20 Comments

T-19/22 क्या कहा ज़िल्ले-इलाही पे क़सीदा मुझसे-‘शफ़ीक़’ रायपुरी

क्या कहा ज़िल्ले-इलाही पे क़सीदा मुझसे
मुहतरम ऐसी तवक़्क़ो नहीं रखना मुझसे

मुज़्तरिब हूँ कि धुले कैसे ग़ुबारे-ख़ातिर
खुल के तन्हाई में होता नहीं रोना मुझसे

हार बैठा हूँ मैं अब होशो-ख़िरद की बाज़ी
अब तअल्लुक़ न रहा कोई भी मेरा मुझसे

क्यों मिरे ऐब गिनाती है ज़माने भर को
क्यों मिरे सामने कहती नहीं दुनिया मुझसे

ज़ुल्म के हाथ भी शल हो के रहेंगे इक दिन
और फिर देखना वो प्यार करेगा मुझसे

आज तक इत्र महकता है दिमाग़ो-दिल में
मुद्दतों पहले कहीं कोई मिला था मुझसे

हज़रते-दाग़ के अंदाज़ में अशआर ‘शफ़ीक़’
काम मुश्किल है बहुत हो नहीं सकता मुझसे

‘शफ़ीक़’ रायपुरी 09406078694

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

20 comments on “T-19/22 क्या कहा ज़िल्ले-इलाही पे क़सीदा मुझसे-‘शफ़ीक़’ रायपुरी

  1. shafiq bhai, kya hi baDhiya ghazal hui hai. matle se maqte tak bharpur ashaar hue haiN. bahut bahut badhai.

  2. ‘शफ़ीक़’ रायपुरी
    रवां दवां,पुरअसर ग़ज़ल कहने वालेआज भी हैं ये आपके कलाम से साबित है। मतले की दाद अलग से कु़बूल फ़रमाएं।

    • मनोज कुमार मित्‍तल ‘कैफ़’ SAAHAB, DAAD KE LIYE MAMNOON HU;N, BAHUT BAHUT SHUKRIYA JANAAB……….

  3. Uff… kya haseen ghazal hui hai… ek ek sher manzha hua….bahut bahut badhai sahab

  4. शफ़ीक़ रायपुरी साहब कभी-कभी मैं सोच में पड़ जाता हूँ कि छत्तीस गढ़ के किसी शख़्स की शायरी में ऐसी रवानी कैसे आ सकती है. आप के मतले का मकालमा सैकड़ों दाद का मुस्तहक़ है. अगला शेर, फिर उससे अगला शेर, उसके बाद का शेर यानी पूरी ग़ज़ल ही बेहद धुली-मंझी हुई है. ज़िंदाबाद ज़िंदाबाद

    • TUFAIL SAAHAB ! NAWAAZISH, ZARRA NAWAAZI KA BAHUT BAHUT SHUKRIYA, GHAZAL PAR AAP KI DAAD ”TONIC” KA KAAM KARTI HAI. AAP KI DAAD SANAD KE TAUR PAR PESH KI JAA SAKEGI. SARAAPA MAMNOON…………..

      • TUFAIL SAAHAB ! NAWAAZISH, ZARRA NAWAAZI KA BAHUT BAHUT SHUKRIYA, GHAZAL PAR AAP KI DAAD ”TONIC” KA KAAM KARTI HAI. AAP KI DAAD SANAD KE TAUR PAR PESH KI JAA SAKEGI. SARAAPA MAMNOON…………..

  5. Prakhar Malviya ‘kanha’ SAHAB ”S H U K R I Y A”

  6. ACHCHE ASHAAR SE MOZAYYAN…GHAZAL PAR MERI DAAD AUR MUBARAKBAAD…JNB…SHAFIQUE SB

  7. Kya kahne Janaab Shafeeq Sb.. waaaah!! maza aa gya!!

  8. क्यों मिरे ऐब गिनाती है ज़माने भर को
    क्यों मिरे सामने कहती नहीं दुनिया मुझसे

    आज तक इत्र महकता है दिमाग़ो-दिल में
    मुद्दतों पहले कहीं कोई मिला था मुझसे

    Shafeeq sahab bohot khoob gazal hai aapki. Magar in Ashaar par khaas daad kubool kijiye!

  9. क्या कहा ज़िल्ले-इलाही पे क़सीदा मुझसे
    मुहतरम ऐसी तवक़्क़ो नहीं रखना मुझसे
    चलिये शफीक़ साहब !! आप नही कहते क़सीदा जिल्ले इलाही पे …. मुबारक हो !! लेकिन जिनका दावा था सुखन का … उन्होने टौंक़ के नवाब के लिये भी क़सीदे कहे थे !!! कर्ज़ की मय खूब पी थी और हिन्दुस्तान के 1857 के आन्दोलन को काले खूँरेजियों की कारस्तानी बता कर ” द्स्तम्बू”” लिख कर मलिका विक्टोरिया से वज़ीफे की भीक माँगी थी—ये बादशाहे –सुखन – गालिब साहब ने किया था !!!!
    मुज़्तरिब हूँ कि धुले कैसे ग़ुबारे-ख़ातिर
    खुल के तन्हाई में होता नहीं रोना मुझसे
    सुनते हैं अश्के निदामत से धुलकर दामन उजला हो जाता है /सुनते हैं कि लहू का दाग़ लहू से ही मिटता है!!
    मुज़्तरिब हूँ कि धुले कैसे ग़ुबारे-ख़ातिर !!!?? सवाल सोच मे डालने वाला है !!!

    हार बैठा हूँ मैं अब होशो-ख़िरद की बाज़ी
    अब तअल्लुक़ न रहा कोई भी मेरा मुझसे
    ये हार अच्छी है !!! होशो हवास ताबो तुवाँ दाग़ खो चुके //अब हम भी जाने वाले हैं सामान तो गया…..कहने वाले ने भी होशो ख़िरद को इतनी तवज़्ज़ो नही दी ज्तनी दिल और गम को दी थी!!!
    क्यों मिरे ऐब गिनाती है ज़माने भर को
    क्यों मिरे सामने कहती नहीं दुनिया मुझसे
    कुछ तो लोग कहेंगे –लोगों का काम है कहना …… वो कहते है किस से दीगर है .. बस आप किसी से मत कहना !!!
    आज तक इत्र महकता है दिमाग़ो-दिल में
    मुद्दतों पहले कहीं कोई मिला था मुझसे
    येस — मिरी गिरिफ़्त मे आकर निकल गई तितली
    परो के रेंज मगर रह गये हैं मुठ्ठी मे –शिकेब
    हज़रते-दाग़ के अंदाज़ में अशआर ‘शफ़ीक़’
    काम मुश्किल है बहुत हो नहीं सकता मुझसे
    ‘शफ़ीक़’ साहब !! तब वक़्त दूसरा था –मिर्ज़ा दाग़ तो ज़फर के पोते थे –अल्लामा इकबाल के उस्ताद थे और ज़ौक़ साहब के शागिर्द थे – तब लाल किले की रौनक इनसे थी !! उनके पास शाइरी करने के सिवा और क्या काम था – इसलिये तब के मौसम महौल और आबो हवा मे शाइरी आसान थी आज हालात बदल गये हैं –आज की धूल मिट्टी धूप और पानी के शिकार अगर चन्द शेर भी कहाँ लेते हैं तो बडी बात है –और आपने तो बहुत खूबसूरत शेर कहे हैं –मुबारकबाद कुबूल केजिये –मयंक

    • Mayank Awasthi SAHAB, GUZISHTA 1 HAFTE SE OUT OF STATION THA, WEBSITE PAR HAAZIR NAHI’N HO SAKA, AAP KI MUBAARAKBAAD SAR-AANKHO’N PAR, GHAZAL PAR ”TABSIRA” KE LIYE MAMNOON-O-MUTASHAKKIR HU’N. S H U K R I Y A

  10. क्यों मिरे ऐब गिनाती है ज़माने भर को
    क्यों मिरे सामने कहती नहीं दुनिया मुझस…
    Kya baat h hai. ..wahhhh
    -Kanha

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: