23 टिप्पणियाँ

T-20/32 मौसमे-हिज्र का हर वार संभाले हुए हैं-स्वप्निल तिवारी “आतिश”

मौसमे-हिज्र का हर वार संभाले हुए हैं
हम तिरी याद की बौछार संभाले हुए हैं

दश्त के हो चुके सारे कि जो दीवाने थे
हुस्ने-जानाँ को तो हुशियार संभाले हुए हैं

तुम गुज़र सकते हो कतरा के सफ़ीने वालो
हम तो दरिया हैं सो मँझधार संभाले हुए हैं

गिर के टूटेगी अभी एक छनाके के साथ
इक हंसी जिसको ये रुख़सार संभाले हुए हैं

तंग हैं इस लिये बाज़ार में जाते ही नहीं
हाय वो लोग जो बाज़ार संभाले हुए हैं !!!

इश्क़ और मैं तो हमआहंग हैं कब से कि मुझे
उसकी ऊँगली से जुड़े तार संभाले हुए हैं

आपको क़ैद का जो वह्म हुआ है हज़रत
‘आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं’

पांव धरते ही ज़मीं सब्ज़ हुई जाती है
आप बरसात के आसार संभाले हुए हैं?

नींव से शोर सा उठता है इक ‘हैया हो’ का
ये वो साये हैं जो दीवार संभाले हुए हैं

वो किसी और फ़साने ही से हैं वाबस्ता
मुझ-कहानी को जो किरदार संभाले हुए हैं

इक ख़ज़ाना सा तहे-आब दबा है जानां
दीदा-ए-तर तिरा दीदार संभाले हुए हैं

स्वप्निल तिवारी “आतिश” 08879464730

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

23 comments on “T-20/32 मौसमे-हिज्र का हर वार संभाले हुए हैं-स्वप्निल तिवारी “आतिश”

  1. behad umdaa ghazal hui hai dada..har baar ki tarah behatreen ash’aar

    तुम गुज़र सकते हो कतरा के सफ़ीने वालो
    हम तो दरिया हैं सो मँझधार संभाले हुए हैं

    lajawab she’r …jitni tareef ki jaye kam hai..waahhh

    गिर के टूटेगी अभी एक छनाके के साथ
    इक हंसी जिसको ये रुख़सार संभाले हुए हैं

    Apko Baya’n karta hua she’r..ahhaa

    dher sari daad..sadar pranam
    -Kanha

  2. Swapnil ji
    sorry for delayed comment. in fact i read this ghazal at least four-five times before giving this comment. undoubtly its an one of the finest ghazal of this tarahi.

    तुम गुज़र सकते हो कतरा के सफ़ीने वालो
    हम तो दरिया हैं सो मँझधार संभाले हुए हैं
    what a style of expressions …….lovely!!!!

    गिर के टूटेगी अभी एक छनाके के साथ
    इक हंसी जिसको ये रुख़सार संभाले हुए हैं
    as i can remember in another ghazal u have already used “छनाक” …. but now its sound is quite different from earlier one. Great !!!!

    Daad kubooleN bhai

  3. मौसमे-हिज्र का हर वार संभाले हुए हैं
    हम तिरी याद की बौछार संभाले हुए हैं
    इश्क़ और मैं तो हमआहंग हैं कब से कि मुझे
    उसकी ऊँगली से जुड़े तार संभाले हुए हैं
    आदरणीय आतिश साहब सभी अशहार लासानी हैं ,दिलिदाद कबूल फरमावें |

  4. मौसमे-हिज्र का हर वार संभाले हुए हैं
    हम तिरी याद की बौछार संभाले हुए हैं
    एक अर्से से पिक्चर पोर्ट्रेट वली शाइरी नही पढी –चलो आज तमन्ना पूरी हो गई !!! क्या मतला कहा है नर्म नाज़ुक ऐसा लगा कि मैं भीग गया हूँ !! भीग गया हूँ यकीनन !! वाह स्वप्निल वाह !!!
    दश्त के हो चुके सारे कि जो दीवाने थे
    हुस्ने-जानाँ को तो हुशियार संभाले हुए हैं
    क्या खूब क्या खूब !!! गेम जानँ हो या गेम दौराँ –दोनो के लिये शहाद्त देने वले कोई और हैं और –दोनो के उपभोक्ता और ही है बहुत्खूब !!
    तुम गुज़र सकते हो कतरा के सफ़ीने वालो
    हम तो दरिया हैं सो मँझधार संभाले हुए हैं
    कितना खूबसूरत शिल्प है –हम तो दरिया है !! क्या मंज़र से बात निकाली है स्वनिल !! खूब से खूबतर की तुमहारी जुस्तजू ने बहुत प्रचलित बिम्बोन से भी क्या क्या नये अर्थ और चित्र ढूंढ निकाले है कमाल है !!
    गिर के टूटेगी अभी एक छनाके के साथ
    इक हंसी जिसको ये रुख़सार संभाले हुए हैं
    गुलाब रंग को तेरे कपास होना पडे
    मत इतना हँस कि तुझे देवदास होना पडे –मुनव्वर रा अना
    तंग हैं इस लिये बाज़ार में जाते ही नहीं
    हाय वो लोग जो बाज़ार संभाले हुए हैं !!!
    शोषण की इंतेहा के बाद ऐसा ही होता है इसलिये दुनिया के मजदूरोण या दुनिया के मजबूरो एक हो जाओ लद कजाओ !! तुमहारे पस अब खोने के लिये कुछ भी नही !! लेकिन बज़ार इन्ही के खून से रंगीन है और इन्ही के पसीने से आबाद है वाह !!!
    इश्क़ और मैं तो हमआहंग हैं कब से कि मुझे
    उसकी ऊँगली से जुड़े तार संभाले हुए हैं
    रूमान रूमान !! दिलकश है !!!!
    आपको क़ैद का जो वह्म हुआ है हज़रत
    ‘आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं’
    नई ताज़ी और तार्किक गिरह है !!!!
    पांव धरते ही ज़मीं सब्ज़ हुई जाती है
    आप बरसात के आसार संभाले हुए हैं?
    साने मिसरे मे सवाल है!! जो कि जाइज है !!!
    नींव से शोर सा उठता है इक ‘हैया हो’ का
    ये वो साये हैं जो दीवार संभाले हुए हैं
    मुझे बाज़ार वाले काफिये की प्रीतिध्वनि दीख पडी इस शेर मे !!!!
    वो किसी और फ़साने ही से हैं वाबस्ता
    मुझ-कहानी को जो किरदार संभाले हुए हैं
    सहेह बात !! कौन किसे समझ पाया आज तक !! अपने अपने ज़र्फ तक ही तो बीनाई है सभी की इसलिये जो समझा जाता है वो अमूमन होता नही !!! खूब कहा दोस्त !!!
    इक ख़ज़ाना सा तहे-आब दबा है जानां
    दीदा-ए-तर तिरा दीदार संभाले हुए हैं
    तहे आब खजाना बहुत सुन्दर बिम्ब है !!! उजली नर्म नाज़ुक और बेहतरीन ग़ज़ल स्वप्निल हमेशा की तरह आबाद रहिये –इसलिये कि आपके कारन तो हम भी आबाद है —मयंक

  5. गिर के टूटेगी अभी एक छनाके के साथ
    इक हंसी जिसको ये रुख़सार संभाले हुए हैं

    इक ख़ज़ाना सा तहे-आब दबा है जानां
    दीदा-ए-तर तिरा दीदार संभाले हुए हैं

    अहा हा हा हा हा इस छनाके पे हम तो कुर्बान हुए , सुभान अल्लाह ,एक आध शेर हो तो माना जा सकता है पर जिस ग़ज़ल के सारे शेर एक से बढ़ के एक हों तो ये सोच के हैरत होती है कि ये करिश्मा हुआ तो हुआ कैसे ?भाई स्वप्निल तुम्हारी ग़ज़ल की तारीफ़ के लिए मुझे सही सही लफ्ज़ नहीं मिल पा रहे आप थोड़े को बहुत जाने और मेरी दिली दाद कबूल करें। मेरी दुआएं आपके साथ हैं।

    नीरज

  6. स्वप्निल भाई इस बार आपकी कहन में एक अलग सी तराश महसूस हो रही है मुझे. मतला बहुत-बहुत अच्छा लगा. भरपूर दाद भाई!

  7. यह है स्‍वप्निल ग़ज़ल।
    इससे जि़यादा क्‍या कहूं भाई।
    वाह…वाह…वाह…वाह.।
    नवनीत

  8. खूबसूरत ग़ज़ल हुई है स्वप्निल साहब। दिली दाद कुबूल करें।

  9. स्वप्निल ठीक ग़ज़ल कही है. आपकी अपनी मुहर का शेर मज़ेदार लगा.

    गिर के टूटेगी अभी एक छनाके के साथ
    इक हंसी जिसको ये रुख़सार संभाले हुए हैं

    इश्क़ और मैं तो हमआहंग हैं कब से कि मुझे
    उसकी ऊँगली से जुड़े तार संभाले हुए हैं

    नींव से शोर सा उठता है इक ‘हैया हो’ का
    ये वो साये हैं जो दीवार संभाले हुए हैं

    और ये शेर तो ग़ज़ल में कुछ भी न होता तो भी ग़ज़ल का पल्ला भारी कर देता, बहुत उम्दा कहा. वाह वाह

    इक ख़ज़ाना सा तहे-आब दबा है जानां
    दीदा-ए-तर तिरा दीदार संभाले हुए हैं

  10. आह…..गज़ल भी ये
    जैसे किसी मौसम का एक ताज़ा झोंका हो
    नये ख्यालों के फुहारों साथ
    वाह्ह वाह्ह्ह

    दिली मुबारकबाद भैया

  11. Reblogged this on oshriradhekrishnabole and commented:
    कवि ने भावनाओं को प्रकृति के रंग में पिरो दिया हो जैसे,,

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: