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मयंक का जन्मदिन है सो तुहफ़ा तो होना चाहिये-तुफ़ैल चतुर्वेदी

मयंक का जन्मदिन है सो तुहफ़ा तो होना चाहिये

तेरी यादों को फिर उभारा गया
फिर ग़ज़ल में लहू उतारा गया

इश्क़ के रास्तों की मत पूछो
दिल सा बांका जवान भी मारा गया

क़त्ल होना ही मेरी क़िस्मत थी
मैं उसी राह पर दुबारा गया

अपनी तस्वीर मांग ली उसने
ज़िन्दगी आख़िरी सहारा गया

नाम ले उसका मांग ले उसको
देख वो टूटता सितारा गया

आख़िरी वक़्त तक वफ़ा रक्खी
साथ मेरे मिरा किनारा गया

दूर तक झूट लहलहाता है
किस ज़मीं पर हमें उतारा गया

तुफ़ैल चतुर्वेदी                                                        09810387857

 

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4 comments on “मयंक का जन्मदिन है सो तुहफ़ा तो होना चाहिये-तुफ़ैल चतुर्वेदी

  1. kya kahne wah bahut khoob

  2. दादा !! प्रणाम !! लम्हा बख़्शा है ज़िन्दगी ने तो इसे जी लिया जाय !! जब अनुराग खामुशी तक का सफर कर लेता है तो शायद वहीं इसकी पराकाष्ठा भे होती है—इस समय भावना उसी धरातल पर है जिसे फलक भी कहते हैं !! मेरे पास शब्द नही है आपके प्रेम के लिये !!!
    तेरी यादों को फिर उभारा गया
    फिर ग़ज़ल में लहू उतारा गया
    जो आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है ??!! ये सुर्ख़ मंज़र दिल से जिगर तक उतरता है !! मतला आहट दे रहा है गज़ल के मूड की और दस्तक दे रहा है खामुशी के दर पर !!
    इश्क़ के रास्तों की मत पूछो
    दिल सा बांका जवान भी मारा गया
    तड्पूंगा उम्र भर दिले मरहूम के लिये // कम्बख़्त नामुराद लडकपन का यार था –यही दिल बचपन मे अपना संगी साथी था –हम्से रज़ामन्द रहता था –लेकिन जब बाँका जवान हो गया तो शहीद हो गया –फिर भी हम बेपरवाही मे ये कह सकते हैं कि जो हमारा था ही नही –
    मुझे दिल की ख़्ता पर यास शर्माना नही आता // पराया जुर्म अपने नाम लिखवाना नहीं आता –चंगेज़ी
    क़त्ल होना ही मेरी क़िस्मत थी
    मैं उसी राह पर दुबारा गया
    धर्म – मर्यादा – मूल्य और फलसफे –सब मक्तलो के ही तो पैरोकार हैं !! –पस्मंज़र मे बहुत कुछ गया ये शेर !!
    अपनी तस्वीर मांग ली उसने
    ज़िन्दगी आख़िरी सहारा गया
    मुहब्बत आखिरश ले आई है उस मोड पर मुझको
    तिरी तस्वीर अब देखूंगा खुद तस्वीर होने तक –मयंक
    एक ही मंज़र दिया ज़िन्दगी ने और वो भी किस्मत ने छीन लिया अब सियाहे का सफर है !!!
    नाम ले उसका मांग ले उसको
    देख वो टूटता सितारा गया
    दश्ते शब मे भतकती हुई सदाये !!! आसमान से टूटे हुये सितारे !!! उमीदो ने भी कहाम कहाँ सफर नही किया ??!!
    आख़िरी वक़्त तक वफ़ा रक्खी
    साथ मेरे मिरा किनारा गया
    पहले भी और आज भी इस शेर के सानी मिसरे पर मैं गिरह नही लगा पाया –कोई कोई चाबी एक्स्क्ल्यूसिव होती है !! ये शेर मुझे बहुत अपील करता है !!
    दूर तक झूट लहलहाता है
    किस ज़मीं पर हमें उतारा गया
    ये वही बुतों की ज़मीन है –ये वही खुदा का निज़ाम है – ये हिदोस्तान है – ये भेडिया धसान है –दादा !! कभी कभी सोचता हूँ हम शहादत क्यो देते हैं ज़िन्दगी के लिये मूल्यो के लिये मर्यादा के लिये –लेकिन फिर भी इस सवाल को शल करते हुये हाफिज़े से कई दलीले उठ खडी होती है –एक कथा याद पड रही है इस वक्त — एक बार एक अल्पबुद्धि नौजवान ने आसमान देखा तो उसे डर लगा कि कही ये धरती पर गिर गया तो क्या होगा ??!! वो बदहवासी मे भागा तो एक सन्यासी के पास पहुंचा और अपना सवाल पूछा कि “बाबा !! अगर आसमान ज़मीन पर गिर जाये तो क्या होगा कोई रोकने वाला तो है नही !!!”” संत ने कहा – “”बेटा आसमान को गिरने से रोकने के लिये खम्भे होते हैं –भगवान के बनाये हुये !! इसलिये ज़मीन पर नही गिरता !!!” तब नौजवान ने पूछा –”मुझे तो आज तक नही दिखे !! क्या आप दिखा सकते हैं ??!!” तब संत ने कहा –”सामने जो एक गाँव आबाद दीख रहा है उसमे जाओ और घरों के सामने गाली दे कर खाना माँगना !! फिर जो तुम्हरे साथ हो वो मुझे लौट कर बताना !!” –नौजवान देर बाद लौट कर आया तो संत ने पूछा -“बताओ क्या हुआ?!” –उसने कहा –”मै आपके आदेश के अनुसार हर घर के सामने गाली दे कर खाना माँग रहा था –तो लोग इकठ्ठे हुये और मुझे पीटना शुरू कर दिया – लेकिन इसी बीच एक बुढिया सबको हटाती हुई आयी उसके हाथ मे खाने की थाली थी—उसने उन लोगों से कहा कि इसे मत मारो –जब ये इतना भूखा है तो गाली नही देगा तो क्या करेगा”” –”फिर उस बुढिया ने मुझे खाना खिलाया पानी पिलाया और आशीर्वाद दे कर वापस भेज दिया” ॥ संत ने कहा – “देखो बेटा –वही बुढिया वो खम्भा है जिसके चलते आज तक आसमान उस गाँव पर नही गिरा –जब तक अच्छे लोग है दुनिया मे तब तक आसमान ज़मीन पर नही गिरेगा !! यही लोग वो खम्भे होते हैं जो आसमान को धरती पर गिरने से रोके हैं –जब अच्छे लोग नहीं रहेंगे –तब ही आसमान धरती पर गिरेगा !!””
    अभी आसमान ग़ज़ल की धरती पर नही गिरा है क्योंकि तुफैल साहब हैं!! और तुफैल साहब है तो लफ़्ज़ है –जब्कि कई (बे)लियाकत कुत्ते आसमान की ओर मुँह कर के अर्से से भौंक रहे हैं !!! –मयंक

  3. आख़िरी वक़्त तक वफ़ा रक्खी
    साथ मेरे मिरा किनारा गया

    वाह वाह…

  4. नाम ले उसका मांग ले उसको
    देख वो टूटता सितारा गया…Waah! Kya khoob!

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