5 Comments

फ़ुजूल चुलबुले जुमलों की ओर क्यों ले जाऊँ – नवीन

फ़ुजूल चुलबुले जुमलों की ओर क्यों ले जाऊँ
ग़ज़ल को सिर्फ़ लतीफ़ों की ओर क्यों ले जाऊँ

ग़ज़ल की रूह ज़मानों की प्यास ढोती है
पराई प्यास पियालों की ओर क्यों ले जाऊँ

नहीं ये बात नहीं है कि भीड़ से है गुरेज़
मगर तलाश तमाशों की ओर क्यों ले जाऊँ

न जी भरा है सफ़र से न ही थका है बदन
अभी से नाव किनारों की ओर क्यों ले जाऊँ

जिरह के मोड़ कई रासते सुझाते हैं
अभी से बह्स नतीज़ों की ओर क्यों ले जाऊँ

:- नवीन सी. चतुर्वेदी
+91 99 670 24 593

Advertisements

About Navin C. Chaturvedi

www.saahityam.org 09967024593 navincchaturvedi@gmail.com http://vensys.in

5 comments on “फ़ुजूल चुलबुले जुमलों की ओर क्यों ले जाऊँ – नवीन

  1. जिरह के मोड़ कई रासते सुझाते हैं
    अभी से बह्स नतीज़ों की ओर क्यों ले जाऊँ
    acchi bbat hai ….. !!!!

  2. Navin Bhai , behtariiin kaafiyon ko jis khoobsurti se aapne radeef ke sath joda hai wo kamaal hai…Lajawab kar diya bhai…har sher behad khoobsurat ban pada hai…Daad kabool karen.

  3. दोस्तो मेरे नज़दीक यह महज़ एक ग़ज़ल न हो कर एक परिचर्चा है। ग़ज़ल में अनेक फ़्लेवर्स आदिकाल ही से मौजूद रहे हैं। मैं अपने पसन्द के [अपने लिखे या अपने शागिर्दों के लिये लिखे हुये] फ़्लेवर को उम्दाह तो ज़ूरूर कह सकता हूँ, उस की शान में अतिरेक की सीमा से आगे जा कर क़सीदे भी काढ़ सकता हूँ – मगर दूसरे फ़्लेवर्स को ‘बकवास’ कहना अनुचित होगा।

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: