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T-19/16 काम ले ऐसा ज़बरदस्त ख़ुदाया मुझसे-नासिर अली ‘नासिर’

काम ले ऐसा ज़बरदस्त ख़ुदाया मुझसे
जगमगाता रहे हस्ती का सितारा मुझसे

बैठ जाता है मज़े से वो मिरे कांधे पर
किस क़दर हिल गया मासूम परिंदा मुझसे

पूछिये मुझसे कि अहसासे-यतीमी क्या है
छिन चुका है मिरे माँ-बाप का साया मुझसे

ग़ैर तो ग़ैर हैं अपने भी हुए बेगाने
कौन रखता है यहाँ दर्द का रिश्ता मुझसे

इल्मो-फ़न कितने मुनव्वर हैं सितारों की तरह
कौन छीनेगा बसीरत का उजाला मुझसे

बेठिकाना हूँ ज़माने में फ़क़ीरों की तरह
किस लिये पूछते हो मेरा ठिकाना मुझसे

बख़्श दे रब मुझे सरगर्म अमल की दुनिया
सरबलंदी पे रहे मेरा घराना मुझसे

‘नासिर’ इस तरह मुहब्बत की परस्तिश की है
जगमगाता है मुहब्बत का घराना मुझसे

नासिर अली ‘नासिर’ 09926502405

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8 comments on “T-19/16 काम ले ऐसा ज़बरदस्त ख़ुदाया मुझसे-नासिर अली ‘नासिर’

  1. Bahot Achchi ghazal hui hai jabaab Nasir sb… daad kubool kijiye!!

  2. काम ले ऐसा ज़बरदस्त ख़ुदाया मुझसे
    जगमगाता रहे हस्ती का सितारा मुझसे
    उसकी दुनिया –उसका निजाम –उसकी रात उसकी भोर –उसके हाथ मे डोर – जिसको जिस पैकर मे चाहे ढाल दे !! तो उससे यही दुआ है कि –कम से कम बच्चो के होठो की हँसी की खातिर // ऐसी मिट्टी मे मिलाना कि खिलौना हो जाऊँ !!(मुनव्वर रा अना)
    बैठ जाता है मज़े से वो मिरे कांधे पर
    किस क़दर हिल गया मासूम परिंदा मुझसे
    अभी तो सिर्फ परिन्दे शुमार करना है
    अभी न पूछ कि किसका शिकार करना है
    पूछिये मुझसे कि अहसासे-यतीमी क्या है
    छिन चुका है मिरे माँ-बाप का साया मुझसे
    खामोश कर देने वाला शेर !!!
    इल्मो-फ़न कितने मुनव्वर हैं सितारों की तरह
    कौन छीनेगा बसीरत का उजाला मुझसे
    यह उजाला वो उजाला है जिसे आप बाँटते है और इसी राह से कमाते हैं !!!
    बेठिकाना हूँ ज़माने में फ़क़ीरों की तरह
    किस लिये पूछते हो मेरा ठिकाना मुझसे
    किसी शाइर ने तश्बीह दी ठीक कि मेरे बयान ऐसे हैं जैसे किसी मासूम बच्चे के पापोश के सफेद चादर पर निशान होते हैं—मासूम और नर्म बयान !!!
    ‘नासिर’ इस तरह मुहब्बत की परस्तिश की है
    जगमगाता है मुहब्बत का घराना मुझसे
    ख्याल की पाकीज़गी और उसमे पिन्हा दुआओं ने अश आर चमका दिये हैं !!
    नासिर अली ‘नासिर’ –साहब !!! मुबरकबाद कुबूल कीजिये –मयंक

  3. nasir saheb ek umda gazal ke liye mubarakbad. Is sher pe khaas daad kubul farmaye
    बख़्श दे रब मुझे सरगर्म अमल की दुनिया
    सरबलंदी पे रहे मेरा घराना मुझसे

  4. काम ले ऐसा ज़बरदस्त ख़ुदाया मुझसे
    जगमगाता रहे हस्ती का सितारा मुझसे

    बैठ जाता है मज़े से वो मिरे कांधे पर
    किस क़दर हिल गया मासूम परिंदा मुझसे

    पूछिये मुझसे कि अहसासे-यतीमी क्या है
    छिन चुका है मिरे माँ-बाप का साया मुझसे

    KHOOB ASH’AAR NIKAALE HAI’N NAASIR SAAHAB AAPNE ”MUBAARAKBAAD”

  5. बढ़िया गज़ल हुई है नासिर साहब
    दाद कुबूल कीजिये

  6. बैठ जाता है मज़े से वो मिरे कांधे पर
    किस क़दर हिल गया मासूम परिंदा मुझसे

    भाई नासिर सोच में पड़ गया हूँ कि इतना सादा भी मज़्मून बांधा जा सकता है. बिलकुल बच्चे की सी तोतली मासूमियत नज़्म की है, सैकड़ों दाद क़ुबूल फ़रमाइये.

  7. ACHCHHI GHAZAL HAI JNB NAASIR SB….KAI SHER DUWAIYA RAnG KE HAIn …DAAD HAAZIR HAI

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