26 टिप्पणियाँ

T-18/12 बरामद चाहतों का नतीजा हो गया है-इरशाद ख़ान सिकंदर

बरामद चाहतों का नतीजा हो गया है
ख़ुदा के फ़ज़्ल से घर मुहल्ला हो गया है

किताबों को जला दो सनद का क्या करोगे
कि जब हावी क़लम पर अगूंठा हो गया है

किया था फ़ोन किसको उठाया फ़ोन किसने
मिरी दीवानगी का कबाड़ा हो गया है

किया है इश्क़ मुझसे करोगे इश्क़ मुझसे
ये कैसेट चेंज कर दो पुराना हो गया है

हुई फ़ुर्क़त में तेरी रियाज़त खूब मेरी
गला रो रो के मेरा सुरीला हो गया है

मुझी से कह रहा है मिरे बारे में ज़ालिम
मुझे गुज़रे जहाँ से ज़माना हो गया है

नज़र आने लगा है नतीजा वर्ज़िशों का
समूचा जिस्म तेरा लचीला हो गया है

तुझे कुछ इल्म भी है मिरा बेटा पड़ोसन
तिरी बेटी के कारण लफंगा हो गया है

बचत कपड़ों की इतनी कहा थी अबसे पहले
मिरा रूमाल उसका दपुट्टा हो गया है

नया कुछ राग छेड़ो अमां बेलाग छेड़ो
कोई ऊधम मचाये महीना हो गया है

निकम्मा इश्क़ इक दिन हुआ कमबख़्त साहब
सिनेमा देख कर अब कमीना हो गया

कहूँ कुछ उससे पहले चचा कह देती है वो

मिरी चाहत का दुश्मन बुढ़ापा हो गया है

इरशाद ख़ान सिकंदर 09818354784

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26 comments on “T-18/12 बरामद चाहतों का नतीजा हो गया है-इरशाद ख़ान सिकंदर

  1. बहुत खूब सिकंदर साहब। इस ज़मीन पर मज़ाहिया ग़ज़ल कहना आसान नहीं है। आप बड़ी खूबसूरती से इतने अश’आर निकाल ले आए। दिली दाद कुबूल कीजिए।

  2. बचत कपड़ों की इतनी कहा थी अबसे पहले
    मिरा रूमाल उसका दपुट्टा हो गया है..hahahaha..wahh dada….apke andaz ki pehchan..daad..
    -kanha

  3. किताबों को जला दो सनद का क्या करोगे
    कि जब हावी क़लम पर अगूंठा हो गया है

    हुई फ़ुर्क़त में तेरी रियाज़त खूब मेरी
    गला रो रो के मेरा सुरीला हो गया है
    आ. इरशाद भाई मुक़म्मल इरशाद क्या रंग बिखेरे हैं आपने ….
    एक नए अंदाज़ की ग़ज़ल के लिये ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें
    सादर

  4. किया था फ़ोन किसको उठाया फ़ोन किसने
    मिरी दीवानगी का कबाड़ा हो गया है

    हा हा हा हा क्या शानदार ग़ज़ल हुई है बड़े भैया , आपका ये अंदाज़ बहुत पसंद आया 🙂

  5. इरशाद…इरशाद…इरशाद हम यूं ही नहीं कहते भाई।
    क्‍या बात…क्‍या बात।

  6. वाह वाह वाह वाह वाह वाह !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! और कोई शब्द ही नहीं है मेरे पास!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!

  7. Hazal khoob kahi hai Irshad bhai !!!
    बरामद चाहतों का नतीजा हो गया है
    ख़ुदा के फ़ज़्ल से घर मुहल्ला हो गया है
    Laloo se prerit ho kar ye sher kaha hai shaid !!!

    किताबों को जला दो सनद का क्या करोगे
    कि जब हावी क़लम पर अगूंठा हो गया है
    Ladi utha ke ghat pe jaane lage hiran
    kaise ajeeb daur me paida hua hun main –basheer badra

    किया था फ़ोन किसको उठाया फ़ोन किसने
    मिरी दीवानगी का कबाड़ा हो गया है
    kabhi kabhi sahi no dial karane par bhi -nuksaan ho jaata hai
    किया है इश्क़ मुझसे करोगे इश्क़ मुझसे
    ये कैसेट चेंज कर दो पुराना हो गया है
    mujhe ishtihaar si lagati hain ye muhabbaton ki kahaniyan
    Jo kaha nahin wo suna karo jo suna nahin wo kaha karo –basheer

    हुई फ़ुर्क़त में तेरी रियाज़त खूब मेरी
    गला रो रो के मेरा सुरीला हो गया है
    wah wah !!!

    मुझी से कह रहा है मिरे बारे में ज़ालिम
    मुझे गुज़रे जहाँ से ज़माना हो गया है
    wo janta nahin ki ghalib kaun hain !!

    नज़र आने लगा है नतीजा वर्ज़िशों का
    समूचा जिस्म तेरा लचीला हो गया है
    malik badan ki ye loch bani rahe !! waise locha hone tak badan ki loch bani rahati bhi hai !!
    तुझे कुछ इल्म भी है मिरा बेटा पड़ोसन
    तिरी बेटी के कारण लफंगा हो गया है
    mere man ke gangajal ko ik din itra ban degi
    Ik pados ki ladki mujhako vishwamitra bana degi –mayank

    बचत कपड़ों की इतनी कहा थी अबसे पहले
    मिरा रूमाल उसका दपुट्टा हो गया है
    mallika sherawwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwwat !!!!

    नया कुछ राग छेड़ो अमां बेलाग छेड़ो
    कोई ऊधम मचाये महीना हो गया है
    oodham ki zaroorat nahin Achche din aane wale hain ):):):):

    निकम्मा इश्क़ इक दिन हुआ कमबख़्त साहब
    सिनेमा देख कर अब कमीना हो गया
    Wah wah !! Irshaad bhai !! MUQARRAR MUQARRAR !!!

  8. बरामद चाहतों का नतीजा हो गया है
    ख़ुदा के फ़ज़्ल से घर मुहल्ला हो गया है

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    किताबों को जला दो सनद का क्या करोगे
    कि जब हावी क़लम पर अगूंठा हो गया है

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    किया है इश्क़ मुझसे करोगे इश्क़ मुझसे
    ये कैसेट चेंज कर दो पुराना हो गया है

    ****************************************
    हुई फ़ुर्क़त में तेरी रियाज़त खूब मेरी
    गला रो रो के मेरा सुरीला हो गया है

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    मुझी से कह रहा है मिरे बारे में ज़ालिम
    मुझे गुज़रे जहाँ से ज़माना हो गया है

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    तुझे कुछ इल्म भी है मिरा बेटा पड़ोसन
    तिरी बेटी के कारण लफंगा हो गया है

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    बचत कपड़ों की इतनी कहा थी अबसे पहले
    मिरा रूमाल उसका दपुट्टा हो गया है

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    नया कुछ राग छेड़ो अमां बेलाग छेड़ो
    कोई ऊधम मचाये महीना हो गया है

    बेहद उम्दा अश’आर, सेन्स ऑफ़ ह्यूमर का कोई सानी नहीं…
    कृपया बधाई स्वीकार करें….

  9. बरामद चाहतों का नतीजा हो गया है
    ख़ुदा के फ़ज़्ल से घर मुहल्ला हो गया है

    किताबों को जला दो सनद का क्या करोगे
    कि जब हावी क़लम पर अगूंठा हो गया है

    WAAH WAAH SIKANDAR SAHAB DAAD HAAZIR HAI.

  10. किताबों को जला दो सनद का क्या करोगे
    कि जब हावी क़लम पर अगूंठा हो गया है

    वाह दादा….दोनो ग़ज़ल उम्दा। प्रणाम।

  11. वाह बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही है बधाई स्वीकारें
    हुई फ़ुर्क़त में तेरी रियाज़त खूब मेरी
    गला रो रो के मेरा सुरीला हो गया है

    तुझे कुछ इल्म भी है मिरा बेटा पड़ोसन
    तिरी बेटी के कारण लफंगा हो गया है
    khoob……

  12. aise aise qawaafi kabhhi ghazal ka hissa baneNge…hamaarey rawayat pasand aur aaj kal ke shora ki nazroN meN KUND ZEHN qadeem shora soch bhi nahiN sakte the…behad behad jadeed ghazal par daad haazir hai…Dr.Azam

  13. मेरा पीछा छुटा है दोबारा फ्रैश होकर
    जो अब जा पेट खाली हमारा हो गया है।।😊

    जनाब इरशाद ख़ान ‘सिकन्दर’ साहब, गुस्ताखी मुआफ़, दाद क़बूल फरमाऐ ।
    Sense of humour से भरा आपका ये वक्तव्य कमाल है।
    पहली ग़ज़ल बेहतर थी , तो ये बेहतरीन रही।
    हजारों हज़ार दाद!!!!!!

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