22 टिप्पणियाँ

T-19/25 मुंसिफ़ों ने नहीं पूछी मेरी इच्छा मुझसे-आशीष नैथानी ‘सलिल’

मुंसिफ़ों ने नहीं पूछी मेरी इच्छा मुझसे
जाने किस बात से नाराज़ है दुनिया मुझसे

नौकरी छूटी तो फिर देर से घर आने लगा
डर था माँगे न खिलौना मिरा बच्चा मुझसे

हिज़्र की रात मेरे साथ ग़ज़ब और हुआ
रौशनी माँग रहा था जो अँधेरा मुझसे

खर्च कर दे मुझे तू अपने लिए चैन कमा
कह गया जेब का वो आख़िरी सिक्का मुझसे

मेरे होंटों को मिला लफ्ज़ न उस वक़्त कोई
मेरे दुश्मन ने मेरा हाल जो पूछा मुझसे

ज़िन्दगी तेरे सिवा किससे तअर्रुफ़ मेरा
और तू कहती है तू कौन है मेरा मुझसे

इतने दुख इतने मसाइल हैं निजी जीवन में
किसको फ़ुर्सत है करे मुल्क का चर्चा मुझसे

खेत में फ़स्ल उगाने की न की कोशिश भी
‘साहिबो उठ गया क्या मेरा भरोसा मुझसे’

आशीष नैथानी ‘सलिल’ 09666060273

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22 comments on “T-19/25 मुंसिफ़ों ने नहीं पूछी मेरी इच्छा मुझसे-आशीष नैथानी ‘सलिल’

  1. नौकरी छूटी तो फिर देर से घर आने लगा
    डर था माँगे न खिलौना मिरा बच्चा मुझसे
    आज के दौर का सच …… शानदार शेर !!!!

  2. आशीष नैथानी ‘सलिल’ मेरा यक़ीन है कि नई पीढ़ी जि़म्‍मेदारी से शै’र कह रही है और आपके अशआर इसकी ताईद करते नज़र आते हैं।बहुत अच्‍छे।

  3. आशीष साहब, ऐसी मंझावट की ग़ज़ल वाह-वाह आपके कलाम पर दिन ब दिन निखार आता जा रहा है.

  4. ज़िन्दगी तेरे सिवा किससे तअर्रुफ़ मेरा
    और तू कहती है तू कौन है मेरा मुझसे
    bahut accha she’r hua hai ashish ji.. daad qubulen

  5. नौकरी छूटी तो फिर देर से घर आने लगा
    डर था माँगे न खिलौना मिरा बच्चा मुझसे
    अपने समय के मसाइल मे से एक का मंज़र बडे ही सुन्दर लहजे मे !!!
    हिज़्र की रात मेरे साथ ग़ज़ब और हुआ
    रौशनी माँग रहा था जो अँधेरा मुझसे
    गम गया सारी काइनात गई !!! अच्छा शेर है !!!
    खर्च कर दे मुझे तू अपने लिए चैन कमा
    कह गया जेब का वो आख़िरी सिक्का मुझसे
    नया शेर है और मफ्हूम मुफलिसी की बेपरवाही पर है !!
    मेरे होंटों को मिला लफ्ज़ न उस वक़्त कोई
    मेरे दुश्मन ने मेरा हाल जो पूछा मुझसे
    राह दुश्मन की तंग होने लगी
    बाँहे फैला के पेश आये हम !!
    ज़िन्दगी तेरे सिवा किससे तअर्रुफ़ मेरा
    और तू कहती है तू कौन है मेरा मुझसे
    ज़िन्दगी ये समझ न पाये हम
    तेरे अपने हैं या पराये हम ?!!
    आशीष नैथानी ‘सलिल’ जी अपको इन शेरो पर खास दाद !!! और दीगर अश आर भी अच्छे कहे हैं –मयंक

  6. नौकरी छूटी तो फिर देर से घर आने लगा
    डर था माँगे न खिलौना मिरा बच्चा मुझसे

    हिज़्र की रात मेरे साथ ग़ज़ब और हुआ
    रौशनी माँग रहा था जो अँधेरा मुझसे

    खर्च कर दे मुझे तू अपने लिए चैन कमा
    कह गया जेब का वो आख़िरी सिक्का मुझसे
    aashish sahab ,kya rang bikhere gye hain har ek sher me ,maza aa gya .dheron daad kabool farmayen

  7. ज़िन्दगी तेरे सिवा किससे तअर्रुफ़ मेरा
    और तू कहती है तू कौन है मेरा मुझस…Kya kehne. ..bahut Achhi ghazal hui hai Aashish Bhai. ..girah behatreen lagai hai. ..waahh. .
    -Kanha

  8. ज़िन्दगी तेरे सिवा किससे तअर्रुफ़ मेरा
    और तू कहती है तू कौन है मेरा मुझसे

    Achhi gazal hui hai aasheesh sahab….bahut bahut badhai

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