13 टिप्पणियाँ

T-19/20 काश चिड़िया हो कबूतर हो कि तोता मुझसे-फ़ज़ले-अब्बास सैफ़ी

काश चिड़िया हो कबूतर हो कि तोता मुझसे
बात करने लगे हर एक परिंदा मुझसे

दे के क्यों छीन लिया आपने सिक्का मुझसे
पूछता रहता है मेहनत का पसीना मुझसे

क्या ख़बर थी कि मिलेगा जो बुढ़ापा मुझसे
आँख फेरेगा मिरी आँख का तारा मुझसे

मैं ही दुनिया का नहीं आख़िरी इंसान मियां
मैं अगरचे हूँ बुरा, ढूंढ लो अच्छा मुझसे

बात करता हूँ हमेशा ही ख़ुदा लगती मैं
उसने तोड़ा है इसी बात पे नाता मुझसे

आप भी तर्के-तअल्लुक़ का बहाना ढूंढो
भारी पत्थर है न उट्ठेगा अकेला मुझसे

ख़ून के आंसू रुलाये हैं उन्होंने मुझको
नाज़ था जिनपे कि है ख़ून का रिश्ता मुझसे

काम जब आन पड़ा वक़्ते-मुसीबत ‘सैफ़ी’
हमनवा मेरा गया झाड़ के पल्ला मुझसे

फ़ज़ले-अब्बास सैफ़ी 09826134249

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13 comments on “T-19/20 काश चिड़िया हो कबूतर हो कि तोता मुझसे-फ़ज़ले-अब्बास सैफ़ी

  1. आ सैफ़ी साहब… अच्छी ग़ज़ल हुई है…

    आप भी तर्के-तअल्लुक़ का बहाना ढूंढो
    भारी पत्थर है न उट्ठेगा अकेला मुझसे

    वाह ये शेर तो लाज़वाब हुआ है….

    सादर

  2. क्या ख़बर थी कि मिलेगा जो बुढ़ापा मुझसे
    आँख फेरेगा मिरी आँख का तारा मुझसे
    ye aaj ke daur ki haqeeqat hai, jis ko bade saleeqe se alfaaz ki qabaa di hai aap ne
    मैं ही दुनिया का नहीं आख़िरी इंसान मियां
    मैं अगरचे हूँ बुरा, ढूंढ लो अच्छा मुझसे
    kya kehne
    बात करता हूँ हमेशा ही ख़ुदा लगती मैं
    उसने तोड़ा है इसी बात पे नाता मुझसे
    bahot khoob
    आप भी तर्के-तअल्लुक़ का बहाना ढूंढो
    भारी पत्थर है न उट्ठेगा अकेला मुझसे nae andaaz ka sher hai, bahot achhi ghazal kahi hai, mubarakbaad qubool farmaaen

  3. आप भी तर्के-तअल्लुक़ का बहाना ढूंढो
    भारी पत्थर है न उट्ठेगा अकेला मुझसे

    भाई सैफ़ी साहब आपका ये शेर हसद की हद अच्छा है. काश ये शेर मैं कह पाता. मेरी ग़ज़ल भी किसी क़ाबिल हो जाती. वाह-वाह…सैकड़ों दाद क़ुबूल फ़रमाइये

  4. SABHI ASH’AAR ”MATLA TA MAQTA” KHOOB HUYE HAI’N SAIFY SAHAB, UMDA GHAZAL K LIYE ”M U B A A R A K B A A D”

  5. RISHTOn KE KHOKHLE PAN…DUNIYA KI SAFFAKI…WAGHAIRA…par tanz karti khoobsoorat ghazal par mubarakbaad…SAIFI SB

  6. आप भी तर्के-तअल्लुक़ का बहाना ढूंढो
    भारी पत्थर है न उट्ठेगा अकेला मुझसे
    waahh… accha she’r hua hai saifi sahab…

  7. काश चिड़िया हो कबूतर हो कि तोता मुझसे
    बात करने लगे हर एक परिंदा मुझसे
    इस दौर मे चिडिया तोता सब किसी हुनरमन्द सैयाद से तो मुखातिब हो जाते हैं लेकिन हमारे आपके जैसों से नही !!!
    दे के क्यों छीन लिया आपने सिक्का मुझसे
    पूछता रहता है मेहनत का पसीना मुझसे
    इस पसीने को मोती समझ के शाने करीमी भले ही चुन ले लेकिन खुदमुख्तार सिस्तम से उमीद करना फुज़ूल है !!!
    क्या ख़बर थी कि मिलेगा जो बुढ़ापा मुझसे
    आँख फेरेगा मिरी आँख का तारा मुझसे
    आँखो की बीनाई ही नही कलेजे का ज़र्फ़ भी जिस उम्र मे कम्ज़ोर पडता है तब आँख का तारा आँख फेरता है –यही विडम्बना है इस समय की !!!
    मैं ही दुनिया का नहीं आख़िरी इंसान मियां
    मैं अगरचे हूँ बुरा, ढूंढ लो अच्छा मुझसे
    अच्छा मश्वरा है !!! 6 अरब आदमी हैं दुनिया मे – ढूँढने वाले ढूँढ सकते है हमसे बेहतर !!!
    आप भी तर्के-तअल्लुक़ का बहाना ढूंढो
    भारी पत्थर है न उट्ठेगा अकेला मुझसे
    सुन्दर शेर कहा है .. मेरी बात और है मैने तो मुहब्बत की है –जैस शेड भी है शेर मे …
    ख़ून के आंसू रुलाये हैं उन्होंने मुझको
    नाज़ था जिनपे कि है ख़ून का रिश्ता मुझसे
    पिछले कहे गये शेर की बेहतर पुनराव्रत्ति है इस शेर मे !!!!
    काम जब आन पड़ा वक़्ते-मुसीबत ‘सैफ़ी’
    हमनवा मेरा गया झाड़ के पल्ला मुझसे
    साया भी तीरगी मे मेरा हमसफर न था …..
    फ़ज़ले-अब्बास सैफ़ी साहब !! नये और उम्दा शेर और प्रभावी कहन !! ग़ज़ल पर बधाई !!—मयंक

  8. खून के आंसू रुलाये हैं उन्होंने मुझको
    नाज़ था जिनपे कि है खून का रिश्ता मुझसे

    वाह्ह्ह
    अच्छी ग़ज़ल हुई है
    ढेर सारी दाद

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