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T-20/14 अपने किरदार का मेयार संभाले हुए हैं-गणेश गायकवाड़

अपने किरदार का मेयार संभाले हुए हैं
आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं

अपने शानों पे रखा करते है हम सर अपना
सर पे हम अपनी ही दस्तार संभाले हुए हैं

मरज़े-इश्क़ कभी अच्छा नहीं होता जनाब
आप क्यों दिल में ये बीमार संभाले हुए हैं

आरज़ू भी है तमन्ना भी है ख़ाहिश भी है
आप दिल में कोई बाज़ार संभाले हुए हैं

उनकी हिम्मत की हमें दाद तो देनी होगी
डूबती नाव में पतवार संभाले हुए हैं

बात का कोई नतीजा नहीं निकला अब तक
फिर भी हम उनसे ये गुफ़्तार संभाले हुए हैं

दोस्ती, प्यार, वफ़ा, इश्क़, मुहब्बत, हसरत
दिल में हम कितने गुनहगार संभाले हुए हैं

आबरू आप की बच ही गई जाते जाते
झूठ के सारे तरफ़दार संभाले हुए हैं

ज़िन्दगीअपनी तो सरहद पे कटी है यारो
हम तो बस ख़ाब में घरबार संभाले हुए हैं

गणेश गायकवाड़ 09850377609

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7 comments on “T-20/14 अपने किरदार का मेयार संभाले हुए हैं-गणेश गायकवाड़

  1. अपने किरदार का मेयार संभाले हुए हैं
    आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं
    वाकई मुश्किल होता है अपने निजत्व के पहलू को बनाये और बचाये रखना !! वक़्त की रफ्तार और चोट से अच्छे अच्छे टूट जाते हैं –मतले पर वाह !!!
    अपने शानों पे रखा करते है हम सर अपना
    सर पे हम अपनी ही दस्तार संभाले हुए हैं
    सर अपना !! मे बात है – एक शेर कभी कहा था — तिरी दस्तार तुझ को ढो रही है
    तेरे कान्धों पे तेरा सर नही है – मै इस ख्याल की गली से गुज़र चुका हूँ !!!
    मरज़े-इश्क़ कभी अच्छा नहीं होता जनाब
    आप क्यों दिल में ये बीमार संभाले हुए हैं
    लो हम मरीज़े इश्क के तीमारदार हैं
    अच्छा अगर न हो तो मसीहा का क्या इलाज –गालिब बहुत पहले कह गये कि इस मरज़ का इलाज करने वाले को इलाज की ज़रूरत है !!
    आरज़ू भी है तमन्ना भी है ख़ाहिश भी है
    आप दिल में कोई बाज़ार संभाले हुए हैं
    आरजू तमन्ना और ख्वाहिश ही बाज़ार की ताकत है अच्छा कहा है !!!
    उनकी हिम्मत की हमें दाद तो देनी होगी
    डूबती नाव में पतवार संभाले हुए हैं—ज़रूर !!!
    बात का कोई नतीजा नहीं निकला अब तक
    फिर भी हम उनसे ये गुफ़्तार संभाले हुए हैं—कश्मीर की ओर ध्यान खेंच ले जाता है ये शेर !!
    दोस्ती, प्यार, वफ़ा, इश्क़, मुहब्बत, हसरत
    दिल में हम कितने गुनहगार संभाले हुए हैं—अच्छा है !!!
    आबरू आप की बच ही गई जाते जाते
    झूठ के सारे तरफ़दार संभाले हुए हैं—सियासी हल्को पर खूब चस्पा होता है शेर !!!
    ज़िन्दगीअपनी तो सरहद पे कटी है यारो
    हम तो बस ख़ाब में घरबार संभाले हुए हैं
    ये शेर हासिले ग़ज़ल है !! बहुत सुन्दर कहा है !!!
    गणेश गायकवाड़ जी ग़ज़ल के लिये मुबारकबाद स्वीकार कीजिये !!! –मयंक

  2. आदरणीय गणेश जी।
    अच्‍छी ग़ज़ल के लिए दाद हाजि़र है।
    नवनीत

  3. उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद कुबूलें!

  4. गणेश साहब
    नमस्कार

    अपने शानों पे रखा करते है हम सर अपना
    सर पे हम अपनी ही दस्तार संभाले हुए हैं
    अना से मुखातिब करता हुआ शेर …।!

    आरज़ू भी है तमन्ना भी है ख़ाहिश भी है
    आप दिल में कोई बाज़ार संभाले हुए हैं
    उम्दा शेर !

  5. Bahut umdaa ash’aar hain Ganesh ji…daad qubul kare’n –
    kanha

  6. उनकी हिम्मत की हमें दाद तो देनी होगी
    डूबती नाव में पतवार संभाले हुए हैं KHOOB,

  7. गणेश साहब लफ्ज़ की महफ़िल में आपका स्वागत है. अच्छी ग़ज़ल के लिए दाद क़ुबूल फ़रमाइये

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