9 टिप्पणियाँ

T-20/22 मुनहनी जिस्म है कुहसार संभाले हुए हैं-आसिफ़ ‘अमान’

मुनहनी जिस्म है कुहसार संभाले हुए हैं
हम भी हर हाल में किरदार संभाले हुए हैं

अब न उनको है तवक़्क़ो न हमें कुछ उम्मीद
दोनों इक ख़ाब को बेकार संभाले हुए हैं

इसको होना ही है इक़रार में तब्दील इक दिन
और हम किसलिये इनकार संभाले हुए हैं

लाओ आफ़ात का रुख़ मोड़ दो मेरी जानिब
मेरे, सैलाब ये सौ बार संभाले हुए हैं

बात ये कुछ नहीं ग़ज़लों को दिया था मेयार
बात तो ये है कि मेयार संभाले हुए हैं

जीत वो भी तो संभाले हैं जो हमने दी थी
यूं नहीं है कि हमीं हार संभाले हुए हैं

आप आवाज़, मिरी साँसों की सुन पाइएगा ?
‘आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं’

इन्क़लाब अब तो ‘अमान’ आयेगा तय है साहब
हम क़लम और वो तलवार संभाले हुए हैं

आसिफ़ ‘अमान’ 08233418156

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

9 comments on “T-20/22 मुनहनी जिस्म है कुहसार संभाले हुए हैं-आसिफ़ ‘अमान’

  1. अब न उनको है तवक़्क़ो न हमें कुछ उम्मीद
    दोनों इक ख़ाब को बेकार संभाले हुए हैं

    इसको होना ही है इक़रार में तब्दील इक दिन
    और हम किसलिये इनकार संभाले हुए हैं..wahhh..kya badhiya ghazal hai Asif bhai..wahh waahh..dher sari daad
    -Kanha

  2. लाओ आफ़ात का रुख़ मोड़ दो मेरी जानिब
    मेरे, सैलाब ये सौ बार संभाले हुए हैं

    बात ये कुछ नहीं ग़ज़लों को दिया था मेयार
    बात तो ये है कि मेयार संभाले हुए हैं
    आदरणीय ,आसिफ़ साहब सभी अशहार लासानी हैं |उम्दा ग़ज़ल पर ढेरों दाद कबूल फरमावें |

  3. आसिफ़ भाई।
    आपकी ग़ज़ल का इंतज़ार हमेशा रहता है।
    इस बार भी भरपूर ग़ज़ल कही है आपने।
    बहुत बधाई।
    दिल से दाद।

    शुक्रिया
    नवनीत

  4. मुनहनी जिस्म है कुहसार संभाले हुए हैं
    हम भी हर हाल में किरदार संभाले हुए हैं
    वाह आसिफ भाई वाह !! पहली गेन्द पर बाउंड्री –क्या आगज़ है गज़ल का !! मतले पर दाद दर !! दाद !!
    अब न उनको है तवक़्क़ो न हमें कुछ उम्मीद
    दोनों इक ख़ाब को बेकार संभाले हुए हैं
    अब न वो तू है न मैं हूँ न वो माजी है फराज़
    जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबो मे मिले –फराज़
    इसको होना ही है इक़रार में तब्दील इक दिन
    और हम किसलिये इनकार संभाले हुए हैं
    इंतज़ार इश्क मे रंगत बदल देता है और गौर कीजिये तो पत्थर भी आइना हो जाता है –बेहतरीन शेर कहा है !!
    लाओ आफ़ात का रुख़ मोड़ दो मेरी जानिब
    मेरे, सैलाब ये सौ बार संभाले हुए हैं
    अना और यकीन की बुलन्दी पर शेर खडा है –बहुत खूब !!!
    बात ये कुछ नहीं ग़ज़लों को दिया था मेयार
    बात तो ये है कि मेयार संभाले हुए हैं
    बुलन्दी पर काइम रहना आसान नही !!!
    जीत वो भी तो संभाले हैं जो हमने दी थी
    यूं नहीं है कि हमीं हार संभाले हुए हैं
    हार जाना बडप्पन है जब बच्चे आप्से मुखालिफ हो !!!
    आप आवाज़, मिरी साँसों की सुन पाइएगा ?
    ‘आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं’
    येस !!
    इन्क़लाब अब तो ‘अमान’ आयेगा तय है साहब
    हम क़लम और वो तलवार संभाले हुए हैं
    बहुत उम्दा शेर कहा है !! कलम की ताकत बयाँ हो रही है बयान मे शेर मे और पूरी ग़ज़ल मे !!
    आसिफ़ ‘अमान’ भाई !! बहुत खूब !! मुबारकबाद कुबूल कीजिये –मयंक

  5. इसको होना ही है इक़रार में तब्दील इक दिन
    और हम किसलिये इनकार संभाले हुए हैं

    जियो प्यारे..ये वही मसल हुई ” आसरा आसरे वालों ने लगा रक्खा है ” मज़ाक अपनी जगह पूरी ग़ज़ल मुरस्सा, बढ़िया, जीते रहिये

  6. एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिये दिली मुबारकबाद कबूल करें !

    लाओ आफ़ात का रूख़….

    वाह !!

  7. आसिफ साहब
    नमस्कार

    अब न उनको है तवक़्क़ो न हमें कुछ उम्मीद
    दोनों इक ख़ाब को बेकार संभाले हुए हैं
    अच्छा शेर कहा है ///////
    अच्छी ग़ज़ल भरपूर दाद कुबूलें दोस्त !!!

  8. Asif bhaii
    bahut umda gazal huii hai

    gazal bhi umda hai aur tarhi misre par girah bhi shandaar hai

    is shandar gazal k liye dheron badhaii

    regards
    Alok

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: