4 टिप्पणियाँ

T-20/37 चुटकुलेबाज़ तो बाज़ार सँभाले हुए हैं-आदिक भारती

चुटकुलेबाज़ तो बाज़ार सँभाले हुए हैं
और हम सरफिरे दस्तार सँभाले हुए हैं

अह्ले-किरदार तो किरदार सँभाले हुए हैं
और सियासत को रियाकार सँभाले हुए हैं

अब चुनाव आये तो इस पर ही रखेंगे ऊँगली
एक मुद्दत से हम इनकार सँभाले हुए हैं

लीडरों की कोई करतूत छुपी रह न सके
मोर्चा मीडिया अख़बार सँभाले हुए हैं

इन्तिज़ाम आज हिफ़ाज़त के बहुत हैं पुख़्ता
मुल्क की सरहदें राडार सँभाले हुए हैं

ग़ज़ल इस दौर में रक़्क़ासा हुई जाती है
और कुछ मसख़रे दरबार सँभाले हुए हैं

लफ़्ज़ उतरने लगे अशआर में कैसे कैसे
और हम अब भी अलंकार सँभाले हुए हैं

आदिक भारती 09255277788

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4 comments on “T-20/37 चुटकुलेबाज़ तो बाज़ार सँभाले हुए हैं-आदिक भारती

  1. Vyawastha par chot karti huii ak umda gazal
    kaii ash-aar pursar aur bejod

    dili daad qubul keejiye Adik bharti Sahab

    regards

  2. अहले नज़र तो अहले नज़र ही होते हैं जनाब !!! आपका नहीं है कोई जवाब !! आपकी आँखों मे रावी है और कलम की रवानी मे चनाब !!! ये आकाशवाणी है और अब आप जनाब मुहत्तरम आदिक भारती साहब से दौर का दस्तूर अपनी अना की यलगार और आज के समाचार सुनिये !! इज़हार तो शाइराना ही होगा क्योंकि वो जो कहते हैं उसमे संगीत और सुधा बरसना लाज़मी है क्योंकि उनके शिफाखाने से कई मरीज़ चारागर बन कर निकले हैं !! ( आदिक साहब सादर अभिवादन !!!–खाकसार )
    चुटकुलेबाज़ तो बाज़ार सँभाले हुए हैं
    और हम सरफिरे दस्तार सँभाले हुए हैं
    वैसे आज तीन ही लफ़्ज़ अवाम की दरकार हैं –इंतरटेन्मेण्ट- इंतरटेन्मेण्ट- इंतरटेन्मेण्ट !!! इसलिये चुतकुलेबाज आज महौल पर हावी है !! लालू दिग्विजय और बेनी जैसों के बयाण टी वी पर !! संजीदा बहसो के ऊपर हैं !!! –कपिल और राजू श्रीवास्तव माहिर अभिनेताओं को मात देते है !! तो गज़ल मे जहाँ सामईन हैं वहाँ अपवाद नहीं होगा !! हाँ हम जैसे कुछ सरफिरे मीर का दरबार ज़रूर पसन्द करते है !! वाह वाह !! तात !! वाह !!
    अह्ले-किरदार तो किरदार सँभाले हुए हैं
    और सियासत को रियाकार सँभाले हुए हैं
    ऊपर कुछ ज़ियादा लिख दिया शायद !! उसी को रिपीट कर देते हैं लालू दिग्विजय और बेनी जैसों के बयाण टी वी पर !! संजीदा बहसो के ऊपर हैं !!!
    अब चुनाव आये तो इस पर ही रखेंगे ऊँगली
    एक मुद्दत से हम इनकार सँभाले हुए हैं
    5 बरस बाद बहुत पानी गंगा मे बह चुका होगा मालिक !!!और बहुत पानी कश्मीर मे भर चुका होगा !!!
    लीडरों की कोई करतूत छुपी रह न सके
    मोर्चा मीडिया अख़बार सँभाले हुए हैं
    नई !!!!!!!!!!!लीडरो की कोई करतूत दिखाई न पडे … आप हुड्डा से निजी सम्बन्धो के चलते तो ये नहीं कह रहे !! ( हा हा हा !!! खैर मेरी मसखरी अप्नी जगह !! लेकिन आपके शेर से हौसला और विश्वास मजबूत हुआ हमारा सबसे बडा अस्त्र अब मीडिया है )
    इन्तिज़ाम आज हिफ़ाज़त के बहुत हैं पुख़्ता
    मुल्क की सरहदें राडार सँभाले हुए हैं
    उस मुल्क की सरह्द को कोई छू नही सकता
    जिस मुल्क की स्रहद की निगहबान हैं आँखे !!!
    ग़ज़ल इस दौर में रक़्क़ासा हुई जाती है
    और कुछ मसख़रे दरबार सँभाले हुए हैं
    मैं भी आपके कान मे चुपके से बता दूँ कि मीर के दरबार मे बीरबल जैसी हैसियत चाहता हूँ !वगर्ना इस भाषा शैली पर उतरना अपना शेवा नही –अब ये पा रहा हूँ कि कम्पटीशन बहुत है इस फील्ड मे !!!
    लफ़्ज़ उतरने लगे अशआर में कैसे कैसे
    और हम अब भी अलंकार सँभाले हुए हैं
    काफिये पर दाद !! और आभार !!! आप हमारे आदरनेय और रहबर है आदिक साहब !! आपके पस्थिति हमें बहुत बल देती है अर्से बाद आपको यहाँ देखकर बहुत तस्ल्ली मिली बहुत सुकून मिला और बहुत गर्व भी हुआ !! सादर –मयंक

  3. ग़ज़ल इस दौर में रक़्क़ासा हुई जाती है
    और कुछ मसख़रे दरबार सँभाले हुए हैं

    लफ़्ज़ उतरने लगे अशआर में कैसे कैसे
    और हम अब भी अलंकार सँभाले हुए हैं

    वाह वाह वाह आज के सूरते हालात को तंज की चाशनी में भिगो कर जो अशआर आपने पेश किये वो कमाल हैं। ढेरों दाद कबूलें।

  4. अच्‍छी ग़ज़ल हुई। दाद कबूल करें।
    सादर
    नवनीत

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