9 टिप्पणियाँ

T-20/13 मानी-ओ-लफ़्ज़ का पिन्दार संभाले हुए हैं-अब्दुल अहद “साज़”

मानी-ओ-लफ़्ज़ का पिन्दार संभाले हुए हैं
हम ये गिरती हुई दीवार संभाले हुए हैं

मोर्चा हार के अपनों ने सिपर डाल भी दी
ये ग़नीमत है कि अग़ियार संभाले हुए हैं

नोके-मिज़गां ख़मे-अबरू के वो तेवर हैं कि फिर
आज के दशना-ओ-तलवार संभाले हुए हैं

वो कि हैं नित नये इंकार के दरपै हर दम
हम कि भूले हुए इक़रार संभाले हुए हैं

जाने किस मोड़ पे आ पहुंची है जीवन की कथा
और हम कौन सा किरदार संभाले हुए हैं

आह उस शख्स ने कितनों को सम्हाले रक्खा
आज कांधे पे जिसे चार संभाले हुए हैं

बेड़ियां तोड़ चुके लोग रिवायत की “साज़”
आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं

अब्दुल अहद “साज़” 09833710207

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9 comments on “T-20/13 मानी-ओ-लफ़्ज़ का पिन्दार संभाले हुए हैं-अब्दुल अहद “साज़”

  1. aap se yahan mulaaqat hogi socha nahin tha, welcome to Lafz grp, aap ki taarif karna to aftab ke saamne charagh rakhne ke mutaraadif hai, bahar haal ghazal laajawaab hai, tamaam ashaar qabil e sad tehseen hain, mubarak baad qubool farmaaen

  2. kya hi umda kalaam hai Saaz sahab
    tamaam gazal hi umda hai
    dili daad qubul keejiye

  3. आह उस शख्स ने कितनों को सम्हाले रक्खा
    आज कांधे पे जिसे चार संभाले हुए हैं

    साज़ साहब। लूट लिया इस शे’र ने।

    शुक्रिया…शुक्रिया…शुक्रिया।

  4. अब्दुल अहद “साज़”” SAHAB MATLA TA MAQTA UMDA GHAZAL, IS GHAZAL KO ”MURASSA” KAHA JAAYE TO ”BEJA” NA HOGA. GHAZAL PADH KAR BE-KARAA’N LUTF HAASIL HUWA SAIKDO’N ”DAAD-O-TAHSEEN”

  5. जाने किस मोड़ पे आ पहुंची है जीवन की कथा
    और हम कौन सा किरदार संभाले हुए हैं

    आह उस शख्स ने कितनों को सम्हाले रक्खा
    आज कांधे पे जिसे चार संभाले हुए हैं

    साज़ साहब बहुत अच्छी ग़ज़ल कही. मगर ये दो शेर क़यामत के हैं….वाह वाह..मुझे नहीं लगता कि इस ज़मीन में चार का क़ाफ़िया इससे बेहतर बंध पायेगा.

  6. “साज़” साहब
    उम्दा ग़ज़ल हुयी है !!!!

    आह उस शख्स ने कितनों को सम्हाले रक्खा
    आज कांधे पे जिसे चार संभाले हुए हैं
    एक नया अंदाज़ ……. आह !

  7. Bahut umda ghazal hai saaz sahab… girah to kamaal hai hi…matla aur kirdaar wala she’r bhi bahut pasand aaya….daad qubulen…. .

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