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T-18/30 कुहासा छँट गया और उजाला हो गया है-नवीन सी चतुर्वेदी

[यक क़ाफ़िया ग़ज़ल]

कुहासा छँट गया और उजाला हो गया है
गगनचर चल गगन को सवेरा हो गया है

वो भी था एक ज़माना, कि कहता था ज़माना
चलो यमुना किनारे – सवेरा हो गया है

वो रातों की पढ़ाई और अम्मा की हिदायत
ज़रा कुछ देर सो ले – सवेरा हो गया है

बगल वाली छतों से कहाँ सुनना मिले अब
कि अब जाने दे बैरी – सवेरा हो गया है

कहीं जाने की जल्दी, कहीं इस बात का ग़म
शब उतरी भी नहीं और सवेरा हो गया है

न कुकड़ूँ-कूँ हुई और न ठण्डक है हवा में
तो फिर हम कैसे मानें सवेरा हो गया है

न जाने क्यूँ वो औघड़ बिफर उठ्ठा था हम पर
कहा जैसे ही उस से – सवेरा हो गया है

नवीन सी चतुर्वेदी 09967024593

इस ज़मीन पर नवीन की पुरानी ग़ज़ल

मेरे रुतबे में थोड़ा इज़ाफ़ा हो गया है
अजब तो था मगर अब अजूबा हो गया है

अब अहले-दौर इस को तरक़्क़ी ही कहेंगे
जहाँ दगरा था वाँ अब खरञ्जा हो गया है

छबीले तेरी छब ने किया है ऐसा जादू
क़बीले का क़बीला छबीला हो गया है

वो ठहरी सी निगाहें भला क्यूँ कर न ठुमकें
कि उन का लाड़ला अब कमाता हो गया है

अजल से ही तमन्ना रही सरताज लेकिन
तलब का तर्जुमा अब तमाशा हो गया है

तेरे ग़म की नदी में बस इक क़तरा बचा था
वो आँसू भी बिल-आख़िर रवाना हो गया है

न कोई कह रहा कुछ न कोई सुन रहा कुछ
चलो सामान उठाओ इशारा हो गया है

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14 comments on “T-18/30 कुहासा छँट गया और उजाला हो गया है-नवीन सी चतुर्वेदी

  1. बड़े खूबसूरत अश’आर हैं नवीन भाई, बिल्कुल आपके स्टाइल में। दाद कुबूल करें।

  2. Dada Ghazal padhne ka bilkul naya ehsas mila…ek kafiye ki ghazal pehli baar padhi..har kafiya bakhoobi nibhaya gaya hai…wahh…dono ghazale’n shandar..sadar
    -Kanha

  3. वो रातों की पढ़ाई और अम्मा की हिदायत
    ज़रा कुछ देर सो ले – सवेरा हो गया है

    बगल वाली छतों से कहाँ सुनना मिले अब
    कि अब जाने दे बैरी – सवेरा हो गया है

    कहीं जाने की जल्दी, कहीं इस बात का ग़म
    शब उतरी भी नहीं और सवेरा हो गया है
    आ. नवीन भाईसाहब एक ही काफ़िये पर कमाल के अशहार निकाले है आपने |आपकी कलम को सलाम
    दोनों ग़ज़ले मन को भा गई | ढेरों दाद कबूल फरमाएं
    सादर

  4. WAAH , NAVEEN SAHAB, YAK QAAFIYA GHAZAL KAMAAL HAI. MUBAARAKBAAD

  5. छबीले तेरी छब ने किया है ऐसा जादू
    क़बीले का क़बीला छबीला हो गया है

    आदरणीय नवीन सी चतुर्वेदी साहब, ये घड़ी भी आती है !!;
    किसी आप जैसे Master की ज़िन्दगी में ही आती हो शायद !
    क्या ग़ज़ब लिखा है साहब !
    हरुफ़ के बादशाह को सलाम !
    दाद क्या दूं !!!!!!

  6. यक काफिया ग़ज़ल कविता जैसा आनन्द दे रही है !! Nostalgia !! भरपूर है इसमे !! अपने सम्य की वो बाते जो तब आम फहम थी –लेकिन अब ज़िन्दगी के ये रंग और मंज़र देखने को नहीं मिल्ते !! दूसरी ग़ज़ल नवीन की स्तीरियोटाइप गज़ल है क्योंकि इसमे … ज़िन्दगी , समाजवाद , फल्सफा , तंज़ और प्रयोग्वाद सभी कुछ भरपूर है !!! इसमे .. रुतबे का इज़ाफा बड़ी अनोखी अदा से बयाँ किया गया है ये गालिबाना रंग है …. दगरे का खड़्ंजा बनाना भी कथित प्रगति का प्रश्नचिन्ह है !!! छबीला तो मथुरा वाला ही है और .. लाडला कमाता हुआ तो मध्यम वर्ग की आँखो की चमक शेर मे दिखाई गई है !! तलब का तर्ज़ुमा तमाशा हो गया है ये अधोमुखी जीवन मूल्यो का तज़्करा है … और शिल्प का सुन्दर विन्यास –वो आँसू भी बिलाअखिर ….. मे नुमाया हुआ है …. एक खामुशी न कोई कह रहा है न कोई सुन रहा है ….. इस बात की तस्दीक़ कर रही है कि चलो सामान उठाओ ….. !!!!! नवीन अपनी बात खुद कहते गढते है और रिवायत से कुछ नही लेते अलग हट कर एक नई बात कहते है जो बहुधा तस्लीम होती है और कभी कभी बड़े चमत्कारिक शेर निकलते हैं इससे !! बहुत खूब –नवीन भाई !! गज़ल –गज़लो के लिये बधाई !! –मयंक

    • प्रणाम आदरणीय। शायर सपने में भी नहीं सोचता, उस जगह से मूल्याङ्कन आरम्भ करते हैं आप। समीक्षा-जगत को नये आयाम प्रदान करने वाले विद्वान की टिप्पणी से एक अति-साधारण सी प्रस्तुति विशिष्ट लग रही है। बहुत-बहुत आभारी हूँ मयङ्क साहब। स्नेह बना रहे।

  7. pahli ghazal meN jahaaN aap ne san’at yani kareegari se kaam liya hai..YAK QAFIYA ghazal aaj bahut kan=m dekhne ko milti hai…aap ne aik lafz ko mukhtalif zawiyoN se khoob baaNdha hai…aur nibhaya hai…fan ke saath…
    wahiN doosri ghazal meN mukhtalif qawaafi ke saath aap ne fikr ko zaahir kiya hai khoobsoorti ke saath…dheroN daad aur mubarakbaad ..DR.AZAM

    • बेहद मशकूर हूँ डाक्टर साहब। अरूज़ के जानकार का कमेण्ट, ग़ज़ल की ख़ूबसूरती में चार-चाँद लगा देता हूँ। करम बना रहे।

  8. Kya kya kya kya kya sher kahe bhai…. mubarakbaad qubool keejiye.

  9. ग़ज़ल को तरही में जगह देने के लिये बहुत-बहुत शुक्रिया दादा

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