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T-19/27 ऐसे नाराज़ न हो मेरे मसीहा मुझसे-‘खुरशीद’ खैराड़ी

ऐसे नाराज़ न हो मेरे मसीहा मुझसे
दर्दे-उल्फ़त न सहा जायेगा तन्हा मुझसे

सारी दुनिया के सितम एक अकेले दिल पर
इक मुहब्बत का गुनह ही तो हुआ था मुझसे

आँसुओं की ये घटायें ये जिगर की ताबिश
जिंदा रहने के लिए मेरा उलझना मुझसे

मैं बुरा हूं ये हक़ीक़त है अज़ीज़ो लेकिन
ढूंढ कर भी तो दिखाओ कोई अच्छा मुझसे

अपनी तस्वीर को देखा तो हुई हैरानी
अजनबी हो गया कितना मिरा चेहरा मुझसे

ख़ुदफ़रोशी पे जो उतरा तो खुली सच्चाई
कोई सामान कहाँ अब रहा सस्ता मुझसे

तेरी यादों के सनोबर मिरी राहों में थे
वरना ग़म का ये सफ़र शाद हो कटता मुझसे

सब्र की हद हुई जातीं है बरस जा बादल
सूख जायें न कहीं कुछ गुले-सहरा मुझसे

मेरे हक़ में मिरा दिल ही न गवाही देगा
‘साहिबो उठ गया क्या मेरा भरोसा मुझसे’

शोला-ए-हिज्र को पिंदार के दामन में रखो
सीख लो ख़ाब मिलन के भी सजाना मुझसे

ज़र्फ़ देखो कि अज़ल से है तमन्ना जिसकी
ताक़यामत वो रहेगा न शनासा मुझसे

नाम ‘ख़ुर्शीद’ रखा है तो जलाऊँगा दिल
देखा जायेगा न हरगिज़ ये अँधेरा मुझसे

‘खुरशीद’ खैराड़ी 09413408422

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25 comments on “T-19/27 ऐसे नाराज़ न हो मेरे मसीहा मुझसे-‘खुरशीद’ खैराड़ी

  1. नाम ‘ख़ुर्शीद’ रखा है तो जलाऊँगा दिल
    देखा जायेगा न हरगिज़ ये अँधेरा मुझसे

    वाह वाह खुरशीद साहब !

  2. ऐसे नाराज़ न हो मेरे मसीहा मुझसे
    दर्दे-उल्फ़त न सहा जायेगा तन्हा मुझसे
    महबूब को मसीहा कहना खूब जमा !!! वाह !!
    सारी दुनिया के सितम एक अकेले दिल पर
    इक मुहब्बत का गुनह ही तो हुआ था मुझसे
    एक पुराने ख्याल पर शेर कहा है जिसका लहजा भा रहा है !!
    आँसुओं की ये घटायें ये जिगर की ताबिश
    जिंदा रहने के लिए मेरा उलझना मुझसे
    तडप ज़हिर है !! भावना का उबाल शब्दो मे आया है !!!
    मैं बुरा हूं ये हक़ीक़त है अज़ीज़ो लेकिन
    ढूंढ कर भी तो दिखाओ कोई अच्छा मुझसे
    दूर तक गया शेर !! नफरत , तगाफुल या शिकवे सोच को महदूद कर देते हैं – किसी व्यक्ति की अच्छाइयाँ उसकी रुख़्सती के बाद समझ आती हैं !!! इसलिये शेर मे मश्वरा भी है और एक गहरा सच भी है !! दाद !!
    ख़ुदफ़रोशी पे जो उतरा तो खुली सच्चाई
    कोई सामान कहाँ अब रहा सस्ता मुझसे
    इस शेर पर दाद !! दाद ! बुरा जो देखन मैं चला मुझसे सा बुरा न कोय !! जैसी बात निकाली है !! आत्मविश्लेषण और आत्म्प्रवंचना मे फर्क होता है !! ईमान से खुद को देखना एक साहस का काम है !! इस बात की पैरवी करता हुआ शेर !!
    मेरे हक़ में मिरा दिल ही न गवाही देगा
    ‘साहिबो उठ गया क्या मेरा भरोसा मुझसे’
    अच्छी गिरह !!
    ज़र्फ़ देखो कि अज़ल से है तमन्ना जिसकी
    ताक़यामत वो रहेगा न शनासा मुझसे
    एक पक्षीय प्रेम का सुन्दर शेर !!
    नाम ‘ख़ुर्शीद’ रखा है तो जलाऊँगा दिल
    देखा जायेगा न हरगिज़ ये अँधेरा मुझसे
    बहुत खूब !! बहुत खूब !!!
    खुर्शीद भाई !! “मुझसे” रदीफ का निर्वाह आसान नहीं –लेकिन आपने हर ज़ाविये से इसे बखूबी निभाया है !! शेर भी जिस लहजे मे कहे गये हैं उससे मुसल्सल गज़ल का असर बनता है !!! हमेशा आप बहुत अच्छी गज़ल कहते हैं !! इस बार भी इस खूबसूरत गज़ल के लिये बधाई !!! –मयंक

    • आ.मयंक सा.
      एक एक शेर पर आपके स्नेह का छिड़काव ,शेरों को फिर तरोताज़ा कर देता है ,ह्रदय की गहराइयों से आभार |
      सादर

  3. achchhi ghazal hui hai bhai, jeete rahiye.

  4. Matle se Makte tak ek kasi hui ghazal.. maza aa gya.. waaaaaaah!!!

  5. सारी दुनिया के सितम एक अकेले दिल पर
    इक मुहब्बत का गुनह ही तो हुआ था मुझसे

    आँसुओं की ये घटायें ये जिगर की ताबिश
    जिंदा रहने के लिए मेरा उलझना मुझसे

    मैं बुरा हूं ये हक़ीक़त है अज़ीज़ो लेकिन
    ढूंढ कर भी तो दिखाओ कोई अच्छा मुझसे

    ज़र्फ़ देखो कि अज़ल से है तमन्ना जिसकी
    ताक़यामत वो रहेगा न शनासा मुझसे

    नाम ‘ख़ुर्शीद’ रखा है तो जलाऊँगा दिल
    देखा जायेगा न हरगिज़ ये अँधेरा मुझसे

    वाह वाह खुरशीद साहब ! क्या खूबसूरत अशआर कहे हैं !
    दिली मुबारकबाद !!

  6. Khursheed saahb tamaam ghazal achhi hai! Mubarakbaad aur daad!

  7. wah wah wah, kya khoob ghazal kahi hai, bahot khoob

  8. ख़ुर्शीद साहब देर से ग़ज़ल आई मगर खूब आई. वाह-वाह दाद क़ुबूल फ़रमाइये

  9. kya hi acchi ghazal hui hai khursheed sahab… waah..poori ghazal acchi hai.. daad qubulen

  10. आँसुओं की ये घटायें ये जिगर की ताबिश
    जिंदा रहने के लिए मेरा उलझना मुझसे

    वाह खुरशीद साहब….पूरी गज़ल ही सचमुच बहुत अच्छी हुई है…..साधु….

    सादर

  11. सारी दुनिया के सितम एक अकेले दिल पर
    इक मुहब्बत का गुनह ही तो हुआ था मुझसे

    आँसुओं की ये घटायें ये जिगर की ताबिश
    जिंदा रहने के लिए मेरा उलझना मुझसे

    अपनी तस्वीर को देखा तो हुई हैरानी
    अजनबी हो गया कितना मिरा चेहरा मुझस…

    Kya kehne ..Wahhh. .khursheed sahab daad qubule’n
    -Kanha

  12. Khurshiid sahab tamaam gazal hi umda hai..,sabhi ash-aar khoobsoorat hain
    Dher sari daad

    Regards
    Alok mishra

  13. आ.दादा
    सादर प्रणाम |
    गहन शोक और मनस्ताप से मुब्तिला रहते हुये भी आपने तरही को जारी रखा ,यह सच्चे कर्मयोग की पराकाष्ठा है |अकिंचन की ग़ज़ल आपका आशीर्वाद पाकर धन्य हो गई है |स्नेह की छाँव सदा बनाये रखियेगा |
    सादर
    खुरशीद

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