27 टिप्पणियाँ

T-18/8 पिघल कर आस्माॅँ भी सुनहरा हो गया है-पवन कुमार

पिघल कर आस्माॅँ भी सुनहरा हो गया है
नये मंजर तलाशो उफुक वा हो गया है

सुना है दुश्मनों में इज़ाफ़ा हो गया है
इधर का था जो अब तक उधर का हो गया है

मरोड़ी बाॅँह शब की जो सूरज ने अचानक
अंधेरा तिलमिलाकर सवेरा हो गया है

सियासत कम नहीं है किसी बाज़ीगरी से
जो यकजा कर रहा था वो तन्हा हो गया है

किसी की रहमतों का यकीनन ये असर है
मिरा कद आज मुझसे जि़यादा हो गया है

ज़रा सी जल्दबाजी गज़ब क्या ढा गई है
वो खुलना चाहता था बरहना हो गया है

बहुत महदूद था वो कभी गीराईयों में
सिमट कर जो अचानक फ़लक सा हो गया है

मसाफ़त की हमारे कोई तो इन्तिहा हो
जिसे होना था मंजिल वो रस्ता हो गया है

वो आंखें खुल रही हैं किसी मतले की सूरत
बदन उसका सरापा ग़ज़ल सा हो गया है।

पवन कुमार 09454417552

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27 comments on “T-18/8 पिघल कर आस्माॅँ भी सुनहरा हो गया है-पवन कुमार

  1. पवन कुमार जी,

    ज़रा सी जल्दबाजी गज़ब क्या ढा गई है
    वो खुलना चाहता था बरहना हो गया है

    मसाफ़त की हमारे कोई तो इन्तिहा हो
    जिसे होना था मंजिल वो रस्ता हो गया है

    वो आंखें खुल रही हैं किसी मतले की सूरत
    बदन उसका सरापा ग़ज़ल सा हो गया है।

    ख़ूब अशआर हुए हैं। दाद क़ुबूल फ़रमाएं।

  2. बहुत खूब पवन साहब। अच्छे अश’आर हुए हैं। दिली दाद कुबूल कीजिए

  3. Bahut hi behatreen ghazal hui hai bhaiya..wahhh..sare ke sare ash’aar khoob pasand aaye…bahut badhiya girah baandhi hai aapne…dhero’n daad..sadar
    – Kanha

  4. आदरणीय पवन भाई साहब।
    क्‍या ही उम्‍दा कलाम।
    बहुत अच्‍छी ग़ज़ल।
    सारी ग़ज़ल बेहतरीन लेकिन ये शे’र लूट कर ले गया :

    किसी की रहमतों का यकीनन ये असर है
    मिरा कद आज मुझसे जि़यादा हो गया है

    आपको पढ़ने की तलब रहती है।
    सादर
    नवनीत

  5. किसी की रहमतों का यकीनन ये असर है
    मिरा कद आज मुझसे जि़यादा हो गया है

    वो आंखें खुल रही हैं किसी मतले की सूरत
    बदन उसका सरापा ग़ज़ल सा हो गया है। WAAH , MUBAARAK BAAD.

  6. SHAANDAAR…JAANDAAR…
    KAI SHER..APNI JIDDAT BAYANI SE CHAUnKA RAHE HAIn..
    kai sher apni rawayat pasandi ka bhi izhaar kar rahe haiN..
    HASEEn aamezish hai..
    aap ko daad is baat ki bhi ki aap ne jiddat taraazi ke naam par..phoohaD QAAFIYOn ka sahara nahiN liya hai…
    bahut khoob..DR.AZAM

  7. Beshaq ye is tarahi ki sabse umda ghazal hai…har ek she’r lajawab hai…bahut umda bemisaal…daad kubool kijiye sir!

  8. Pawan ji bahut umda ghazal hui hai… matla girah aakhir sher aur barahna ho gaya hai.. to kamaal hue hain.. dili daad…

  9. behad mushkil behr mein bahut khoobsoorat ghazal, kaee misre nayapan liye hue hai’n ,bahut se ashaar yaad rakhne laeq hue hai’n ,mubarak ho sir ji

  10. वो आंखें खुल रही हैं किसी मतले की सूरत
    बदन उसका सरापा ग़ज़ल सा हो गया है
    बहुत खूबसूरत !!!!
    मसाफ़त की हमारे कोई तो इन्तिहा हो
    जिसे होना था मंज़िल वो रस्ता हो गया है
    सच में !!!!!!!!
    दिली दाद!

  11. Janab Pawan Sb aapki ghazal mere hisaab se ab tak ki sabse umda ghazal hai.. aur shayad is meyaar ki ghazal ek ya do hi aaeiN.. dili mubarakbaad!!

  12. पिघल कर आस्माॅँ भी सुनहरा हो गया है
    नये मंजर तलाशो उफुक वा हो गया है

    बेहद खूबसूरत मतला है, वाह उफक का वा होना , आसमान का पिघल कर सुनहरा हो जाना , कमाल

    मरोड़ी बाॅँह शब की जो सूरज ने अचानक
    अंधेरा तिलमिलाकर सवेरा हो गया है

    वाह वाह , अच्छी गिरह बाँधी है आपने , सूरज का शब की बाहें मरोड़ना 🙂

    बहुत महदूद था वो कभी गीराईयों में
    सिमट कर जो अचानक फ़लक सा हो गया है

    मसाफ़त की हमारे कोई तो इन्तिहा हो
    जिसे होना था मंजिल वो रस्ता हो गया है

    क्या ही अच्छी ग़ज़ल है पवन जी, पढ़ कर दिल खुश हो गया 🙂

  13. Kya kahne pawan sahab der aayad durust aayad …….bahut dino baad lafz par dastak hui apki..
    aur itni khoobsoorat dastak ki dil baagh baagh ho gaya..mubarakbaad qubool karen

  14. ज़रा सी जल्दबाजी गज़ब क्या ढा गई है
    वो खुलना चाहता था बरहना हो गया है

    किसी की रहमतों का यकीनन ये असर है
    मिरा कद आज मुझसे जि़यादा हो गया है
    आ.पवन सा. निहायत खुबसूरत ग़ज़ल और नायाब अशहार के लिए दिलिमुबारकबाद कबूल फरमाएं
    सादर

  15. पिघल कर आस्माॅँ भी सुनहरा हो गया है
    नये मंजर तलाशो उफुक वा हो गया है
    माहौल सियासी है !!! पवन साहब !! मेरे भीतर अदबी ज़ाविये इधर सिकुड़ गए है- और न्यूज़ चैनल हावी है –मतले पर दाद !!! एक शेर मूल शाइर से क्षमा याचना सहित —
    चढ़ते सूरज को लोग जल देंगे
    और कुछ है जो भौं पे बल देंगे

    सुना है दुश्मनों में इज़ाफ़ा हो गया है
    इधर का था जो अब तक उधर का हो गया है
    जय लालू यादव -अब राजद और जे डी यूं मिलेंगे !!

    मरोड़ी बाॅँह शब की जो सूरज ने अचानक
    अंधेरा तिलमिलाकर सवेरा हो गया है
    उम्मीद है ये शेर हमारे मुस्तकबिल का दस्तावेज़ बने !! बहुत सुन्दर गिरह लगाई है आपने !!!

    सियासत कम नहीं है किसी बाज़ीगरी से
    जो यकजा कर रहा था वो तन्हा हो गया है

    जय तीसरा मोर्चा !! जय कम्यूनिस्ट पार्टी !! ५ बरस का एक छोटा सा ब्रेक लेते है–

    किसी की रहमतों का यकीनन ये असर है
    मिरा कद आज मुझसे जि़यादा हो गया है

    मेरे आगे बड़ी मुश्किल खड़ी है
    मिरी शुहरत मेरे कद से बड़ी है
    मालिक की मेहर पर आपमे कर्म की मुहर काफी है

    ज़रा सी जल्दबाजी गज़ब क्या ढा गई है
    वो खुलना चाहता था बरहना हो गया है
    जय केजरी वाल !! ४ तमाचे ४ सीटें –बहुत खूब बहुत खूब !!!

    बहुत महदूद था वो कभी गीराईयों में
    सिमट कर जो अचानक फ़लक सा हो गया है
    जय राजनाथ !!! वक्त मेहरबान तो ठाकुर पहलवान हो गए !!

    मसाफ़त की हमारे कोई तो इन्तिहा हो
    जिसे होना था मंजिल वो रस्ता हो गया है
    जय आडवाणी जी !! जिसे होना था मंजिल वो रस्ता हो गया है…..

    वो आंखें खुल रही हैं किसी मतले की सूरत
    बदन उसका सरापा ग़ज़ल सा हो गया है

    जय प्रियंका बहन !! मुआफ़ी के साथ पवन साहब !!उनके लिए तरमीम के साथ ये शेर —

    वो आँखे खुल रही है किसी मितली के कारण
    बदन उसका सरापा हज़ल सा हो गया है

    पवन साहब !! ये तब्सरा सिर्फ मूड और माहौल के कारण वगरना !! आपकी ग़ज़ल इतनी सुन्दर है कि -शायद इस पाये की दूसरी ग़ज़ल इस तरही में अब न आये !!! ज़बान बेहद रवां !! बयान पुर असर और फिक्रो फन और मेयार की पूरी पासबानी के साथ शायरी की है आपने !!! अपनी मसरूफियत के बाद आप कैसे वक्त निकालते है तख़्लीक़ के लिए मुझे रश्क भी होता है आपसे और मैं अहसासे – कमतरी से भर भी जाता हूँ !! सच ये है की आपसे प्रेरणा मिलाती है –ग़ज़ल पर एक बार फिर दाद !!! –मयंक

  16. kya kahne pawan sahab……bahut achhi ghazal kahi hai…..bahut-2 mubaarakbaad….

  17. बेहद उम्दा ग़ज़ल के लिए बहुत-२ मुबारकबाद पवन साहब…

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