10 Comments

T-20/15 जैसे बाज़ार ख़रीदार संभाले हुए हैं-समर कबीर

जैसे बाज़ार ख़रीदार संभाले हुए हैं
तेरे दोज़ख़ को गुनहगार संभाले हुए हैं

उनकी तौक़ीर करो लायक़े-तहसीन हैं वो
ऐसे हालात में किरदार संभाले हुए हैं

पहले इस बात को हम लोग उलट कहते थे
अब तबीबों को ये बीमार संभाले हुए हैं

हमसे जैसे भी बना आज तलक तो हम लोग
अपनी तहज़ीब का मेयार संभाले हुए हैं

कोशिशें लाख हुईं ख़त्म न कर पाया कोई
इस ग़रीबी को ये ज़रदार संभाले हुए हैं

चाँद लम्हों के लिए हमको मिला था जो कभी
आज तक हम वो तिरा प्यार संभाले हुए हैं

ज़िन्दगी क्या है इसे सोच के देखो यारो
एक ड्रामा है अदाकार संभाले हुए हैं

अर्श तक क्यों नहीं जाती है गरीबों की सदा
आसमां भी क्या ज़मींदार संभाले हुए हैं

समर कबीर 09753845522

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

10 comments on “T-20/15 जैसे बाज़ार ख़रीदार संभाले हुए हैं-समर कबीर

  1. waaaaah, kya baat hai, apne waalid ka naam yun hi raushan karte rahiye, jeete rahiye, salamat rahiye

  2. समर कबीर साहब !! सीधे सटीक और असरदार बयान !! ज़बान की आसानी कहन को लासानी कर रही है !!
    जैसे बाज़ार ख़रीदार संभाले हुए हैं
    तेरे दोज़ख़ को गुनहगार संभाले हुए हैं
    एक कदवा सच है दुनिया के लिये !!
    उनकी तौक़ीर करो लायक़े-तहसीन हैं वो
    ऐसे हालात में किरदार संभाले हुए हैं
    इस ख्याल पर कई मोहतरम कह चुके है इस तरही मे –ये ख्याल अच्छा है !!!
    पहले इस बात को हम लोग उलट कहते थे
    अब तबीबों को ये बीमार संभाले हुए हैं
    यकीनन तबीब बीमारो और बीमरियो के चलते ही आबाद हैं !!!
    हमसे जैसे भी बना आज तलक तो हम लोग
    अपनी तहज़ीब का मेयार संभाले हुए हैं
    ज़हीन लोग ऐसे ही होते है –किसी बडे साहित्यकार का एक आलोचक था –एक बार किसी गली मे उनसे टकरा गया –तो बोला कि मैं मूर्खो को रास्ता नही देता !! उन अबदे साहियकार ने किनारे हतते हुये कहा –लेकिन मै दे देता हूँ –तहज़ीब का मेयार सम्हालना बदी बात है !!!
    कोशिशें लाख हुईं ख़त्म न कर पाया कोई
    इस ग़रीबी को ये ज़रदार संभाले हुए हैं
    तंज़ है और खूब है !!!
    चाँद लम्हों के लिए हमको मिला था जो कभी
    आज तक हम वो तिरा प्यार संभाले हुए हैं
    रूमान का अच्छा शेर कहा है
    ज़िन्दगी क्या है इसे सोच के देखो यारो
    एक ड्रामा है अदाकार संभाले हुए हैं
    शेक्सपियर का बयान याद आ रहा है – world is a stage !! everyone is playing his part where mine is a sad one !!
    अर्श तक क्यों नहीं जाती है गरीबों की सदा
    आसमां भी क्या ज़मींदार संभाले हुए हैं
    कोई रहता है आसमान मे क्या ???!!!
    समर कबीर साहब ग़ज़ल पर दाद !! –मयंक

  3. wah kya gazal hai ustad SAMAR KABEER sahab mubarak baad qabool kare
    “Arsh tak kyu nahi jati hai gareeboo ki sada
    Asmaa bhi kya zamidaar samhale hue hai”

  4. बहुत अच्‍छी ग़ज़ल। बड़ा करम। दाद पेश है जनाब।
    सादर
    नवनीत

  5. बहुत ख़ूब समर साहब! उम्दा ग़ज़ल !

  6. समर साहब
    नमस्कार

    उनकी तौक़ीर करो लायक़े-तहसीन हैं वो
    ऐसे हालात में किरदार संभाले हुए हैं
    बिलकुल दुरुस्त फ़रमाया साहब ….!

    चाँद लम्हों के लिए हमको मिला था जो कभी
    आज तक हम वो तिरा प्यार संभाले हुए हैं
    अच्छा शेर … (शायद चंद की जगह चाँद लिख गया है )

    ज़िन्दगी क्या है इसे सोच के देखो यारो
    एक ड्रामा है अदाकार संभाले हुए हैं
    बेहतरीन …. बेहतरीन …. बेहतरीन …. !!!

  7. बेहतरीन …….बहुत उम्दा

  8. Kya umdaa ghazal hai…wah wah..daad qubule’n
    -kanha

  9. कोशिशें लाख हुईं ख़त्म न कर पाया कोई
    इस ग़रीबी को ये ज़रदार संभाले हुए हैं
    HAQUE HAI, BADHAAYI, MUBAARAKBAAD समर कबीर” SAHAB

  10. समर कबीर साहब आपका बड़ा करम कि आप लफ्ज़ की महफ़िल में तशरीफ़ लाये. अच्छी ग़ज़ल के लिए भी दाद क़ुबूल फ़रमाइये

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: