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T-20/10 मुस्‍कराहट को जो रुख़सार संभाले हुए हैं-नवनीत शर्मा

मुस्‍कराहट को जो रुख़सार संभाले हुए हैं
दिल में लगता है कि आज़ार संभाले हुए हैं

दिल के खण्डरात के सब्ज़े में हैं इतनी यादें
कितना कुछ हम भी न बेकार संभाले हुए हैं

धूप, बरसात, हवाओं से बचाती है हमें
हम तेरी याद की दीवार संभाले हुए हैं

क्‍यों भला ग़ैर लगायेगा निशाना मुझपर
काम ये मेरे तरफ़दार संभाले हुए हैं

उठ गये लोग थियेटर हुआ ख़ाली लेकिन
आप अब तक वही किरदार संभाले हुए हैं

बाद जिसके न कोई जीत हमें जीत सकी
ख़ुद में हम ऐसी भी इक हार संभाले हुए हैं

आप अख़लाक़ के पहलू को भी देखें साहब
इससे क्‍या होगा कि दस्‍तार संभाले हुए हैं

मुल्‍क की, कौ़म की क्‍या बात करूं मैं इनसे
ये भले लोग तो घर-बार संभाले हुए हैं

रेगज़ारों की कोई बात न कुछ छालों की
” आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं ”

तीरगी हमको है’ नवनीत’ ज़िया से बेहतर
रोशनी, सुनते हैं बाज़ार संभाले हुए हैं

नवनीत शर्मा 09418040160

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16 comments on “T-20/10 मुस्‍कराहट को जो रुख़सार संभाले हुए हैं-नवनीत शर्मा

  1. मुस्क राहट को जो रुख़सार संभाले हुए हैं
    दिल में लगता है कि आज़ार संभाले हुए हैं
    क्या गम है जिसको छुपा रहे हो ??!!! मेरी अवाज़ तो पर्दा है मेरे चेहरे का !!! नवनीत भई मतले पर दाद !!!
    दिल के खण्डरात के सब्ज़े में हैं इतनी यादें
    कितना कुछ हम भी न बेकार संभाले हुए हैं
    उग रहा है दरो दीवार पर सब्ज़ा गालिब //हम बयाबाँ मे है घर मे बहार आई है !!! हर सब्ज़े मे potentiality of growth है इसलिये रायगाँ कुछ नही यादो के खदर मे वाह !! वाह !!!
    धूप, बरसात, हवाओं से बचाती है हमें
    हम तेरी याद की दीवार संभाले हुए हैं
    पिछले शेर का derivative है और उतना ही खूबसूरत है i
    क्यों भला ग़ैर लगायेगा निशाना मुझपर
    काम ये मेरे तरफ़दार संभाले हुए हैं
    कौन दुश्मन है भनक दोस्त को लगने मत दो // दोस्त दुश्मन की कमीगाह भी हो जाता है =–मयंक
    नवनीत भई हमारे खयालात कितने मिलते है !!! शेर पर दाद !! नश्स्त मे फौरन मक्बूल होता है ऐसा शेर !!!
    उठ गये लोग थियेटर हुआ ख़ाली लेकिन
    आप अब तक वही किरदार संभाले हुए हैं
    फलसफहा इस शेर मे हौले से आया और चमकने लगा है !! अच्छा शेर है !!!
    बाद जिसके न कोई जीत हमें जीत सकी
    ख़ुद में हम ऐसी भी इक हार संभाले हुए हैं
    शिल्प भी कहन भी दोनो तारी हुई दिलो जेहन पर इस शेर से !!!
    आप अख़लाक़ के पहलू को भी देखें साहब
    इससे क्या होगा कि दस्ताहर संभाले हुए हैं
    जाइज़ सवाल है लेकिन एक बात ध्यान रहे हमारे अहद मे सुल्तान बहरा है और इंसाफ गूंगा है !! सिर्फ सदाये है कर्ब की !!
    मुल्क की, कौ़म की क्याे बात करूं मैं इनसे
    ये भले लोग तो घर-बार संभाले हुए हैं
    सही कहा भई !!! हमें का लेनो देनो पालिटिक्स से –हमे कौन सा वोट का अचार डालना है??!!इस मानसिकता ने देश का बेडा गर्क कर दिया !! खूब शेर कहा है !!!
    रेगज़ारों की कोई बात न कुछ छालों की
    ” आप ज़ंजीर की झंकार संभाले हुए हैं “
    अच्छी गिरह लगाई है !!! कैनवास औरो से भिन्न है !!!
    नवनीत भाई कमेण्ट मे विलम्ब के लिये क्षमा प्रार्थी हूँ –गज़ल पर दाद !! –मयंक

  2. बाद जिसके न कोई जीत हमें जीत सकी
    ख़ुद में हम ऐसी भी इक हार संभाले हुए हैं

    अच्छी ग़ज़ल कही मगर ये शेर क़यामत है. बहुत बड़ा ख़याल..सोचते जाइये और गहरे उतरते जाइये. सोचने के लिए दावत देने वाला ख़याल…वाह वाह

  3. नवनीत जी
    नमस्कार

    दिल के खण्डरात के सब्ज़े में हैं इतनी यादें
    कितना कुछ हम भी न बेकार संभाले हुए हैं
    हम भी न.… वाह साहब क्या अंदाज़ है !

    उठ गये लोग थियेटर हुआ ख़ाली लेकिन
    आप अब तक वही किरदार संभाले हुए हैं
    थियेटर का इस्तेमाल अच्छा है।

    बाद जिसके न कोई जीत हमें जीत सकी
    ख़ुद में हम ऐसी भी इक हार संभाले हुए हैं
    वाह साहब वाह

  4. शुभ प्रभात भाई नवनीत जी
    आज ही प्रकाशित की हूँ
    http://4yashoda.blogspot.in/2014/10/09418040160-httpwp.html

  5. खूबसूरत ग़ज़ल के लिए बधाई.

    उठ गये लोग थियेटर हुआ ख़ाली लेकिन
    आप अब तक वही किरदार संभाले हुए हैं

    हमेशा साथ रहने वाला शे’र लगा.

  6. शुभ संध्या नवनीत भाई
    ले जा रही हूँ इसे मेरी धरोहर का हिस्सा बनाने
    अनुमति की प्रत्य़ाशा में

    सादर

  7. क्‍यों भला ग़ैर लगायेगा निशाना मुझपर
    काम ये मेरे तरफ़दार संभाले हुए हैं …..ग़ज़ल तो पूरी अच्छी है नवनीत भाई ..मगर इस शेर की कहन ज़ोरदार रही..’तरफदार’ को आपने ख़ूब संभाला. दाद और मुबारकबाद.

  8. जनाब शफ़ीक़ रायपुरी साहब। मशकूर हूं। करम बना रहे।

  9. उठ गये लोग थियेटर हुआ ख़ाली लेकिन
    आप अब तक वही किरदार संभाले हुए हैं….navneet bhai bahut achcha sher hua ye. mere ek dost apke is sher ko apke naam ke sath kisi documemtry film me istemaal karna chahte hain aapki anumati ho to main unhe aapka no. de dooon ghazal ke liye ek baar phir se badhai…

    • इरशाद भाई। आपकी महब्‍बत है। आपका कुछ भी कहना मेरे लिए सर माथे। कौन नहीं चाहता कि उसके शे’र का इस तरह इस्‍तेमाल हो। महब्‍बत और करम बनाए रखें।
      सादर

  10. MATLA TA MAQTA BEHTAREEN GHAZAL MUBAARAK BAAD , नवनीत शर्मा SAHAB

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