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T-20/41 इक अलग क़िस्म का किरदार सँभाले हुए हैं -हुमा कानपुरी

इक अलग क़िस्म का किरदार सँभाले हुए हैं
मज़हबी लोग जो दीवार सँभाले हुए हैं

शौक़ तो उनका भी है अम्न की बातें करना
हाँ, मगर हाथ में तलवार सँभाले हुए हैं

वो हमें दे के चला जाता है गाली हर दिन
फिर भी हम हैं कि जो गुफ़तार सँभाले हुए हैं

जैसे विरसे में बुज़ुर्गों से मिली हो दौलत
यूँ गुनाहों को गुनहगार सँभाले हुए हैं.

सबके बस का तो नहीं है कि सियासत कर लें
आप सरकार हैं, सरकार सँभाले हुए हैं

ख़ामुशी देख के बच्चों की सभी ने पूछा
कैसे घुँघरू हैं जो झंकार सँभाले हुए हैं

हम न होते जो ‘हुमा’ दिल न कहीं का रहता
इस शिफ़ाख़ाने को बीमार सँभाले हुए हैं

हुमा कानपुरी 09893482562 /08989649454

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7 comments on “T-20/41 इक अलग क़िस्म का किरदार सँभाले हुए हैं -हुमा कानपुरी

  1. इक अलग क़िस्म का किरदार सँभाले हुए हैं
    मज़हबी लोग जो दीवार सँभाले हुए हैं
    हुमा साहब !! स्वागत है !!! मतले का सच तस्लीम ! आपने अपना व्यू नही दिया है लेकिन दीवार लफ़्ज़ शेर का मफ्हूम खोल रहा है और पढने वाले को दलील पेश करने का मौका भी दे रहा है !! बैलेंस्ड बात है मतले मे !!
    शौक़ तो उनका भी है अम्न की बातें करना
    हाँ, मगर हाथ में तलवार सँभाले हुए हैं
    ये तस्वीर हमारे युग की देन है !! शब्द और कर्म का विलोमानुपत कमोबेश हर व्यक्तित्व मे दीख पडता है –लोगो ने भाषा तो बहुत उच्चकोटि की सेख ली है ऐस लगता है कि उनकी वैचारिकता के बल पर हे समाज चल रहा है जब्कि कर्म के धरातल पर वो निकृष्ट प्रतीत होते हैं अच्छा कहा है !!!
    वो हमें दे के चला जाता है गाली हर दिन
    फिर भी हम हैं कि जो गुफ़तार सँभाले हुए हैं
    हम अपने संस्कार से बँधे है और वो अपने !!!
    जैसे विरसे में बुज़ुर्गों से मिली हो दौलत
    यूँ गुनाहों को गुनहगार सँभाले हुए हैं.
    हाँ !! अपने कानपुर मे तो शौक है इस बात का लोगों को –अपने सामाजिक सरोकार का चर्चा करते हुये लोग जब बताते हैं तो कहते हैं कि – बबन भाई का नाम सुना है जिनपर 40 मर्डर केस हैं आप कहेंगे हाँ तो !! सर तान कर बोलेंगे –वो मेरे कज़िन हैं !!!
    सबके बस का तो नहीं है कि सियासत कर लें
    आप सरकार हैं, सरकार सँभाले हुए हैं
    राजनीतिज्ञो के बारे मे एक ख्याल ये है कि –वो स्वार्थी लोग हैं जो समाज के हितों का बलिदान अपने निजी स्वार्थो के लिये बदे आराम से कर देते हैं !! वैसे सच ये है कि वो समर्थ लोग होटल है जिनमे सर्वाइवल ओफ फिटेस्ट के नियमनुसार सबसे ऊपर रहने की क्षमता होती है !! भावना कई लोगों की होती है कि उनके जैसे सरसब्ज़ बने लेकिन यहाँ जीत सिर्फ और सिर्फ सामर्थ्यवान की होती है –इसलिये जो सरकार हैं !! वो ही सरकार सम्हालेंगे !!! बाकी सब चादर ए दरबार ही सम्हालेंगे !!!
    ख़ामुशी देख के बच्चों की सभी ने पूछा
    कैसे घुँघरू हैं जो झंकार सँभाले हुए हैं
    सानी मिसरे की सिमिली अच्छी है !!!
    हम न होते जो ‘हुमा’ दिल न कहीं का रहता
    इस शिफ़ाख़ाने को बीमार सँभाले हुए हैं
    इस शेर मे भी गिरह खूबसूरत है दोनो मिसरो का रब्त अपील करता है !!!
    हुमा कानपुरी साहब !! आपको पोर्तल पर देख कर खुशी मिली और आश्वस्ति भी –मयंक

  2. हुमा जी

    वो हमें दे के चला जाता है गाली हर दिन
    फिर भी हम हैं कि जो गुफ़तार सँभाले हुए हैं
    यही सलीका हम हिन्दुस्तानिओं की पहचान बन चुका

    ख़ामुशी देख के बच्चों की सभी ने पूछा
    कैसे घुँघरू हैं जो झंकार सँभाले हुए हैं
    कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पर ये शेर बहुत कुछ कह जाता है। । बधाई

  3. Bahut achhii gazal huii hai Huma ji
    Dher sari daad

    Regards
    Alok mishra

  4. हर शे’र बहुत अच्‍छा। क्‍या ही उम्‍दा ग़ज़ल हुई है आदरणीया हुमा जी।
    बधाई और दाद स्‍वीकार करें।
    सादर
    नवनीत

  5. ख़ामुशी देख के बच्चों की सभी ने पूछा
    कैसे घुँघरू हैं जो झंकार सँभाले हुए हैं

    बेहतरीन शेर और लाजवाब ग़ज़ल। दाद कबूल करें।

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