15 टिप्पणियाँ

T-18/11 मिरे सपने गिरे हैं छनाका हो गया है-स्वप्निल तिवारी

मिरे सपने गिरे हैं छनाका हो गया है
ज़माना जाग उठा है सवेरा हो गया है

नदी से धड़कनों की शजर तक आंसुओं के
ये सारा ही इलाक़ा ग़मों का हो गया है

ये दिल जो नाचता था कभी एड़ी के बल पर
यही बेचैनियों का बगूला हो गया है

तुम्हारी याद के पर निकलने लग गए हैं
कि अब ये सांप शायद पुराना हो गया

तिलावत कर रहा हूँ मैं सुब्हो-शाम इसकी
तिरा चेहरा ही मुझको सहीफ़ा हो गया है

तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया है

कोई नक़्शा नहीं है जो ले कर जाय दिल तक
कि वो डूबा हुआ इक ख़ज़ाना हो गया है

बदल कर रूप मुझको वो फिर आया पकड़ने
‘अँधेरा तिलमिला कर सवेरा गया है’

रखे हैं पाँव इसमें थकी सी शाम ने फिर
समंदर झिलमिला कर सुनहरा हो गया है

कोई सिग्नल है दुनिया जहां ठहरे हैं हम सब
चलो अब चल पड़ें बस इशारा हो गया है

यहाँ से भाग तू भी ये घर अब छोड़ ‘आतिश’
तू अब इस जलते घर में अकेला हो गया है

स्वप्निल तिवारी 08879464730

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15 comments on “T-18/11 मिरे सपने गिरे हैं छनाका हो गया है-स्वप्निल तिवारी

  1. यहाँ से भाग तू भी ये घर अब छोड़ ‘आतिश’
    तू अब इस जलते घर में अकेला हो गया है..kya kahne bhaai kya kahne! kai roz se ye sher haavi hai! Wah! Waah!

  2. बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल हुई है स्वप्निल साहब। ये अश’आर तो बेहद शानदार लगे।

    मिरे सपने गिरे हैं छनाका हो गया है
    ज़माना जाग उठा है सवेरा हो गया है

    तुम्हारी याद के पर निकलने लग गए हैं
    कि अब ये सांप शायद पुराना हो गया

    तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
    ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया है

    रखे हैं पाँव इसमें थकी सी शाम ने फिर
    समंदर झिलमिला कर सुनहरा हो गया है

    दिली दाद कुबूल कीजिए

  3. Dada sadar pranam….bahut umdaa ghazal hamesha ki tarah ..ek ek she’r moti jaisi chamak liye hue….har she’r bahut pasand aaya…daad qubool kare’n
    _Kanha

  4. ये दिल जो नाचता था कभी एड़ी के बल पर
    यही बेचैनियों का बगूला हो गया है

    तुम्हारी याद के पर निकलने लग गए हैं
    कि अब ये सांप शायद पुराना हो गया
    नायाब अशहार हुए हैं आतिश साहब , ढेरों दाद कबूल फरमाएं |और यह शेर तो कमाल का बन पड़ा है ,नज़र ना लगे वाह …..वाह … वाह ही वाह
    तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
    ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया है
    सादर

  5. बहुत खूब बहुत खूब। हमेशा की तरह।
    स्‍वप्निल भाई।
    बहुत बधाई।
    नवनीत

  6. ग़ज़ल आई है उसकी ,. उजाला हो गया है
    मेरी अदबी समझ में इज़ाफ़ा हो गया है

    कहाँ से शुरूवात करूँ ? अभी तक तो मत्ले का छनाका ही ज़ह्न में गूँज रहा है ,

    मेरे सपने गिरे हैं छनाका हो गया है ,
    ज़माना जाग उठा है सवेरा हो गया है

    इससे अच्छा मतला शायद ही इस मुशायरे में आए

    नदी से धड़कनों की शजर तक आंसुओं के
    ये सारा ही इलाक़ा ग़मों का हो गया है

    वाह वाह वाह , मुक़र्रर मुक़र्रर

    वो “आतिश” अब अदब का सितारा हो गया है
    ग़ज़ल का ये इलाक़ा उसी का हो गया है

    तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
    ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया है

    क्या कहूँ , उस आवाज़ के गुज़रने का इंतज़ार है

    रखे हैं पाँव इसमें थकी सी शाम ने फिर
    समंदर झिलमिला कर सुनहरा हो गया है

    मंज़रकशी में आपका कोई सानी नही है

    इस ज़मीन में ऐसी ग़ज़ल , वाह भैया , मज़ा आ गया 🙂

  7. ये दिल जो नाचता था कभी एड़ी के बल पर
    यही बेचैनियों का बगूला हो गया है

    तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
    ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया है

    कोई सिग्नल है दुनिया जहां ठहरे हैं हम सब
    चलो अब चल पड़ें बस इशारा हो गया है

    यहाँ से भाग तू भी ये घर अब छोड़ ‘आतिश’
    तू अब इस जलते घर में अकेला हो गया है

    हर शेर काबिले दाद है, इस शायराना शख्शियत को सलाम….

  8. BEHTAREEN GHAZAL, KHAAS TAUR PAR YE SHER PADH KAR TO MAZA AA GAYA

    तिलावत कर रहा हूँ मैं सुब्हो-शाम इसकी
    तिरा चेहरा ही मुझको सहीफ़ा हो गया है
    HAASILE-GHAZAL SHER DAAD QABOOL KARE’N.

  9. तिलावत कर रहा हूँ मैं सुब्हो-शाम इसकी
    तिरा चेहरा ही मुझको सहीफ़ा हो गया है

    तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
    ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया

    दादा प्रणाम।इस से ज्यादा क्या कहूँ। बस आशीर्वाद दीजिये।

  10. kai sher apni diction aur aap ke makhsoos tewar ki wajh se bahut acchhchhe ban paDe haiN..SAMUNDAR JHILMILA KAR ,SUNAHRA HO GAYA HAI
    bahut khoob ..daad hi daad..DR.AZAM

  11. Bahut umda she’r huye hain swapanil bhai…

    तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
    ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया है

    Lajawab kya kehne….!!

  12. Bhai Ghazal to bharpoor kahi hai aapne, behad mubarkbaad!! aur in ashaar par alag se daad…

    मिरे सपने गिरे हैं छनाका हो गया है
    ज़माना जाग उठा है सवेरा हो गया है

    तुम्हारी याद के पर निकलने लग गए हैं
    कि अब ये सांप शायद पुराना हो गया

    तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
    ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया है

    रखे हैं पाँव इसमें थकी सी शाम ने फिर
    समंदर झिलमिला कर सुनहरा हो गया है

    # Asif Amaan

  13. मिरे सपने गिरे हैं छनाका हो गया है
    ज़माना जाग उठा है सवेरा हो गया है
    बेदारियों ने तोड़ दिये ख़्वाब वाब सब !!! किसी का स्वप्न खण्डित हुआ तो उसके द्वस्त होने से ज़माना जाग उठा –नया तस्व्वुर नया ख्याल !! भई क्योंन हो स्वप्निल का शेर है !!!
    नदी से धड़कनों की शजर तक आंसुओं के
    ये सारा ही इलाक़ा ग़मों का हो गया है
    अजब नहीं कि उगें यँ दरख़्त पानी के
    कि अश्क बोये हैं शब भर किसी ने धरती में –शिकेब
    इस शेर के 50 बरस बाद अब आँसुओं के शजर –शाइरी की ज़ीनत हैं –शेर के शिल्प पर दाद !!
    ये दिल जो नाचता था कभी एड़ी के बल पर
    यही बेचैनियों का बगूला हो गया है
    क्या मंज़र है और क्या मुहावरों का सतीक इस्तेमाल है !!
    तुम्हारी याद के पर निकलने लग गए हैं
    कि अब ये सांप शायद पुराना हो गया
    बहुत खूब !!! पुराने साँप के पर निकल आते हैं और वो उड़ने लगता है !!! कोई भी माइथालोजिकल स्टोरी जब पुराने हुई तो कल्पना के पंख और ज़ियादा परवाज़ देते हैं उस ख्याल को !! बहुत खूब स्वप्निल बहुत खूब !!!
    तिरी आवाज़ गुज़रे तो इसकी नोक टूटे
    ये सन्नाटा बहुत ही नुकीला हो गया है
    ये सन्नाटा चुभ रहा है – तेरी सदा का मुंतज़िर हूँ – लेकिन क्या पैरहन दिये हैं इस खयाल को इस शेर ने वाह !!!
    कोई सिग्नल है दुनिया जहां ठहरे हैं हम सब
    चलो अब चल पड़ें बस इशारा हो गया है
    बस एक रात का सफर है क्या गिला कीजै
    मुसाफिरों को गनीमत है ये सराय बहुत –शिकेब
    यहाँ से भाग तू भी ये घर अब छोड़ ‘आतिश’
    तू अब इस जलते घर में अकेला हो गया है
    स्वप्निल भाई !!! इसी घर के एक कमरे में मैं भी हूँ !! उमीद है कि घटा बरसेगी और हम बच जायेंगे !! नहीं भी बरसी तो हमारा सोने का दिल हमारी निशान्देही करेगा !! फिक्र न करो !!—मयंक

  14. behtaren behtareen behtareen bilkul wisi hi ghazal jaisi aapse ummeed ki jaati hai
    poori ki poori ghazal achchhi hui mubatakbaad qubool keejiye..

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