10 Comments

ग़ज़ल – जिनकी परवाज़ के चर्चे हैं फलक पर…..

इस तरह दौरे तरक्की की सनद रखते हैं
लोग अब घर मे रिवायत की लहद रखते हैं

हम वो जुगनू हैं जो तारों पे रहे हैं भारी
(खुदसिताई मे कहाँ हम कोई हद रखते हैं)

ज़हर दिल मे है मगर ये भी हुनर है उनमे
लब ओ लहजे मे सलीके से शहद रखते हैं

ताके निसियाँ पे जमी गर्द है सदियों की मगर
हम बडे शौक़ से लम्हों की सनद रखते हैं

धूप चढने पे सिकुडते हुये सायों की तरह
हम भी जिस तौर मुनासिब हो वो कद रखते हैं

ज़हर ख़ैरात मे देते हैं हरिक खुदकुश को
यूँ वो मजबूर के हाथों मे मदद रखते हैं

जिनकी परवाज़ के चर्चे हैं फलक पर वो भी
एहतिरामों मे मेरे तीर की ज़द रखते हैं

अपने इस दिल के तअर्रुफ़ मे बता दूँ इतना
लोग इस दिल के मकीनों से हसद रखते हैं

मयंक अवस्थी ( 8765213905)

लहद –कब्र
खुदसिताई –आत्मप्रशंसा
ताके निसियाँ –विस्मृति का ताक
मकीं – मकान मे रहने वाले

Advertisements

10 comments on “ग़ज़ल – जिनकी परवाज़ के चर्चे हैं फलक पर…..

  1. bhaiya umda ghazal hui hai… har she’r bharpoor hai… daad qubulen

  2. ताके निसियाँ पे जमी गर्द है सदियों की मगर
    हम बडे शौक़ से लम्हों की सनद रखते हैं

    धूप चढने पे सिकुडते हुये सायों की तरह
    हम भी जिस तौर मुनासिब हो वो कद रखते हैं

    ज़हर ख़ैरात मे देते हैं हरिक खुदकुश को
    यूँ वो मजबूर के हाथों मे मदद रखते हैं

    जिनकी परवाज़ के चर्चे हैं फलक पर वो भी
    एहतिरामों मे मेरे तीर की ज़द रखते हैं

    आ. मयंक भाईसाहब बहुत ही खुबसूरत ग़ज़ल हुई है |ढेरों दाद स्वीकार करें |
    सादर

  3. Mushkil Zameen mushkil qafiya magar ek bahut hi sadhee huee baa-m’aanee pur-asar umdaah peshkash.

    MayaNk saahab ziNdaabaad.

    • अपने इस दिल के तअर्रुफ़ मे बता दूँ इतना
      लोग इस दिल के मकीनों से हसद रखते हैं–so naturally people would be envious with you navin bhai !!):):):):):ha ha ha aha –mayank

  4. क्या कहने मयंक भैया
    वाह्ह वाह्ह
    बहोत उम्दा ग़ज़ल

    Regards

  5. ज़हर दिल मे है मगर ये भी हुनर है उनमे
    लब ओ लहजे मे सलीके से शहद रखते हैं

    धूप चढने पे सिकुडते हुये सायों की तरह
    हम भी जिस तौर मुनासिब हो वो कद रखते हैं

    ज़हर ख़ैरात मे देते हैं हरिक खुदकुश को
    यूँ वो मजबूर के हाथों मे मदद रखते हैं

    KYA BAAT….KYA BAAT…KYA BAAT…LAJAWAB GHAZAL KAHI HAI BHAI…JIYO.

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: