3 Comments

इक गुले-तर भी शरर से निकला-बानी मनचंदा

इक गुले-तर भी शरर से निकला
बस के हर काम हुनर से निकला

मैं तेरे बाद, फिर ऐ गुमशुदगी
ख़ेमा-ए-गर्दे-सफ़र से निकला

ग़म निकलता न कभी सीने से
इक मुहब्बत की नज़र से निकला

ऐ सफ़े-अब्रे-रवां तेरे बाद
इक घना साया शजर से निकला

ज़िक्र फिर अपना, वहां मुद्दत बाद
किसी उनवाने-दिगर से निकला

हम के थे नश्शा-ए-महरूमी में
ये नया दर्द किधर से निकला

एक ठोकर पे सफ़र ख़त्म हुआ
एक सौदा था के सर से निकला

लम्हे, आदाबे-तल्सल्सुल से छुटे
मैं के इम्काने-सहर से निकला

सरे-मंज़िल खुला ऐ ‘बानी’
कौन किस राहगुज़र से निकला

-बानी मनचंदा साहब

Advertisements

3 comments on “इक गुले-तर भी शरर से निकला-बानी मनचंदा

  1. wah

  2. Kya kalaam hai ….. sajda !!!!!

  3. उम्दा कलाम. असरसार अशआर..

    इक गुले-तर भी शरर से निकला
    बस के हर काम हुनर से निकला

    मैं तेरे बाद, फिर ऐ गुमशुदगी
    ख़ेमा-ए-गर्दे-सफ़र से निकला

    ग़म निकलता न कभी सीने से
    इक मुहब्बत की नज़र से निकला

    ऐ सफ़े-अब्रे-रवां तेरे बाद
    इक घना साया शजर से निकला

    ज़िक्र फिर अपना, वहां मुद्दत बाद
    किसी उनवाने-दिगर से निकला

    हम के थे नश्शा-ए-महरूमी में
    ये नया दर्द किधर से निकला

    एक ठोकर पे सफ़र ख़त्म हुआ
    एक सौदा था के सर से निकला

    लम्हे, आदाबे-तल्सल्सुल से छुटे
    मैं के इम्काने-सहर से निकला

    सरे-मंज़िल खुला ऐ ‘बानी’
    कौन किस राहगुज़र से निकला

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: