31 टिप्पणियाँ

T-18/6 सियासतदाँ हमारा मसीहा हो गया है-‘खुरशीद’खैराड़ी

सियासतदाँ हमारा मसीहा हो गया है
ग़रीबी का हमारी तमाशा हो गया है

अज़ल से देखता हूं यही सपना सुहाना
शबे-ग़म ढल गई है उजाला हो गया है

मरासिम के वसन में मनाफ़िज़ हैं हज़ारों
कठिन उरयानगी को छुपाना हो गया है

तुझे छूकर नसों में रवाँ है बर्क़ सा क्या
पिघलकर जोश मन का ,पसीना हो गया है

तुझे सोचूं तो भरने लगे है चौकड़ी सी
तसव्वुर दिल के बन में ग़ज़ाला हो गया है

जिधर भी देखता हूं तुझे ही देखता हूं
कोई मुझ को बतादे मुझे क्या हो गया है

अनय के सामने मैं झुकाऊंगा नहीं सिर
दिनोंदिन और पक्का इरादा हो गया है

हया से सच सिमट कर कहाँ जाये बता दो
हबीबों झूठ उरयाँ सरापा हो गया है

जबीं पर गाँव की क्यूं लिखी है बदनसीबी
दुपहरी में भी हर सू अँधेरा हो गया है

बड़े मासूम हैं जी मिरे देहातवासी
इन्हें फिर राहज़न पर भरोसा हो गया है

मुक़द्दस है ग़ज़ल तू मुनव्वर है ग़ज़ल तू
तेरे छूते ही ज़र्रा सितारा हो गया है

उफ़ुक़ के गाल पर फिर रखे ‘खुरशीद’ ने लब
‘अँधेरा तिलमिलाकर सवेरा हो गया है

‘खुरशीद’खैराड़ी 09413408422

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31 comments on “T-18/6 सियासतदाँ हमारा मसीहा हो गया है-‘खुरशीद’खैराड़ी

  1. Bahut achhi ghazal hui hai Khursheed ji…sare she’r bahut pasand aaye….
    उफ़ुक़ के गाल पर फिर रखे ‘खुरशीद’ ने लब
    ‘अँधेरा तिलमिलाकर सवेरा हो गया है………..

    kya badhiya girah bandhi hai….daad qubule’n
    -Kanha

  2. सियासतदाँ हमारा मसीहा हो गया है
    ग़रीबी का हमारी तमाशा हो गया है

    अज़ल से देखता हूं यही सपना सुहाना
    शबे-ग़म ढल गई है उजाला हो गया है

    जबीं पर गाँव की क्यूं लिखी है बदनसीबी
    दुपहरी में भी हर सू अँधेरा हो गया है

    उफ़ुक़ के गाल पर फिर रखे ‘खुरशीद’ ने लब
    ‘अँधेरा तिलमिलाकर सवेरा हो गया है ACHCHHI GHAZAL HUI HAI ‘खुरशीद’खैराड़ी SAHAB, GIRAH BHI KHOOB LAGI HAI, MUBAARAK BAAD,

  3. आहहाहा। बहुत अचच्‍छी ग़ज़ल खुशीद भाई। मयंक भाई साहब व और साहबान ने जो कहा, उसके बाद क्‍या कहूं।
    बहुत बधाई। बहुत आभार।
    रश्‍क होता है आपसे और इरशाद भाई से। दो-दो ग़ज़लें ?
    खा़कसार से तो एक भी ढंग से न हुई।
    बधाई।
    सादर
    नवनीत

  4. बड़े मासूम हैं जी मिरे देहातवासी
    इन्हें फिर राहज़न पर भरोसा हो गया

    आपके इन्ही मासूम शेरों पर मई फ़िदा हूँ साहब। पूरी ग़ज़ल उम्दा है। प्रणाम स्वीकार करें।

  5. Bahut umda ghazal huyi hai janaab khursheed saahab…dili daad kubool kijiye…lajawab bahut umda.

  6. आदरणीय ख़ुरशीद साहब,आपने मंयक साहब के तब्सिरे के लिए अगर पहले से ही ये नाय़ाब शे’र सोचकर नहीं रखे थे तो सलाम करती है ये महफ़िल आपको! Living Legend हैं आप सर !
    फ़िदा दिल तब्सिरे पर हमारा हो गया है
    ग़ज़ल के हुस्न में भी इज़ाफ़ा हो गया है

    नवाजिश का तहेदिल से आभारी रहूंगा
    मेरा दिल आपसे अब शनाशा हो गया है

    तुरंत शे’र कह सकने की क़ाबिलियत ••

    कुछ याद आ गया है, वो भी कहता चलूं

    “खीर बनाईं जतन से, चरखा दिया चलाए
    आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजाए”

    ख़ुसरो की पंक्तियां आपके लिए हैं फिर !
    सलाम है आपकी कला को !

    • आदरणीय गुरुवंत साहब
      शुक्रिया
      मेरे अशहार आ. मयंक साहब के तब्सिरे को पढ़कर व्यक्त हुई सहज भावाभिव्यक्ति थे | सलाम है आपको जो आप हर ग़ज़ल और कमेंट को इतने स्नेह के साथ पढ़ते हैं ,यह मेरी खुशनसीबी है कि आप जैसे चाहने वालों की बदौलत ख़ाकसार अदब की जाजम के एक कोने पर थोड़ी सी जगह पाने के लायक हो पाया है
      पुनः कोटि आभार
      सादर

  7. खुर्शीद साहब
    आपकी इस बेहतरीन ग़ज़ल के सबसे खूबसूरत शेर पर दिली दाद क़ुबूल करें !!!
    अच्छी तुझे सोचूं तो भरने लगे है चौकड़ी सी
    तसव्वुर दिल के बन में ग़ज़ाला हो गया है
    “क्या उम्दा ग़ज़ल है….” मित्र !!!!!!

  8. Khursheed bhai, manjhi hui ghazal.. alfaaz ka intekhaab, adaygi.. kya kehne.. waaaah!!

  9. आ. राजमोहन सा.
    आपको कोटि प्रणाम ,आपका स्नेह ग़ज़ल के प्रति मेरे अनुराग में इज़ाफा करता है |तहेदिल से शुक्रिया
    सादर

  10. wah wah sir ji bahut khoob kahi gazal kahi

  11. खुरशीद साहब। बेहद खूबसूरत ग़ज़ल हुई है। हर बार की तरह इस बार भी शे’र दर शे’र कमाल किया है आपने। दिली दाद कुबूल कीजिए।

  12. जिधर भी देखता हूं तुझे ही देखता हूं
    कोई मुझ को बतादे मुझे क्या हो गया है

    हाय क्या सादगी है , बिल्कुल सच्चा शेर और मुझे बहुत पसंद आया …

    और आपका ये शेर मेरा पसंदीदा रहा

    अज़ल से देखता हूं यही सपना सुहाना
    शबे-ग़म ढल गई है उजाला हो गया है

    खुर्शीद जी बहुत अच्छी ग़ज़ल है , बिल्कुल वैसी जैसी आपसे उम्मीद रहती है 🙂

  13. सियासतदाँ हमारा मसीहा हो गया है
    ग़रीबी का हमारी तमाशा हो गया है
    फल्क है सुर्ख़ मगर आफताब काला है !! हमारे दौर की यही तस्वीर है ख़ुर्शीद भाई !!!
    अज़ल से देखता हूं यही सपना सुहाना
    शबे-ग़म ढल गई है उजाला हो गया है
    अहसास का क़र्ब खूब उभरा है !! एक अपूरित उमीद का नाम ज़िन्दगी है !!!
    मरासिम के वसन में मनाफ़िज़ हैं हज़ारों
    कठिन उरयानगी को छुपाना हो गया है
    उत्कृष्ट शिल्प का शेर है दोनो मिसरों की दूरी को सानी मिसरे की गढन ने अद्भुत रूप से अर्थ विस्फोट दिया है बहुत खूब बहुत खूब !!!
    तुझे छूकर नसों में रवाँ है बर्क़ सा क्या
    पिघलकर जोश मन का ,पसीना हो गया है
    मुहब्बत का लम्स ???!!!!
    हया से सच सिमट कर कहाँ जाये बता दो
    हबीबों झूठ उरयाँ सरापा हो गया है
    तुझ्को रुसवा न किया खुद पशेमान हुये !!!! जैसा असर है शेर मे
    मुक़द्दस है ग़ज़ल तू मुनव्वर है ग़ज़ल तू
    तेरे छूते ही ज़र्रा सितारा हो गया है
    नया शेर और गज़ल को एक सुन्दर गहना !!!
    इसी खातिर तो उसकी आरती हमने उतारी है
    ग़ज़ल भी माँ है और उसकी भी शेरों की सवारी है
    उफ़ुक़ के गाल पर फिर रखे ‘खुरशीद’ ने लब
    ‘अँधेरा तिलमिलाकर सवेरा हो गया है
    बेहद खूबसूरत गिरह !! और इस ज़मीन पर तख़ल्लुस का इससे अच्छा इस्तेमाल नहीं हो सकता !!! पुख़्ता और असरदार बयान खुर्शीद भाई !! हमेशा की तरह !! मुबारकबाद कुबूल कीजिये !!1 –मयंक

    • फ़िदा दिल तब्सिरे पर ,हमारा हो गया है
      ग़ज़ल के हुस्न में भी ,इज़ाफा हो गया है

      नवाजिश का तहेदिल से आभारी रहूँगा
      मेरा दिल आपका अब ,शनाशा हो गया है

      आ. मयंक भाईसाहब हौसलाअफजाई के लिए दिल से आभार प्रकट करता हूं ,यही मुहब्बत मुझ पर बरसाते रहिएगा |
      सादर

  14. सारे ही शेर•• एक से बढ़कर एक !!!!!
    ग़ज़ब हैं साहब !
    क्या ही खूबसूरत ख़्य़ाल है।
    लाखों मुबारकबाद भी कम पड गईं हैं !!!!!
    क्या कहे कोई !!!
    बनें रहिएगा साहब ऐसे ही !!!!

  15. अज़ल से देखता हूं यही सपना सुहाना
    शबे-ग़म ढल गई है उजाला हो गया है
    तुझे सोचूं तो भरने लगे है चौकड़ी सी
    तसव्वुर दिल के बन में ग़ज़ाला हो गया हैkhursheed sahab ye do sher bahut pasand aaye mubarakbaad.

  16. इसे कहते हैं ग़ज़ल !!!!!!!!!!!!!!! हम जैसों के लिए सीखने की चीज़!!!! प्रणाम आप को।

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