछे नहीं छोड़ कि हम
    भागते-दौड़ते रफ़्तार संभाले हुए हैं
    आज की तेज़ रफ्तार ज़िन्दगी पर खूब चस्पाँ होता है शेर –”भागते –दौडते” ने मंज़र को सजीव किया है !!!
    अब न थम पायेगा आहों का ये दरिया हमसे
    कब से हम ज़ब्त की दीवार संभाले हुए हैं
    अच्छी कहन है !! आँख से गिर कर अगर अश्क टूट गया तो शोले का शबनम का गुहर का नुकसान ज़िन्दगी को होता है !!! –इसलिये दर्द की सीमा रेखा पर बयान आ गया है !!!
    फ़त्ह मुमकिन है कि इन लोगों के हाथ आये कि ये
    अब भी टूटी हुई तलवार संभाले हुए हैं
    जिनके हौसले नहीं टूटे वही जीतेंगे !! Rocky– the ultimate warrior !!!
    ये फ़क़ीरी भी अजब चीज़ है दुनिया वालो
    हम नहीं कुछ भी प दरबार संभाले हुए हैं
    ये किस जगह का चित्र है ??!! मैं भी ऐसे जगह बसना चाहता हूँ !!! विवेकानन्द कह गये थे कि जब तक फकीर राजा और राजा फकीर नही होंगे तब तक देश का निर्माण नहीं होगा !! बडी उमीद का शेर है ये !!!
    धीरे-धीरे ही सही रास्ता तय होगा मिरा
    आबले, राह के सब ख़ार संभाले हुए हैं
    अच्छी सिमिली है – इन आबलो से पाँव के घबरा गया था मैं // जी खुश हुआ है राह को पुरख़ार देखकर –ग़ालिब !!!
    इक तिरे ग़म से तसल्ली नहीं होती इसकी
    ज़ह्न ने सैकड़ों आज़ार संभाले हुए हैं
    व्यावहरिक शेर है !!! एक शेर –
    कोई महमिल नशीं क्यों शाद या नाशाद होता है
    ग़ुबारे कैस खुद उठता है खुद बर्बाद होता है
    लोग दब जायेंगे देखेंगे जो सीने की उठान
    फूल से लोग भी कुहसार संभाले हुए हैं
    साफ साफ बताओ मियां इस शेर के मतलब क्या हैं !! फिलहाल हम इसे ऐसे पढ रहे हैं — लोग दब जायेंगे देखेंगे जो सीने की उठान
    लोग बस मुँह मे अभी लार सम्हाले हुये हैं (हा ..SSSS)
    अगर समाजवादी तत्व है इस शेर मे तब बात दीगर है !!!
    दिनेश भाई !! बहुत सुन्दर –ग़ज़ल पर दाद !!! –मयंक

  4. ज़िंदगी इतना हमें पीछे नहीं छोड़ कि हम
    भागते-दौड़ते रफ़्तार संभाले हुए हैं

    ये फ़क़ीरी भी अजब चीज़ है दुनिया वालो
    हम नहीं कुछ भी प दरबार संभाले हुए हैं

    लोग दब जायेंगे देखेंगे जो सीने की उठान
    फूल से लोग भी कुहसार संभाले हुए हैं

    ज़िंदाबाद दिनेश जी ज़िंदाबाद क्या जबरदस्त शेर कहें है वाह !!!!! कुछ काफिये तो इस तरही में पहली इस्तेमाल हुए हैं। आपके हुनर की दाद देता हूँ – कमाल किया है आपने। आपकी ग़ज़ल का आखरी शेर अपने साथ लिए जा रहा हूँ , ऐसे शेर रोज रोज नहीं होते।

  5. अब न थम पायेगा आहों का ये दरिया हमसे
    कब से हम ज़ब्त की दीवार संभाले हुए हैं
    आदरणीय दिनेश सा. उम्दा ग़ज़ल हुई है ,ज़ब्त की दीवार अच्छा बिम्ब है |दिली मुबारकबाद कबूल फरमाएं |

  6. ज़िंदगी इतना हमें पीछे नहीं छोड़ कि हम
    भागते-दौड़ते रफ़्तार संभाले हुए हैं

    क्या बात है, दाद कबूल करें….

  7. ज़िंदगी इतना हमें पीछे नहीं छोड़ कि हम
    भागते-दौड़ते रफ़्तार संभाले हुए हैं…. kamaal ka she’r hua hai pyaare.. waah waah

  8. क्या कहने दिनेश भाई
    देर से आई इस बार आपकी गज़ल पर उतनी ही खूबसूरत आई
    पूरी की पूरी ग़ज़ल उम्दा है मेरे भाई

    दिली मुबारकबाद

    आलोक

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