16 टिप्पणियाँ

फ़रिश्ते ध्यान लगाए उतरने लगते हैं-रश्मि ‘सबा’

फ़रिश्ते ध्यान लगाए उतरने लगते हैं
जो साथ तुम हो तो लम्हे संवरने लगते हैं

वो एक याद की दस्तक जो दिल पे होती है
मेरे ख़ज़ाने के मोती बिखरने लगते हैं

उस इक निगाह की तासीर यूँ समझ लीजे
हम अपने आप से मिलने में डरने लगते हैं

ये आईने के अलावा सिफ़त किसी में नहीं
संवरने वाले सरापा बिखरने लगते हैं

सजानी होती है जिस रात चाँद को महफ़िल
सितारे शाम से छत पर उतरने लगते हैं

दिखाई दे तो लिपट जाऊं उस सदा से मै
कि जिसको सुन के ‘सबा’ फूल झरने लगते हैं

रश्मि ‘सबा’ 09425776305

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16 comments on “फ़रिश्ते ध्यान लगाए उतरने लगते हैं-रश्मि ‘सबा’

  1. क्या बात है….गुनगुनाये जाने वाली ग़ज़ल…इक नर्म अहसास के साथ….

  2. Masoom khayalo’n ki umdaa ghazal.wahh..bahut khoob rashmi ji..daad
    -Kanha

  3. Rashmi saahiba bahut achhi ghazal hui hai. Daad aur mubarakbaad qubool farmayeN.

  4. ये आईने के अलावा सिफ़त किसी में नहीं
    संवरने वाले सरापा बिखरने लगते हैं

    kya naqsh khhencha hai aapne…. mubaaraknbaad !!!
    umda ghazal

  5. वाह रश्मि जी. बहुत अच्छे शेर कहे हैं.. मतला बहुत पसंद आया.

    फ़रिश्ते ध्यान लगाए उतरने लगते हैं
    जो साथ तुम हो तो लम्हे संवरने लगते हैं

    वो एक याद की दस्तक जो दिल पे होती है
    मेरे ख़ज़ाने के मोती बिखरने लगते हैं

    उस इक निगाह की तासीर यूँ समझ लीजे
    हम अपने आप से मिलने में डरने लगते हैं

    ये आईने के अलावा सिफ़त किसी में नहीं
    संवरने वाले सरापा बिखरने लगते हैं

    सजानी होती है जिस रात चाँद को महफ़िल
    सितारे शाम से छत पर उतरने लगते हैं

    दिखाई दे तो लिपट जाऊं उस सदा से मै
    कि जिसको सुन के ‘सबा’ फूल झरने लगते हैं

  6. रश्मि ‘सबा’ जी !! अल्फाज़ बहुत नर्म नाज़ुक और ख्याल भी !!! बशीर बद्र इसी तरह की गज़ले कह कर सामईन के दिलो जान पर तारी हुये !!सभी शेर अच्छे हैं – इस शेर पर खास दाद !!
    वो एक याद की दस्तक जो दिल पे होती है
    मेरे ख़ज़ाने के मोती बिखरने लगते हैं

  7. उस इक निगाह की तासीर यूँ समझ लीजे
    हम अपने आप से मिलने में डरने लगते हैं
    खूबसूरत अभिव्यक्ति

  8. kya acchi ghazal hui hai rashmi ji waah waah… aur sadaaon se lipat jana to kamaal hai… daad qubulen…

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