19 टिप्पणियाँ

T-20/7 रोग़ पाले हुए, आज़ार संभाले हुए हैं-सौरभ शेखर

रोग़ पाले हुए, आज़ार संभाले हुए हैं
ग़म का हम लोग ही मेंयार संभाले हुए हैं.

सर क़लम होने का अफ़सोस नहीं कुछ उनको
लोग ख़ुश हैं कि वो दस्तार संभाले हुए हैं.

एक पैकर है ख़यालों में मगर मुबहम सा
जिसकी हम हसरते- दीदार संभाले हुए हैं.

फूल मेहमां की तरह आयेंगे अगली रुत में
शाख़ की हस्ती तो ये ख़ार संभाले हुए हैं.

गौर से देखिये पाज़ेब की ख़ुशफ़हमी में
‘आप जंज़ीर की झनकार संभाले हुए हैं.’

भेस धरना है हमें दूसरा हर अगले पल
खेल में हम कई किरदार संभाले हुए हैं.

नुक़रई झील है, ख्व़ाबीदा सी इक कश्ती है
और हम कश्ती की पतवार संभाले हुए हैं

भाड़ में जायें ये दुनिया के मसाइल ‘सौरभ’
थोड़ी हम सर पे ये संसार संभाले हुए हैं

सौरभ शेखर 9873866653

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

19 comments on “T-20/7 रोग़ पाले हुए, आज़ार संभाले हुए हैं-सौरभ शेखर

  1. सौरभ शेखर,

    अच्‍छी ग़ज़ल कही है आपने
    । ये तीन अश’आर ख़ास तौर पर पसंद आए

    सर क़लम होने का अफ़सोस नहीं कुछ उनको
    लोग ख़ुश हैं कि वो दस्तार संभाले हुए हैं.
    एक पैकर है ख़यालों में मगर मुबहम सा
    जिसकी हम हसरते- दीदार संभाले हुए हैं.
    भेस धरना है हमें दूसरा हर अगले पल
    खेल में हम कई किरदार संभाले हुए हैं.
    दाद क़ुबूल हो।

  2. रोग़ पाले हुए, आज़ार संभाले हुए हैं
    ग़म का हम लोग ही मेंयार संभाले हुए हैं.
    बेशक !! वगर्ना दुनिया तो अपने ही मुबहम ख्यालात मे गुम है !!!
    सर क़लम होने का अफ़सोस नहीं कुछ उनको
    लोग ख़ुश हैं कि वो दस्तार संभाले हुए हैं.
    क्य खूब सौरभ क्या खूब !! मै वक्त की बेदाद रफ्तार के चलते इस ज़मीन पर शेर कह नही सका लेकिन एक आध जो शेर कहे उनमे से एक ये भी था — बेलियाकत हैं जो तलवार सम्हाले हुये है
    फिर भी हम सर नही दस्तार सम्हाले हुये है !!
    क्या खूब हमारा ख्याल टकराया है –लेकिन खुशी इस बात की है कि जहाज से जहाज की तक्क्कर हुई सायकिल की नही !!! कया बात है !!!
    एक पैकर है ख़यालों में मगर मुबहम सा
    जिसकी हम हसरते- दीदार संभाले हुए हैं.
    ज़िन्दगी काहे को है ख्वाब है दीवाने का – एक तो मुअम्मा जो न समझने का न समझाने का –उस पर भी दीवाने का ख्वाब –ज़िन्दगी के तईं ये ख्याल नाज़ुक से नाज़ुक्तर हो गया है –वैसे ही आपके शेर मे भी एक मुबहम से पैकर की हसरते दीदार ने शेर को बेहद सुन्दर शिल्प दे दिया है वाह !!!
    फूल मेहमां की तरह आयेंगे अगली रुत में
    शाख़ की हस्ती तो ये ख़ार संभाले हुए हैं.
    पुरने और वफादार अल्फाज़ से नया ताज़ा ख्याल खूब है !!!
    गौर से देखिये पाज़ेब की ख़ुशफ़हमी में
    ‘आप जंज़ीर की झनकार संभाले हुए हैं.
    An eye opener !!! ’
    भेस धरना है हमें दूसरा हर अगले पल
    खेल में हम कई किरदार संभाले हुए हैं.
    औरो जैसे हो कर भी हम बाइज़्ज़त है बस्ती मे
    कुछ लोगों का भोलापन है कुछ अपनी अय्यारी है –निदा

    नुक़रई झील है, ख्व़ाबीदा सी इक कश्ती है
    और हम कश्ती की पतवार संभाले हुए हैं
    नाज़ुल है पहला मिसरा !! बढिया है !!!
    भाड़ में जायें ये दुनिया के मसाइल ‘सौरभ’
    थोड़ी हम सर पे ये संसार संभाले हुए हैं
    सानी मे तर्तीब बिगडी लेकिन लहजा फिर भी दस्तरस मे रहा –वाह !!!
    सौरभ मुझे कमेण्ट लिखने मे देर लगी इसकी कुछ जाइज़ दलीले है कभी फुर्सत मे बात करेंगे –पहले गज़ल पर धेर सारी दाद !!! –मयंक

  3. एक पैकर है ख़यालों में मगर मुबहम सा
    जिसकी हम हसरते- दीदार संभाले हुए हैं.

    kya hi shandaar sher hai bhaiya waaahhh
    puri ki puri gazal umda hai aur tarhi misre par girah bhi zabardast hai

    saurabh bhaiya is khoobsoorat gazal k liye aapko dili daad

    regards
    Alok

  4. सौरभ बहुत अच्छी ग़ज़ल कही. हर शेर भरपूर….वाह वाह, जीते रहिये

  5. उम्दा गज़ल भाई सौरभ जी

    फूल मेहमां की तरह आयेंगे अगली रुत में
    शाख़ की हस्ती तो ये ख़ार संभाले हुए हैं.

    गिरह भी बेजोड़

    दस्तार वाला शे’र भी बहुत खूब लगा

    हार्दिक बधाई

  6. धर्मेंद्र साहब, प्रखर, पवन साहब, इरशाद भाई, नवनीत भाई, खुर्शीद साहब, स्वप्निल भाई, शफीक़ साहब देर से जवाब देने के लिए क्षमा करें. आपकी दाद-ओ-तहसीन मेरे लिए बहुत मायने रखती है. आपका बहुत शुक्रगुज़ार हूँ.

  7. एक पैकर है ख़यालों में मगर मुबहम सा
    जिसकी हम हसरते- दीदार संभाले हुए हैं.

    सौरभ शेखर” SAHAB BEHTAREEN SHER, WAAH, BADHAAYI

  8. saurabh bhai acchi ghazal hui hai… एक पैकर है ख़यालों में मगर मुबहम सा
    जिसकी हम हसरते- दीदार संभाले हुए हैं. ye she’r bataure khaas pasand aaya…

  9. सर क़लम होने का अफ़सोस नहीं कुछ उनको
    लोग ख़ुश हैं कि वो दस्तार संभाले हुए हैं.

    एक पैकर है ख़यालों में मगर मुबहम सा
    जिसकी हम हसरते- दीदार संभाले हुए हैं.
    आदरणीय शेखर साहब ,शानदार ग़ज़ल हुई है |ढेरों दाद कबूल फरमावें |
    सादर

  10. ओ हो हो…
    क्‍या ग़ज़ल हुई है जनाब सौरभ शेखर जी।

    हर शे’र उम्‍दा लेकिन यह शे’र मुझे ताउम्र याद रहेगा :

    गौर से देखिये पाज़ेब की ख़ुशफ़हमी में
    ‘आप जंज़ीर की झनकार संभाले हुए हैं.’

    यह गिरह मुझे दे दो भाई।

  11. ek napi tuli santulit ghazal ke liye badhai sweekar keejiye..

  12. सौरभ शेखर जी
    नमस्कार

    रोग़ पाले हुए, आज़ार संभाले हुए हैं
    ग़म का हम लोग ही मेंयार संभाले हुए हैं.
    उम्दा मतला है

    सर क़लम होने का अफ़सोस नहीं कुछ उनको
    लोग ख़ुश हैं कि वो दस्तार संभाले हुए हैं.
    क्या कहने वाह वाह

    फूल मेहमां की तरह आयेंगे अगली रुत में
    शाख़ की हस्ती तो ये ख़ार संभाले हुए हैं.
    शानदार शेर है दाद !!!!!

    नुक़रई झील है, ख्व़ाबीदा सी इक कश्ती है
    और हम कश्ती की पतवार संभाले हुए हैं
    शब्दों का जखीरा एहसासों नयी ज़ुबाँ दे रहा है

  13. Behad umdaa matla, Behatreen ghazal…lajawab Girah. waah. waah ..Daad qubule’n bhaiya
    -Kanha

  14. शे’र दर शे’र आपने कमाल किया है सौरभ साहब। दिली दाद कुबूल कीजिए

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: