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T-20/16 बूढ़े कन्धों पे जो घर-बार संभाले हुए हैं-ख़ुर्शीद अनवर “ख़ुर्शीद”

बूढ़े कन्धों पे जो घर-बार संभाले हुए हैं
यूँ समझ लीजिये संसार संभाले हुए हैं

ग़र्क़ हो जाती कभी की ये हमारी हस्ती
अहले-ईमां हैं जो पतवार संभाले हुए हैं

दर्स देते हैं अमां का जो ज़माने भर में
अपने हाथों में वो तलवार संभाले हुए हैं

हर तरफ़ भीड़ है शैतानों की फिर भी हमलोग
ऐसे माहौल में किरदार संभाले हुए हैं

आपसी फूट का देखा ये नतीजा “ख़ुर्शीद”
अपनी कुर्सी थी जो अग़ियार संभाले हुए हैं

ख़ुर्शीद अनवर “ख़ुर्शीद” 08253051309

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8 comments on “T-20/16 बूढ़े कन्धों पे जो घर-बार संभाले हुए हैं-ख़ुर्शीद अनवर “ख़ुर्शीद”

  1. बूढ़े कन्धों पे जो घर-बार संभाले हुए हैं
    यूँ समझ लीजिये संसार संभाले हुए हैं
    जो लोग जीवन का सम्मान करते हैं और जीते है और जीने देते है बही दुनिया चला रहे है अपने दायित्वो को कष्टपूर्वक सहने और निभाने वाले –मतला तस्लीम !!!
    ग़र्क़ हो जाती कभी की ये हमारी हस्ती
    अहले-ईमां हैं जो पतवार संभाले हुए हैं
    कुछ शेद मतले का है इस शेर मे गो कि ज़ाविया मुख्तलिफ है अर अच्छा है !!!
    दर्स देते हैं अमां का जो ज़माने भर में
    अपने हाथों में वो तलवार संभाले हुए हैं
    आज तो बेशतर मंज़र ऐसे ही है
    हर तरफ़ भीड़ है शैतानों की फिर भी हमलोग
    ऐसे माहौल में किरदार संभाले हुए हैं
    बहुत रिपीट हुआ है ये ख्याल !!! इस ज़मीन पर उतरता है –किरदार सम्हाले हुये है !!
    आपसी फूट का देखा ये नतीजा “ख़ुर्शीद”
    अपनी कुर्सी थी जो अग़ियार संभाले हुए हैं
    अलग और नया शेर अगियार पर कितने शेर बान्धे गये है इस तरही मे देखना होगा !!!
    ख़ुर्शीद अनवर “ख़ुर्शीद” साहब –दाद कुबूल कीजिये !! –मयंक

  2. Khursheed sahab … Daad qubool farmaayein …. Gazal bahut pasand aayi 🙂

  3. ख़ुर्शीद साहब
    नमस्कार

    तरह मिसरा कहीं रह सा गया है…. ग़ज़ल पर दाद !!!!

  4. जनाब ख़ुर्शीद अनवर “ख़ुर्शीद” साहब। ग़ज़ल के लिए दाद स्‍वीकार करें।
    सादर
    नवनीत

  5. ग़र्क़ हो जाती कभी की ये हमारी हस्ती
    अहले-ईमां हैं जो पतवार संभाले हुए हैं WAAH KHURSHEED SAHAB, ”MUBAARAKBAAD”

  6. ख़ुर्शीद साहब लफ्ज़ की महफ़िल आपकी ही महफ़िल है. आप तशरीफ़ लाये इस कृपा के लिये आपका आभारी हूँ. ग़ज़ल के लिए भी दाद स्वीकार कीजिये.

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